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Childbirth In Space: क्या एलियंस जैसा दिखेगा अंतरिक्ष में पैदा होने वाला बच्चा, जानें कैसी होगी उसके शरीर की बनावट?

Childbirth In Space: अंतरिक्ष को समझने के लिए वैज्ञानिकों द्वारा बड़ी-बड़ी स्टडी और रिसर्च की जा रही है. आज हम जानेंगे कि अगर स्पेस में बच्चा पैदा होता है तो वह देखने में कैसा होगा. आइए जानते हैं.

Childbirth In Space: अंतरिक्ष को समझने के लिए वैज्ञानिक नए-नए अध्ययन करते रहते हैं. चांद और मंगल ग्रह पर कॉलोनियां बनाने का विचार तो काफी समय से किया जा रहा है. लेकिन आपने कभी सोचा है की क्या अंतरिक्ष में बच्चों का जन्म हो सकता है? या अगर अंतरिक्ष में बच्चा पैदा हुआ तो वह धरती पर पैदा होने वाले इंसानों से अलग दिखेगा या फिर नहीं? आइए जानते हैं कि अंतरिक्ष में पैदा होने वाले बच्चों के शरीर पर कैसा प्रभाव पड़ सकता है और क्या वे एलियन जैसे दिखेंगे.

हड्डियों का ढांचा

अंतरिक्ष में बच्चों के पैदा होने पर सबसे बड़ी चुनौती है बोन डेंसिटी.  आपको बता दें कि अंतरिक्ष में माइक्रो ग्रेविटी की वजह से अंतरिक्ष यात्री सिर्फ 6 महीने के अंदर ही अपनी 12% बोन डेंसिटी को खो देते हैं. यह चीज गर्भवती महिलाओं के लिए काफी ज्यादा खतरनाक हो सकती है. ऐसा इसलिए क्योंकि बच्चे के जन्म के दौरान पेल्विक फ्लोर पर काफी ज्यादा दबाव पड़ता है. मजबूत हड्डियां ना होने पर डिलीवरी के दौरान हड्डियां टूट सकती हैं और इंटरनल ब्लीडिंग भी हो सकती है. दरअसल वैज्ञानिकों का कहना है कि स्पेस में मां के बर्थ कनाल के जरिए नेचुरल डिलीवरी संभव ही नहीं है. इस वजह से सिर्फ सी सेक्शन से ही बच्चों का जन्म होगा.

कैसा होगा शरीर का आकार

अब क्योंकि स्पेस में गुरुत्वाकर्षण नहीं है इस वजह से अंतरिक्ष में पैदा होने वाले बच्चों का विकास धरती पर पैदा होने वाले बच्चों से अलग हो सकता है. स्पेस में पैदा होने वाले बच्चों का सिर बड़ा हो सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि सी सेक्शन से जन्मे बच्चे का सिर उतना नहीं बढ़ता जितने मां के बर्थ कनाल के जरिए जन्म लेने पर.

मांसपेशियां और मूवमेंट

एक और अंतर मांसपेशियों के विकास का होगा. बिना ग्रेविटी के बच्चों को खड़े होने या फिर चलने के लिए मजबूत पर और पीठ की मांसपेशियों की जरूरत नहीं होगी. बल्कि उनके शरीर का निचला हिस्सा कमजोर होगा और ऊपरी हिस्सा मजबूत हो सकता है. क्योंकि बिना गुरुत्वाकर्षण वाले वातावरण में तैरने और खुद को इधर-उधर ले जाने के लिए बाहों का ही इस्तेमाल ज्यादा होता है. समय के साथ-साथ पीढ़ी दर पीढ़ी यह एक ऐसा शरीर बन सकता है जो आज के इंसानों से काफी अलग हो.

इसी के साथ बच्चों की त्वचा पर भी काफी ज्यादा असर पड़ेगा. दरअसल धरती पर जो सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरण होती है उनसे बचाव के लिए हमारे अंदर मेलेनिन बनता है. यही कारण है कि हमारा रंग गहरा या फिर हल्का होता है. लेकिन अंतरिक्ष में कॉस्मिक किरणों से बचाव के लिए गर्भवती महिला को यान के अंदर ही रहना होगा. इस वजह से शिशु के अंदर मेलेनिन होगा ही नहीं और उसका रंग एकदम हल्का हो सकता है.

क्या अंतरिक्ष के बच्चे एलियन जैसे दिखेंगे?

पीढ़ी दर पीढ़ी बच्चों में ऐसे लक्षण विकसित हो सकते हैं जिन्हें हम एलियन से जोड़ते हैं. जैसे सिर बड़ा होना, हड्डियों का पतला होना, गोरी त्वचा और कमजोर निचला शरीर. वे अभी भी इंसान ही होंगे लेकिन स्पेस के वातावरण की वजह से उनका बाहरी रूप धरती पर पैदा हुए बच्चों से काफी अलग हो सकता है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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