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सबसे ज्यादा कुवैत को ही निशाना क्यों बना रहा ईरान, यहां पर हमले से अमेरिका को कितना नुकसान?

ईरान और अमेरिका का यह संघर्ष अब केवल मिसाइलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने वैश्विक आर्थिक और सैन्य सुरक्षा के लिए एक बड़ा संकट पैदा कर दिया है. कुवैत पर किए गए हमलों ने अमेरिका को भारी नुकसान पहुंचाया है.

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब एक ऐसे मोड़ पर आ पहुंचा है जहां सीधी जंग की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं. हालिया घटनाओं ने खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है. अमेरिका द्वारा किए गए सैन्य हमलों के जवाब में ईरान ने बहरीन, जॉर्डन और विशेष रूप से कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बनाया है. ईरान की इस आक्रामक कार्रवाई ने न केवल रणनीतिक संतुलन बिगाड़ा है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा माने जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट को भी अनिश्चित काल के लिए बंद करने का ऐलान कर दिया है. यह स्थिति मध्य पूर्व में अमेरिका की दशकों पुरानी सैन्य पकड़ को सीधी चुनौती दे रही है. आइए जानें कि कुवैत को निशाना बनाने से अमेरिका को कितना नुकसान है.

रणनीतिक ठिकानों पर हमला

ईरान ने कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइलों और ड्रोनों से भीषण हमले किए हैं, जिसका मुख्य कारण वहां अमेरिका की भारी सैन्य मौजूदगी है. कुवैत, खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी अभियानों का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक केंद्र माना जाता है, जो सीधे तौर पर ईरान की सीमाओं के करीब है. ईरान का मानना है कि अमेरिका कुवैत के हवाई क्षेत्रों और जमीन का उपयोग उसके खिलाफ नाकाबंदी और सैन्य हमलों की साजिश रचने के लिए कर रहा है. इन हमलों के माध्यम से ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी क्षेत्रीय सहयोगी देश को निशाना बनाने से पीछे नहीं हटेगा.

अमेरिकी सेना की मौजूदगी

कुवैत को निशाना बनाने की सबसे बड़ी वजह वहां तैनात हजारों अमेरिकी सैनिक और उनके उन्नत हथियार हैं. यहां स्थित अली अल सलेम जैसे प्रमुख एयरबेस का इस्तेमाल अमेरिका द्वारा क्षेत्र में निगरानी और जवाबी कार्रवाई के लिए किया जाता रहा है. ईरान इन सैन्य अड्डों को अपने अस्तित्व के लिए एक संभावित खतरे के रूप में देखता है और इसीलिए उसने इन्हें प्राथमिकता के आधार पर हमले के लिए चुना है. यह सैन्य उपस्थिति ही कुवैत को ईरान की हिट लिस्ट में सबसे ऊपर रखती है, क्योंकि यहां से अमेरिकी वायुसेना बहुत कम समय में ईरान तक पहुंच सकती है.

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दबाव बनाने की कूटनीति

ईरान के इन हमलों के पीछे एक गहरी कूटनीतिक चाल भी छिपी हुई है, जिसका उद्देश्य कुवैत की सरकार पर भारी दबाव बनाना है. ईरान चाहता है कि कुवैत अपने देश से अमेरिकी सैन्य पहुंच को प्रतिबंधित करे या उन्हें वहां से हटने के लिए मजबूर करे. लगातार हो रहे बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों से ईरान यह संदेश दे रहा है कि अमेरिका का साथ देना किसी भी खाड़ी देश के लिए महंगा साबित हो सकता है. यह क्षेत्रीय सहयोगियों के बीच डर पैदा करने और अमेरिका को मध्य पूर्व में अलग-थलग करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है.

अमेरिका को कितना भारी नुकसान

कुवैत में हुए इन हमलों से अमेरिका को रणनीतिक और वित्तीय दोनों मोर्चों पर तगड़ा झटका लगा है. रक्षा विशेषज्ञों और शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, इन हमलों में अमेरिका को लगभग 800 मिलियन डॉलर का भारी नुकसान हुआ है. इस राशि में नष्ट हुई सैन्य संपत्तियां, रडार सिस्टम और क्षतिग्रस्त हुए बुनियादी ढांचे की लागत शामिल है. यह नुकसान केवल पैसों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने मध्य पूर्व में अमेरिका की प्रतिक्रिया क्षमता और उसके रसद नेटवर्क को भी गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिससे अमेरिकी रक्षा विभाग पर दबाव बढ़ गया है.

ड्रोन्स और हथियारों की तबाही

कुवैत के अली अल-सलेम एयरबेस पर हुए हमलों में अमेरिका के अत्यंत आधुनिक और महंगे MQ-9 Reaper स्ट्राइक ड्रोन नष्ट हो गए हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सिर्फ एक रीपर ड्रोन की कीमत ही लगभग 30 मिलियन डॉलर होती है. इसके अलावा, हमले में उन हैंगरों को भी भारी क्षति पहुंची है जहां विमानों और ड्रोनों को सुरक्षित रखा जाता था. हथियारों के गोदामों और तकनीक से लैस ठिकानों पर हुए इन प्रहारों ने अमेरिका की हवाई शक्ति को इस क्षेत्र में तात्कालिक रूप से कमजोर कर दिया है. 

सुरक्षा तंत्र पर प्रहार

ईरान की मिसाइलों ने अमेरिका के सबसे भरोसेमंद एयर डिफेंस सिस्टम को भी चुनौती दी है. हमलों के दौरान थाड (THAAD) सिस्टम और पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर जैसी रडार साइटों को काफी नुकसान पहुंचा है. ये सिस्टम किसी भी हमले को हवा में ही नाकाम करने के लिए लगाए गए थे, लेकिन इनकी क्षति ने अमेरिकी सुरक्षा चक्र में सेंध लगा दी है. उपकरणों के साथ-साथ इस भीषण गोलाबारी और मिसाइल के मलबे की चपेट में आने से कई अमेरिकी सैनिक और वहां काम कर रहे ठेकेदार घायल हुए हैं, जो अमेरिका के लिए एक बड़ी मानवीय चिंता का विषय है.

सैन्य रसद पर कितना असर?

कुवैत पर हमले से अमेरिका का पूरा सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक नेटवर्क अस्त-व्यस्त हो गया है. मध्य पूर्व के अन्य देशों में तैनात अमेरिकी सेना को जरूरी सामान और सैन्य रसद भेजने के लिए कुवैत एक मुख्य ट्रांजिट पॉइंट रहा है. ईरान ने इस केंद्र को बाधित करके अमेरिका की युद्धक क्षमता को धीमा करने का प्रयास किया है. क्षेत्रीय प्रभाव के लिहाज से देखें तो लगातार होते हमलों ने अमेरिका के अन्य सहयोगियों के मन में भी अपनी सुरक्षा को लेकर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे अमेरिका की क्षेत्रीय पकड़ ढीली होती दिख रही है.

होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी

ईरानी सेना की विंग इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का फैसला इस टकराव का सबसे खतरनाक पहलू है. इस मार्ग से दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है. अगले आदेश तक इसकी बंदी और तेल टैंकरों पर हमलों ने वैश्विक ऊर्जा संकट का खतरा पैदा कर दिया है. यह नाकाबंदी सीधे तौर पर अमेरिका और उसके पश्चिमी मित्रों की अर्थव्यवस्था पर वार करने के लिए की गई है, ताकि उन्हें ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने से रोका जा सके और बातचीत की मेज पर लाया जा सके.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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