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सोने से पहले WIFI बंद करना कितना सही, क्या सच में इससे हो सकता है कैंसर?

WiFi Radiation health Effects: वाई-फाई रेडिएशन को लेकर समाज में कई तरह के डर व्याप्त हैं, जिनमें कैंसर और ब्रेन ट्यूमर प्रमुख हैं. आइए जानें कि क्या इससे वाकई कैंसर होने का खतरा है.

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  • सोते समय मोबाइल फोन और वाई-फाई राउटर को शरीर से दूर रखें.

WiFi Radiation health Effects: आज के डिजिटल दौर में वाई-फाई हमारे जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन गया है, लेकिन इसके साथ ही स्वास्थ्य से जुड़ी कई चिंताएं भी पैदा हो गई हैं. क्या आपने कभी सोचा है कि रात को आपके सिरहाने रखा राउटर आपकी नींद और दिमाग पर क्या असर डाल रहा है? इंटरनेट पर अक्सर यह दावा किया जाता है कि वाई-फाई से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. विज्ञान और तर्क के बीच इस बहस ने कई लोगों को दुविधा में डाल दिया है. आइए जानते हैं कि क्या रात में राउटर बंद करना वाकई जरूरी है.

कैंसर का डर और रेडिएशन की हकीकत

अक्सर लोग वाई-फाई के रेडिएशन को मोबाइल टॉवर या एक्स-रे जितना खतरनाक मान लेते हैं, लेकिन विज्ञान के अनुसार वाई-फाई से निकलने वाली रेज 'नॉन-आयोनाइजिंग' श्रेणी की होती हैं. इसका मतलब है कि इनमें इतनी ऊर्जा नहीं होती कि ये इंसान के डीएनए को नुकसान पहुंचा सकें या सीधे कैंसर का कारण बनें. यह रेडिएशन बहुत कम बिजली का इस्तेमाल करती है और राउटर से दूरी बढ़ने के साथ इसका प्रभाव बहुत कमजोर हो जाता है. इसलिए, सीधे तौर पर वाई-फाई को कैंसर से जोड़ना फिलहाल किसी वैज्ञानिक शोध में साबित नहीं हुआ है.

दिमाग के इलेक्ट्रिकल इम्पलसेस पर वाईफाई का असर

भले ही कोई स्पष्ट वैज्ञानिक प्रमाण न हो, लेकिन डॉक्टर एक तार्किक पक्ष जरूर रखते हैं. हमारा दिमाग इलेक्ट्रिकल इम्पलसेस यानी बिजली के संकेतों पर काम करता है, जिसकी मदद से न्यूरॉन्स आपस में संवाद करते हैं. चूंकि वाई-फाई राउटर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड (EMF) पर आधारित होते हैं, इसलिए यह मुमकिन है कि वे दिमाग के इन प्राकृतिक संकेतों के साथ मामूली दखलअंदाजी करें. विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक निष्कर्ष न होने के बावजूद, सतर्कता बरतते हुए ईएमएफ के एक्सपोजर को कम से कम रखना ही बुद्धिमानी है.

रात के समय वाई-फाई बंद करना क्यों है जरूरी?

दिन और रात के समय हमारे शरीर की कार्यप्रणाली में बड़ा अंतर होता है. दिन में हमारा शरीर एक्टिव मोड में होता है, लेकिन रात को हमारा दिमाग स्लीप वेव्स के जरिए गहरी नींद और रिकवरी की कोशिश करता है. बीबीसी की मानें तो, रात के समय वाई-फाई राउटर बंद करने से दिमाग को बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के पूरी तरह रेस्ट और साउंड स्लीप मिलने में मदद मिलती है. रात में नींद का चक्र यानी स्लीप साइकिल जितना अच्छा होगा, सुबह उठने पर आप उतने ही ऊर्जावान महसूस करेंगे.

मोबाइल फोन की रेडिएशन का सिरहाने पर असर

सिर्फ वाई-फाई ही नहीं, बल्कि मोबाइल फोन जिसे हम अक्सर अपने सिरहाने रखकर सोते हैं, वह भी माइक्रोवेव रेडिएशन पैदा करता है. मोबाइल फोन की फ्रीक्वेंसी अलग होती है और यदि आप इसे इस्तेमाल नहीं भी कर रहे हैं, तब भी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स निकलती रहती हैं. हालांकि, हमारे आसपास मौजूद बैकग्राउंड रेडिएशन (जैसे टीवी, फ्रिज और एसी से निकलने वाली लहरें) की तुलना में मोबाइल और वाई-फाई का स्तर काफी कम है, फिर भी सोते समय इन्हें शरीर से दूर रखना एक स्वस्थ आदत मानी जाती है. 

ईएमएफ ओवरएक्सपोजर से कैसे बचें?

अगर आपको रेडिएशन के ज्यादा संपर्क में आने का डर है, तो विशेषज्ञों की कुछ सरल सलाह मानी जा सकती है. सबसे जरूरी यह है कि जिस कमरे में आप सोते हैं, उस कमरे में राउटर न लगाएं. यदि राउटर बेडरूम में ही रखना मजबूरी है, तो इसे अपने बेड से कम से कम 10-15 फीट की दूरी पर रखें. ईएमएफ (EMF) के संपर्क को कम करने के लिए रात में फोन को एयरप्लेन मोड पर डालना या उसे दूसरे कमरे में चार्ज करना भी एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है.

क्या रेडिएशन से घट रही है आपकी कार्यक्षमता?

रेडिएशन के संपर्क का सबसे पहला और सूक्ष्म असर आपकी नींद की गुणवत्ता पर पड़ता है. यदि आपकी 'साउंड स्लीप' यानी गहरी नींद बाधित होती है, तो अगले दिन इसका सीधा असर आपकी कार्यक्षमता पर दिखता है. इससे एकाग्रता की कमी, याददाश्त में धुंधलापन और फोकस लेवल घटने जैसी समस्याएं हो सकती हैं. सैद्धांतिक रूप से, लंबे समय तक रेडिएशन के प्रभाव को शरीर में ट्यूमर बनने की संभावनाओं से भी जोड़कर देखा जाता रहा है, जिस पर दुनिया भर में शोध जारी हैं.

About the author निधि पाल

निधि पाल एबीपी लाइव में कंटेंट राइटर हैं. ये यहां पर जीके सेक्शन की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं. पिछले 7 साल से पत्रकारिता की दुनिया में कार्यरत निधि पाल ने इससे पहले अमर उजाला डिजिटल, न्यूज 24, ईटीवी भारत हैदराबाद जैसे बड़े संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है.

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उन्होंने आईआईएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन लखनऊ से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है.

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