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Lipedema Symptoms: जांघ की चर्बी को न मान लेना नॉर्मल फैट, हो सकती है यह बीमारी

Painful Thigh Fat: शरीर के निचले हिस्से में असामान्य तरीके से फैट जमा होने लगता है. इसका असर आमतौर पर हिप्स, जांघों और पिंडलियों पर दिखाई देता है. कुछ लोगों में ऊपरी बांहों पर भी फैट जमा हो सकता है.

Lipedema Causes Symptoms And Treatment: शरीर के अलग-अलग हिस्सों में फैट जमा होना आम बात है. वजन बढ़ने पर पेट, कमर और जांघों पर इसका असर ज्यादा दिखाई दे सकता है. लेकिन अगर आपकी जांघों, हिप्स और पैरों के निचले हिस्से में दोनों तरफ असामान्य तरीके से फैट बढ़ रहा है और वजन कम करने के बावजूद इसमें खास बदलाव नहीं दिख रहा, तो इसे केवल मोटापा समझकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है. इसके पीछे लिपेडेमा नाम की एक लंबे समय तक रहने वाली समस्या भी हो सकती है.

लिपेडेमा में शरीर के निचले हिस्से में असामान्य तरीके से फैट जमा होने लगता है. इसका असर आमतौर पर हिप्स, जांघों और पिंडलियों पर दिखाई देता है. कुछ लोगों में ऊपरी बांहों पर भी फैट जमा हो सकता है. खास बात यह है कि आमतौर पर इसका असर हाथों और पैरों के पंजों पर नहीं पड़ता.

नॉर्मल फैट से कैसे अलग है लिपेडेमा?

हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली संस्था clevelandclinic के अनुसार, लिपेडेमा को कई बार सामान्य मोटापा समझ लिया जाता है. इसकी एक वजह यह है कि इस समस्या में शरीर का निचला हिस्सा ज्यादा भारी दिखाई दे सकता है. हालांकि लिपेडेमा और सामान्य बॉडी फैट एक जैसे नहीं हैं. सामान्य फैट में आमतौर पर दर्द नहीं होता, जबकि लिपेडेमा में जमा फैट को छूने या दबाने पर दर्द हो सकता है. त्वचा के नीचे छोटी-छोटी गांठ या कंकड़ जैसी बनावट भी महसूस हो सकती है. इसके अलावा पैरों में भारीपन और सूजन की शिकायत हो सकती है.


Lipedema Symptoms: जांघ की चर्बी को न मान लेना नॉर्मल फैट, हो सकती है यह बीमारी

लिपेडेमा में एक और बड़ा अंतर वजन घटाते समय दिखाई दे सकता है. डाइट और एक्सरसाइज से शरीर के ऊपरी हिस्से का वजन कम हो सकता है, लेकिन लिपेडेमा से प्रभावित जांघों और पैरों में उसी अनुपात में बदलाव नहीं दिखाई देता.

इन लक्षणों पर दें ध्यान

लिपेडेमा में दोनों तरफ हिप्स, जांघों और पिंडलियों में फैट जमा हो सकता है. कुछ लोगों की ऊपरी बांहों में भी ऐसा हो सकता है. प्रभावित हिस्से में हल्के से लेकर तेज दर्द तक की शिकायत हो सकती है. कुछ लोगों को लगातार दर्द रहता है, जबकि कुछ को केवल उस हिस्से को दबाने पर दर्द महसूस होता है. पैरों में भारीपन, सूजन, जल्दी नील पड़ना और सामान्य से ज्यादा थकान भी इसके लक्षणों में शामिल हो सकते हैं. बीमारी बढ़ने पर त्वचा की बनावट भी बदल सकती है और वह असमान दिखाई देने लगती है.


Lipedema Symptoms: जांघ की चर्बी को न मान लेना नॉर्मल फैट, हो सकती है यह बीमारी

क्यों होता है लिपेडेमा?

