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कैसे तय होती है किसी देश की ताकत, किन चीजों को बनाया जाता है आधार?

दुनिया के शक्तिशाली देशों की लिस्ट को देखें तो इसमें सबसे ऊपर अमेरिका है, रूस, चीन और भारत काबिज है. ये देश न केवल सैन्य क्षमता के मामले में ताकतवर हैं, बल्कि बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश भी हैं.

दुनिया के कई देशों के बीच जैसे-जैसे टकराव बढ़ रहा है, वैसे-वैसे ताकतवर देशों की चर्चा भी तेज होती जा रही है. इसका मजमून हाल ही में हुआ भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष है. भारत ने जिस तरह तीन दिन में पाकिस्तान को घुटने में ला दिया, उससे भारत और उसकी सैन्य ताकत की चर्चा दुनियाभर में होने लगी है. दुनिया के ताकतवर देशों की लिस्ट को देखें तो भारत इसमें चौथे नंबर पर काबिज है. भारत से ऊपर अमेरिका, रूस और चीन जैसे देश हैं. 

अब सवाल यह है किसी देश की ताकत कैसे तय होती है? क्या सिर्फ सैन्य शक्ति को देखकर ही शक्तिशाली देशों की लिस्ट तैयार की जाती है? इसमें किन-किन चीजों को आधार बनाया जाता है? चलिए जानते हैं... 

ये हैं दुनिया के पांच शक्तिशाली देश

दुनिया के पांच सबसे शक्तिशाली देशों की लिस्ट को देखें तो इसमें सबसे ऊपर अमेरिका है, जिसकी सैन्य शक्ति दुनिया में सबसे ज्यादा है. वहीं अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी है. इसके बाद दूसरे नंबर पर रूस, तीसरे नंबर पर चीन, चौथे पर भारत और पांचवे नंबर पर उत्तर कोरिया जैसे देश हैं. ये सभी देश परमाणु शक्ति संपन्न हैं और यहां की अर्थव्यवस्था भी कई मायनों में बड़ी है. 

किन-किन चीजों को बनाया जाता है आधार?

जब भी दुनिया के शक्तिशाली देशों की लिस्ट तैयार होती है तो सिर्फ सैन्य शक्ति को नहीं देखा जाता. शक्तिशाली देशों की सूची तैयार करने में उस देश की आर्थिक ताकत, सैन्य क्षमता, तकनीकी विकास जैसे आधार भी देखे जाते हैं. यानी किसी देश की आबादी कितनी है और वहां की प्रति व्यक्ति आय क्या है. उस देश की अर्थव्यवस्था कितनी बड़ी है और यह वैश्विक परिदृश्य में किस जगह खड़ी होती है. इसके अलावा उस देश के पास कौन-कौन से संसाधन उपलब्ध हैं, सैन्य क्षमता कितनी है. इसके अलावा वहां के रक्षा बजट को भी आधार बनाया जाता है. 

ये दो फैक्टर भी होते हैं जरूरी

शक्तिशाली देशों की रैंकिंग तय करने के लिए सबसे जरूरी राजनीतिक प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भी आधार बनाया जाता है. मसलन किसी देश का राजनीतिक प्रभाव क्या है. यानी उस देश की घरेलू या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता कितनी है और वह वैश्विक राजनीति को किस तरह साध सकता है. इसके अलावा यह भी देखा जाता है कि किसी देश के अंतरराष्ट्रीय संबंध किन-किन देशों के साथ हैं. वह देश किन गठबंधनों और व्यापार समझौते में शामिल है और संयुक्त राष्ट्र में उसका कद कितना बड़ा है. 

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प्रांजुल श्रीवास्तव एबीपी न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. फिलहाल फीचर डेस्क पर काम कर रहे प्रांजुल को पत्रकारिता में 9 साल तजुर्बा है. खबरों के साइड एंगल से लेकर पॉलिटिकल खबरें और एक्सप्लेनर पर उनकी पकड़ बेहतरीन है. लखनऊ के बाबा साहब भीम राव आंबेडकर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का 'क, ख, ग़' सीखने के बाद उन्होंने कई शहरों में रहकर रिपोर्टिंग की बारीकियों को समझा और अब मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं. प्रांजुल का मानना है कि पाठक को बासी खबरों और बासी न्यूज एंगल से एलर्जी होती है, इसलिए जब तक उसे ताजातरीन खबरें और रोचक एंगल की खुराक न मिले, वह संतुष्ट नहीं होता. इसलिए हर खबर में नवाचार बेहद जरूरी है.

प्रांजुल श्रीवास्तव काम में परफेक्शन पर भरोसा रखते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता सिर्फ सूचनाओं को पहुंचाने का काम नहीं है, यह भी जरूरी है कि पाठक तक सही और सटीक खबर पहुंचे. इसलिए वह अपने हर टास्क को जिम्मेदारी के साथ शुरू और खत्म करते हैं. 

अलग अलग संस्थानों में काम कर चुके प्रांजुल को खाली समय में किताबें पढ़ने, कविताएं लिखने, घूमने और कुकिंग का भी शौक है. जब वह दफ्तर में नहीं होते तो वह किसी खूबसूरत लोकेशन पर किताबों और चाय के प्याले के साथ आपसे टकरा सकते हैं.

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