धूप में रखते ही अपने आप क्यों हिलने लगते हैं ये बीज, ठंडी जगह पर आते ही क्यों जाते हैं रुक?
इन खास बीजों को आमतौर पर मैक्सिकन जंपिंग बीन्स कहा जाता है. ये असल में कोई बीन्स नहीं, बल्कि एक झाड़ी के बीज होते हैं, जिनके अंदर एक छोटे सफेद कीड़े का लार्वा मौजूद रहता है.

अगर आपने कभी ऐसे बीज देखे हों जो धूप में रखते ही अपने आप हिलने लगते हैं और ठंडी जगह पर पहुंचते ही शांत हो जाते हैं, तो पहली बार में आपको यह किसी जादू से कम नहीं लग होगा. लेकिन असलियत में इसके पीछे कोई चमत्कार नहीं, बल्कि एक छोटा सा कीड़ा और उसका बचाव करने का तरीका छिपा होता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि धूप में रखते ही एक खास प्रकार के बीच अपने आप क्यों हिलने लगते हैं और ठंडी जगह पर आते ही क्यों रुक जाते हैं.
बीज के अंदर छिपा होता है कीड़े का लार्वा
दरअसल इन खास बीजों को आमतौर पर मैक्सिकन जंपिंग बीन्स कहा जाता है. ये असल में कोई बीन्स नहीं, बल्कि एक झाड़ी के बीज होते हैं, जिनके अंदर एक छोटे सफेद कीड़े का लार्वा मौजूद रहता है. यही लार्वा बीज के हिलने-डुलने की वजह बनता है. जब ये बीज जमीन पर गिरते हैं, तो अंदर मौजूद लार्वा पूरी तरह बाहर के तापमान पर निर्भर हो जाता है. वहीं धूप में जमीन का तापमान काफी ज्यादा हो सकता है, जो लार्वा के लिए खतरनाक होता है. ऐसे में गर्मी से बचने के लिए लार्वा बीज के अंदर दीवारों से टकराने लगता है. इसी टकराव की वजह से बीज हिलते हुए नजर आते हैं.
ठंड मिलते ही क्यों रुक जाते हैं बीज?
वहीं जैसे ही ये बीज को किसी ठंडी या छायादार जगह पर रखा जाता है, लार्वा को गर्मी का खतरा नहीं होता है. ऐसे में वह शांत हो जाता है और बीज की हिलना भी रुक जाता है. जिसका मतलब है कि इस बीज का हिलना सीधे तौर पर तापमान से जुड़ा होता है. वहीं अमेरिका की बिंघमटन यूनिवर्सिटी के रिसर्च में सामने आया है कि ये लार्वा अलग-अलग रंग की रोशनी पर भी अलग तरह से रिएक्ट करते हैं. रिसर्च में सामने आया कि लाल रोशनी में लार्वा ज्यादा एक्टिव हो जाता है, जबकि बैंगनी रोशनी में उसकी एक्टिविटी कम हो जाती है. हालांकि बीज की परत से बहुत कम रोशनी अंदर पहुंचती है, फिर भी लार्वा इन बदलावों को महसूस कर लेता है.
बीज को नुकसान पहुंचे तो रुक जाती है छलांग
रिसर्च में यह भी सामने आया कि अगर बीज की परत को नुकसान पहुंचता है, तो लार्वा की हिलने-डुलने की क्षमता कम हो जाती है. हालांकि लार्वा रेशमी धागों से बीज की मरम्मत कर सकता है, लेकिन डैमेज बीज में वह गर्मी से बचने के लिए पहले की तरह हिल नहीं पाता. वहीं लार्वा कई महीनों तक बीज के अंदर रहता है और समय-समय पर हरकत करता रहता है. बाद में वह बीज के अंदर ही कोया बनाता है और फिर एक तितली में बदलकर बाहर निकल आता है. इसके बाद यह चक्र दोबारा शुरू हो जाता है.
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Source: IOCL
























