UNSC में भारत को क्यों मिलनी चाहिए परमानेंट सीट? आंकड़ों के जरिए जानें जवाब
भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी, 4.15 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और यूएन शांति सेना में अहम योगदान के दम पर यूएनएससी में स्थाई सीट का सबसे मजबूत हकदार है. आइए इसे आंकड़ों के जरिए समझ लेते हैं.

ग्लोबल मंचों पर भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के पुराने ढांचे में बदलाव की वकालत कर रहा है. हाल ही में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत ने साफ कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधारों को अब ज्यादा दिनों तक टाला नहीं जा सकता है. संयुक्त राष्ट्र नेतृत्व ने भी माना है कि दुनिया की संस्थाओं को साल 1945 के पुराने ढांचे के बजाय साल 2026 की जमीनी सच्चाइयों के हिसाब से काम करना होगा. एलन मस्क जैसी प्रमुख वैश्विक हस्तियों ने भी माना है कि भारत जैसे विशाल देश को स्थाई सीट से बाहर रखना बेतुका है. चलिए जानें कि भारत को क्यों इसमें परमानेंट सीट मिलनी चाहिए.
क्या है सुरक्षा परिषद का ढांचा और काम?
द्वितीय विश्व युद्ध के खत्म होने के बाद 24 अक्टूबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र संघ का गठन किया गया था, जिसमें आज दुनिया के 193 देश शामिल हैं. यूएनएससी इसी संगठन की सबसे ताकतवर इकाई है, जिसका मुख्य काम दुनिया भर में शांति और सुरक्षा बनाए रखना है. सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य देश होते हैं. इनमें अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन 5 स्थाई सदस्य हैं, जिनके पास वीटो पावर है. बाकी 10 देश अस्थायी सदस्य के तौर पर बारी-बारी से चुने जाते हैं, जिनमें बहरीन, ऑस्ट्रिया और कोलंबिया जैसे देश शामिल हैं.
आबादी का नया समीकरण
यूएनएससी में भारत की दावेदारी का पहला और सबसे बड़ा आधार देश की आबादी है. संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के आंकड़ों के अनुसार, भारत 146.39 करोड़ से ज्यादा आबादी के साथ दुनिया का सबसे बड़ा देश बन चुका है. चीन को पीछे छोड़कर सबसे ज्यादा आबादी वाला मुल्क बनने के बाद अब भारत को वैश्विक फैसले लेने वाले मंच से अलग रखना न्यायसंगत नहीं दिखता. जब दुनिया का हर छठा व्यक्ति भारत में रहता है, तो सुरक्षा परिषद में भारत का प्रतिनिधित्व होना बेहद जरूरी हो जाता है.
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सबसे तेजी से बढ़ती इकोनॉमी
दूसरा बड़ा आधार भारत की मजबूत और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है. साल 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी विकास दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2026 तक भारत की अर्थव्यवस्था 4.15 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर चुकी है. आईएमएफ का अनुमान है कि 2028-29 तक भारत आसानी से 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनामी बन जाएगा. इस आर्थिक मजबूती के दम पर भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहा है.
यूएन पीसकीपिंग में योगदान
वैश्विक शांति के मोर्चे पर भारत का योगदान ऐतिहासिक रहा है. भारत साल 1950 से संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में अपनी सेवाएं दे रहा है. सन् 1948 से लेकर अब तक लगभग 2.90 लाख भारतीय सैनिक अंतरराष्ट्रीय शांति मिशनों में अपनी बहादुरी दिखा चुके हैं. वर्तमान में भी भारत के 5,200 से अधिक जांबाज सैनिक दुनिया के विभिन्न संकटग्रस्त इलाकों में तैनात हैं. शांति सेना में सबसे ज्यादा सैनिक भेजने वाले देशों की सूची में भारत दुनिया भर में चौथे स्थान पर आता है.
परमाणु शक्ति संपन्न देश और जिम्मेदार नीति
सुरक्षा परिषद की परमानेंट सीट का चौथा मजबूत आधार भारत का परमाणु शक्ति होना है. SIPRI के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, भारत के पास लगभग 190 परमाणु हथियार मौजूद हैं. वर्तमान सुरक्षा परिषद के पांचों स्थायी सदस्य भी परमाणु हथियारों से लैस हैं. भारत ने हमेशा एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति के रूप में अपनी छवि बनाई है और अपनी 'नो फर्स्ट यूज' यानी पहले इस्तेमाल न करने की नीति का सख्ती से पालन किया है. इसलिए तकनीकी और सामरिक दोनों लिहाज से भारत सुरक्षा परिषद की स्थाई सीट का हकदार है.

अस्थायी सदस्य का लंबा अनुभव और नई दावेदारी
पांचवां और अंतिम आधार भारत का सुरक्षा परिषद में काम करने का पुराना और समृद्ध अनुभव है. भारत अब तक 8 बार यूएनएससी का अस्थायी सदस्य रह चुका है, जिसमें 1950-51 से लेकर हालिया 2021-22 का कार्यकाल शामिल है. भारत ने अब साल 2028-29 की अस्थायी सदस्यता के लिए भी अपना मजबूत दावा पेश कर दिया है. अगर भारत को यह मौका मिलता है तो यह नौवां अवसर होगा जब भारत इस प्रतिष्ठित मंच पर वैश्विक मुद्दों को सुलझाने में अपनी बड़ी भूमिका निभाएगा.
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