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बारिश के मौसम में क्यों जरूरी है सुबह की सही शुरुआत? जानिए आयुर्वेदिक सलाह

बारिश का मौसम जितना खुशनुमा होता है, उतनी ही चुनौतियां सेहत के लिए लेकर आता है. ऐसे में दिन की शुरुआत अगर आयुर्वेद के अनुसार हो, तो शरीर और मन दोनों मजबूत बने रहते हैं.

मानसून आते ही वह अपने साथ हरियाली और कई अन्य चीजें लेकर आता है. लेकिन सेहत के हिसाब से अगर देखा जाए तो यह समय बहुत नाजुक माना जाता है. इस मौसम में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है. पाचन भी धीमा हो जाता है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में मानसून में दिन की शुरुआत अगर मजबूत और संतुलित ढंग से की जाए तो यह पूरे दिन की ऊर्जा और रोगों से लड़ने की क्षमता को बेहतर बना सकती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताएंगे की बारिश के मौसम में सुबह की शुरुआत क्यों जरूरी होती है ‌और आयुर्वेद में विशेषज्ञ इसके लिए क्या सलाह देते हैं.

सुबह की आदतें शरीर को संतुलन में लाने का अच्छा समय

आयुर्वेद के अनुसार सुबह की आदतें शरीर को संतुलन में लाने का सबसे अच्छा समय माना जाता है. कई आयुर्वेदिक एक्सपर्ट मानते हैं की मौसम में परिवर्तन के समय शरीर बहुत नाजुक हो जाता है और रोगों की चपेट में जल्दी आ सकता है. इसलिए आयुर्वेद में सुबह के समय को बहुत खास माना जाता है क्योंकि यह वहीं समय होता है जब शरीर अच्छे प्रभावों को सबसे जल्दी अपनाता है.

बारिश के मौसम में दिनचर्या की शुरुआत ऐसे करें

गुनगुना पानी पीकर करें दिन की शुरुआत

मानसून के मौसम में सुबह उठते ही आपको एक गिलास गुनगुना पानी पीना चाहिए. गुनगुना पानी पीने से शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकलने में मदद करता है और पाचन को तेज करता है. इसमें नींबू की कुछ बूंदें या हल्दी की एक चुटकी मिलाना और भी फायदेमंद हो सकता है.

ऑयल पुलिंग मुंह की सफाई और इम्यूनिटी के लिए असरदार

मानसून के मौसम में तिल या नारियल तेल को 5 से 10 मिनट तक मुंह में घूमाने से मुंह के बैक्टीरिया बाहर निकलते हैं. इसके अलावा इससे हमारे मसूड़े भी स्वस्थ रहते हैं और शरीर का इम्यून सिस्टम भी मजबूत होता है. जिससे यह मानसून के मौसम में बीमारियों से लड़ने में मदद करता है.

हर्बल चाय प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह

मानसून के मौसम में सुबह उठते ही आपको हर्बल चाय पीनी चाहिए. तुलसी अदरक और काली मिर्च से बनी हल्की हर्बल चाय न केवल मौसम से जुड़े रोगों से बचाव करती है बल्कि गला भी साफ करती है. इसके अलावा यह पाचन शक्ति को भी बढ़ाने में मदद करती है.

प्राणायाम देता है श्वसन तंत्र को मजबूती

बरसात के मौसम में अनुलोम विलोम जैसे प्राणायाम फेफड़ों को मजबूत बनाते हैं. वहीं बरसात के मौसम में सुबह उठकर यह प्राणायाम करने से ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है. इसके अलावा मन भी शांत रहता है साथ ही सुबह खाली पेट इसे करना सबसे प्रभावी माना जाता है.

तेल मालिश से बढ़ती है स्फूर्ति

बरसात के मौसम में नहाने से पहले पूरे शरीर पर गुनगुने आयुर्वेदिक तेल से मालिश करने से त्वचा को पोषण मिलता है. मानसून में तेल मालिश से शरीर भी हल्का महसूस होता है. इसके साथ ही मानसिक तनाव भी कम होता है इसलिए मानसून में सुबह-सुबह शरीर पर तेल मालिश आपको जरूर करनी चाहिए.

बरसात में दिन की मजबूत शुरुआत क्यों जरूरी

बरसात के मौसम में आलस, सुस्ती, भारीपन और संक्रमण आम बात हो जाती है. लेकिन अगर सुबह सही रूटिंन अपनाया जाए तो इन चुनौतियों से खुद को बचा सकता है. ऐसे में सुबह की दिनचर्या में छोटे बदलाव भी लंबे समय तक बड़ा असर डाल सकते हैं. इसलिए बरसात के मौसम में सुबह की शुरुआत मजबूत होनी चाहिए.

