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ये हैं तिल खाने के जबरदस्त फायदे? ज्यादातर लोगों नहीं पता होगी ये बात

तिल कैल्शियम, आयरन, मैग्निशियम, फास्फोरस, जिंक और मैंगनीज जैसे मिनरल्स से भरपूर होता है. 100 ग्राम सफेद तिल में लगभग 975 मिलीग्राम कैल्शियम पाया जाता है, जो एक गिलास दूध से भी ज्यादा है.

आज के समय में लोग अच्छी सेहत के लिए मल्टीविटामिन और मिनरल सप्लीमेंट्स पर हजारों रुपये खर्च कर रहे हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि हमारी रसोई में मौजूद एक छोटा-सा बीज कई महंगी गोलियों से ज्यादा असरदार है. दरअसल यह बीज तिल है जिसे आयुर्वेद में महाऔषधि और साइंस में न्यूट्रिएंट्स सुपर फूड माना गया है. तिल में मौजूद पोषक तत्व शरीर से आसानी से अवशोषित हो जाते हैं. यानी नेचुरल तरीके से शरीर को जरूरी विटामिन और मिनरल्स देता है. यही वजह है कि सर्दियों के मौसम में तिल को खास महत्व दिया जाता है और दादी-नानी के नुस्खों में तिल से बनी चीजें जरूर शामिल होती है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि तिल खाने के जबरदस्त फायदे क्या-क्या है. 

तिल को क्यों कहा जाता है सुपरफूड?

तिल कैल्शियम, आयरन, मैग्निशियम, फास्फोरस, जिंक और मैंगनीज जैसे मिनरल्स से भरपूर होता है. 100 ग्राम सफेद तिल में लगभग 975 मिलीग्राम कैल्शियम पाया जाता है जो एक गिलास दूध से भी ज्यादा है. कैल्शियम हड्डियों और जोड़ों की मजबूती के लिए जरूरी होता है और तिल इसे प्राकृतिक रूप से पूरा करता है. इसके अलावा तिल में मौजूद आयरन और कॉपर खून की कमी यानी एनीमिया से लड़ने में मदद करता है. जिम जाने वाले युवाओं के लिए यह प्रोटीन का भी अच्छा सोर्स माना जाता है. 
 
दिल और पाचन के लिए भी फायदेमंद 

तिल में सेसामिन और सेसामोलिन जैसे तत्व पाए जाते हैं जो खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने मदद करते हैं. इससे दिल की सेहत बेहतर रहती है और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है. तिल में मौजूद फाइबर पाचन को सुधारता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है. 

कौन सा तिल ज्यादा होता है फायदेमंद?

सेहत के लिएए काले और सफेद तिल दोनों ही सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं, लेकिन इनके गुण थोड़े अलग होते हैं. सफेद तिल पचाने में आसान होते हैं और इनमें कैल्शियम और हेल्दी फैट्स अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. वहीं काले तिल छिलके के साथ होते हैं, इसलिए इनमें आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स ज्यादा होते हैं.  कम हीमोग्लोबिन कमजोरी और बालों से जुड़ी समस्याओं में काला तिल ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. 

सर्दियों में तिल खाने के फायदे 

आयुर्वेद के अनुसार तिल की तासीर गर्म होती है. सर्दियों में इसका सेवन करने से शरीर अंदर से गर्म रहता है और ठंड से होने वाली समस्याओं से बचाव होता है. यही वजह है कि सर्दियों में तिल के लड्डू, गजक और दूसरी चीजें खूब खाई जाती है. वहीं रोजाना सीमित मात्रा में तिल खाने से हड्डियां मजबूत होती है, पाचन सुधरता है, दिल की सेहत अच्छी रहती है और शरीर में एनर्जी बनी रहती है. इसके अलावा तिल कब्ज से राहत दिलाने में भी मदद करता है 

एक दिन में कितना तिल खाना चाहिए?

तिल की तासीर गर्म होती है, इसलिए इसका ज्यादा मात्रा में सेवन नुकसानदायक हो सकता है. रोजाना 1 से 2 चम्मच यानी लगभग 10 से 15 ग्राम तिल खाना पर्याप्त और सुरक्षित माना जाता है. ज्यादा मात्रा में सेवन करने से पेट में गर्मी, वजन बढ़ने या पाचन की समस्या हो सकती है. वहीं तिल को हल्का भूनकर खाना ज्यादा फायदेमंद होता है. तिल को लड्डू, सलाद, खिचड़ी में या सीधे चबाकर भी खाया जा सकता है.

ये भी पढ़ें-Fatty Liver Disease: भारत के 38% लोग 'फैटी लिवर' की गिरफ्त में! घर बैठे इन 5 संकेतों से करें पहचान

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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