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बच्चों के लिए जरुरी है 9 घंटे की नींद, एक्सपर्ट से जानिए क्यों?

बच्चे के लिए 9 घंटे की नींद जरूरी है. अगर इससे कम आपका बच्चा सोता है तो उसके मानसिक विकास पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है.

हमारी दिनचर्या का नींद एक अहम हिस्सा है. स्वस्थ रहने के लिए जितना जरूरी खानपान है उतना ही जरूरी एक अच्छी नींद भी है. भागदौड़ भरी जिंदगी में और खराब लाइफस्टाइल की वजह से आज व्यक्ति के लिए एक अच्छी और बेहतर नींद लेना मुश्किल हो गया है. नींद की अवधि उम्र के हिसाब से अलग-अलग है. एक ओर जहां नवजात बच्चे के लिए 15 से 16 घंटे सोना जरुरी है तो दूसरी ओर एक व्यस्क को 7 से 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए.

बच्चों के लिए भी नींद और इसकी अवधि बेहद मायने रखती है. अगर आपका बच्चा सुबह अलार्म के बावजूद बिस्तर से नहीं उठता तो ये एक चिंता की बात है. कई बच्चे रात में अच्छी तरह से नहीं सो पाते जिससे उन्हें अगले दिन नींद आना महसूस होता है और वे दिन में स्कूल के काम पर ध्यान नहीं दे पाते. हर रात 9 घंटे से कम सोने पर बच्चों के स्वास्थ्य और मानसिक विकास पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है.

किशोरों के लिए इतनी देर की नींद जरुरी 

नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार, नवजात शिशु को प्रती रात 15 से 17 घंटे सोना चाहिए. दूसरी तरफ 1 से 4 साल के बच्चों को प्रति रात 10 से 14 घंटे सोना चाहिए. 5 से 10 साल के बच्चों को प्रति रात 10 से 13 घंटे सोना चाहिए और 11 से 14 साल के बच्चों को प्रति रात 9 से 11 घंटे सोना चाहिए. किशोरों को हर रात 8 से 10 घंटे की नींद लेनी चाहिए. अगर किसी की नींद इस अवधि से कम रहती है तो उसे कई तरह की परेशानियां हो सकती है. नींद न आने से चिड़चिड़ापन, गुस्सा, तनाव आदि परेशानियां हो सकती हैं.

नींद पूरी न होने पर हो सकती हैं ये परेशानियां 

एम्पॉवर- द सेंटर में मनोचिकित्सक डॉक्टर डॉ. सपना बांगर ने बताया कि 9 घंटे की नींद बच्चों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि जिन बच्चों को पर्याप्त नींद नहीं मिलती वे कई लक्षणों से पीड़ित हो सकते हैं जिनमें ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, मानसिक असंतुलन और कम भावनात्मक स्थिरता आदि. कम सोने की वजह से डिप्रेशन, एलर्जी, क्रॉनिक पेन, एडीएचडी, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और एंजाइटी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. जो बच्चे 9 घंटे की नींद पूरी नहीं करते या जिन्हें नींद नहीं आती वे स्कूल में होने वाली गतिविधियों में कम भाग लेते हैं और फिजिकली एक्टिव नहीं रहते. 

नींद न आने के पीछे हो सकता है ये कारण

खराब लाइफ़स्टाइल, अधिक देर तक स्मार्टफोन या लैपटॉप यूज़ करना, सोने से पहले शक्कर या कैफीन युक्त पेय पदार्थ का सेवन या भारी भोजन, तनाव शैक्षणिक कठिनाइयों की वजह से बच्चों को नींद आने में परेशानी हो सकती है. माता पिता अपने बच्चे को पर्याप्त नींद दिलाने में उनकी मदद कर सकते हैं. इसके लिए बस आपको इस बातों का ध्यान रखना होगा. 

-बच्चे के सोने का एक शेड्यूल बनाएं 
-सोने से पहले बच्चे को भारी भोजन, शक्कर युक्त भोजन या कैफीन न दें
-बच्चे के सोने के लिए आरामदायक माहौल बनाएं. ऐसा न हो कि वह सो रहा हो और आप टीवी या अन्य गतिविधियां कर रहे हो
- कोशिश करें कि बच्चा सोने से पहले मोबाइल फोन या लैपटॉप का इस्तेमाल न करें

डॉक्टर सपना बांगर ने बताया कि बच्चें स्वस्थ रहे इसके लिए उन्हें  अपने शुरुआती वर्षों में पर्याप्त गुणवत्ता वाली नींद लेनी चाहिए. क्योंकि उन्हें पढ़ने, सीखने और ठीक से प्रदर्शन करने के लिए इसकी आवश्यकता होती है. अगर आप समय रहते बच्चे की नींद की कठिनाइयों का निदान नहीं करते तो लंबे समय में इससे बच्चे पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते है साथ ही आपको चिकित्सा या उपचार पर जीवन भर पैसा खर्च करना पड़ सकता है.

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