लिपेडेमा होने की सही वजह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. हालांकि कुछ मामलों में इसका संबंध परिवार से देखा गया है. करीब 20 से 60 फीसदी मामलों में यह समस्या परिवार के दूसरे सदस्यों में भी हो सकती है. यह समस्या लगभग पूरी तरह महिलाओं में देखी जाती है. इसके पीछे हार्मोन की भूमिका होने की भी संभावना मानी जाती है, क्योंकि लिपेडेमा की शुरुआत या इसके लक्षणों का बढ़ना अक्सर प्यूबर्टी, प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज जैसे हार्मोनल बदलावों के दौरान देखा जाता है. मोटापा लिपेडेमा का कारण नहीं माना जाता. हालांकि इस समस्या से जूझ रहे कई लोगों का बॉडी मास इंडेक्स यानी BMI ज्यादा हो सकता है.

समय के साथ बढ़ सकती है समस्या

कई लोगों में लिपेडेमा धीरे-धीरे बढ़ता है. शुरुआती स्टेज में त्वचा सामान्य दिखाई दे सकती है, लेकिन उसके नीचे छोटी गांठों जैसी बनावट महसूस हो सकती है. इस दौरान दर्द और आसानी से नील पड़ने की शिकायत भी हो सकती है. अगली स्टेज में त्वचा की सतह असमान और गड्ढेदार दिखाई देने लग सकती है. समस्या ज्यादा बढ़ने पर पैरों में फैट के बड़े हिस्से और त्वचा की सिलवटें बनने लग सकती हैं, जिससे चलने-फिरने में भी परेशानी हो सकती है. गंभीर स्थिति में लिपेडेमा के साथ लिम्फेडेमा भी हो सकता है, जिसमें शरीर में लिम्फ फ्लूइड जमा होने लगता है.

कैसे होती है इसकी पहचान?

लिपेडेमा की पहचान के लिए कोई एक निश्चित टेस्ट नहीं है. डॉक्टर आमतौर पर मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक जांच के आधार पर इसका पता लगाते हैं. प्रभावित हिस्से में दर्द वाला फैट और पैरों के पंजों की तुलना में पैरों का असामान्य रूप से बड़ा दिखाई देना इसकी पहचान में मदद कर सकता है. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर दूसरी समस्याओं को बाहर करने के लिए ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, MRI या सीटी स्कैन जैसी जांच की सलाह दे सकते हैं.

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क्या लिपेडेमा का इलाज संभव है?

फिलहाल लिपेडेमा का कोई ऐसा इलाज नहीं है, जो इसे पूरी तरह खत्म कर दे. हालांकि सही मैनेजमेंट से दर्द, सूजन और दूसरी परेशानियों को कम करने में मदद मिल सकती है. डॉक्टर एक्सरसाइज, कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स और कुछ मामलों में लिम्फेटिक ड्रेनेज मसाज जैसी थेरेपी की सलाह दे सकते हैं. स्विमिंग, वॉकिंग और साइकिलिंग जैसी एक्टिविटी मोबिलिटी बेहतर करने में मदद कर सकती हैं. कुछ मामलों में डॉक्टर लिपोसक्शन जैसे विकल्प पर भी विचार कर सकते हैं. इलाज व्यक्ति की स्थिति और बीमारी की स्टेज के आधार पर तय किया जाता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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About the author सोनम

सोनम एबीपी लाइव में कंटेंट राइटर हैं. यहां वह लाइफस्टाइल कैटिगरी और इसके अंतर्गत आने वाली सब-कैटिगरीज हेल्थ, होम टिप्स, रिलेशनशिप, ट्रैवल, पैरेंटिंग, ब्यूटी और फैशन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं.

सोनम करीब 15 साल से लेखन की दुनिया में कार्यरत हैं. इससे पहले वह अमर उजाला, दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं. इन सभी जगहों पर उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. सोनम ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन किया है.

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