Input By : मानसून आते ही वह अपने साथ हरियाली और कई अन्य चीजें लेकर आता है. लेकिन सेहत के हिसाब से अगर देखा जाए तो यह समय बहुत नाजुक माना जाता है. इस मौसम में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है. पाचन भी धीमा हो जाता है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में मानसून में दिन की शुरुआत अगर मजबूत और संतुलित ढंग से की जाए तो यह पूरे दिन की ऊर्जा और रोगों से लड़ने की क्षमता को बेहतर बना सकती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताएंगे की बारिश के मौसम में सुबह की शुरुआत क्यों जरूरी होती है ‌और आयुर्वेद में विशेषज्ञ इसके लिए क्या सलाह देते हैं. सुबह की आदतें शरीर को संतुलन में लाने का अच्छा समय आयुर्वेद के अनुसार सुबह की आदतें शरीर को संतुलन में लाने का सबसे अच्छा समय माना जाता है. कई आयुर्वेदिक एक्सपर्ट मानते हैं की मौसम में परिवर्तन के समय शरीर बहुत नाजुक हो जाता है और रोगों की चपेट में जल्दी आ सकता है. इसलिए आयुर्वेद में सुबह के समय को बहुत खास माना जाता है क्योंकि यह वहीं समय होता है जब शरीर अच्छे प्रभावों को सबसे जल्दी अपनाता है. बारिश के मौसम में दिनचर्या की शुरुआत ऐसे करें गुनगुना पानी पीकर करें दिन की शुरुआत मानसून के मौसम में सुबह उठते ही आपको एक गिलास गुनगुना पानी पीना चाहिए. गुनगुना पानी पीने से शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकलने में मदद करता है और पाचन को तेज करता है. इसमें नींबू की कुछ बूंदें या हल्दी की एक चुटकी मिलाना और भी फायदेमंद हो सकता है. ऑयल पुलिंग मुंह की सफाई और इम्यूनिटी के लिए असरदार मानसून के मौसम में तिल या नारियल तेल को 5 से 10 मिनट तक मुंह में घूमाने से मुंह के बैक्टीरिया बाहर निकलते हैं. इसके अलावा इससे हमारे मसूड़े भी स्वस्थ रहते हैं और शरीर का इम्यून सिस्टम भी मजबूत होता है. जिससे यह मानसून के मौसम में बीमारियों से लड़ने में मदद करता है. हर्बल चाय प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह मानसून के मौसम में सुबह उठते ही आपको हर्बल चाय पीनी चाहिए. तुलसी अदरक और काली मिर्च से बनी हल्की हर्बल चाय न केवल मौसम से जुड़े रोगों से बचाव करती है बल्कि गला भी साफ करती है. इसके अलावा यह पाचन शक्ति को भी बढ़ाने में मदद करती है. प्राणायाम देता है श्वसन तंत्र को मजबूती बरसात के मौसम में अनुलोम विलोम जैसे प्राणायाम फेफड़ों को मजबूत बनाते हैं. वहीं बरसात के मौसम में सुबह उठकर यह प्राणायाम करने से ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है. इसके अलावा मन भी शांत रहता है साथ ही सुबह खाली पेट इसे करना सबसे प्रभावी माना जाता है. तेल मालिश से बढ़ती है स्फूर्ति बरसात के मौसम में नहाने से पहले पूरे शरीर पर गुनगुने आयुर्वेदिक तेल से मालिश करने से त्वचा को पोषण मिलता है. मानसून में तेल मालिश से शरीर भी हल्का महसूस होता है. इसके साथ ही मानसिक तनाव भी कम होता है इसलिए मानसून में सुबह-सुबह शरीर पर तेल मालिश आपको जरूर करनी चाहिए. बरसात में दिन की मजबूत शुरुआत क्यों जरूरी बरसात के मौसम में आलस, सुस्ती, भारीपन और संक्रमण आम बात हो जाती है. लेकिन अगर सुबह सही रूटिंन अपनाया जाए तो इन चुनौतियों से खुद को बचा सकता है. ऐसे में सुबह की दिनचर्या में छोटे बदलाव भी लंबे समय तक बड़ा असर डाल सकते हैं. इसलिए बरसात के मौसम में सुबह की शुरुआत मजबूत होनी चाहिए. ये भी पढ़ें- नारियल तेल से मिलेगी चमकदार और साफ त्वचा, जानिए लगाने का तरीका
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