जब सड़क बनाने से पहले ही 'रोड टैक्स' ले लेती है सरकार, तो क्यों वसूलती है टोल टैक्स?
भारत में गाड़ी खरीदते समय रोड टैक्स लिया जाता है, जबकि नेशनल हाईवे पर चलने के लिए अलग से टोल टैक्स वसूला जाता है. रोड टैक्स से सड़क सेवाओं का खर्च उठता है, टोल टैक्स निर्माण और रखरखाव बताया जाता है.

भारत में नई गाड़ी खरीदने समय हर ग्राहक को रोड टैक्स देना पड़ता है. यह टैक्स वहां की कीमत में शामिल होकर उसके ऑन रोड प्राइस को लगभग 10% तक बढ़ा देता है. सरकार का तर्क है कि यह टैक्स देश के विशाल सड़क नेटवर्क के रख रखा और सुरक्षा सेवाओं पर खर्च किया जाता है. लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि जब गाड़ी खरीदते समय सरकार रोड टैक्स ले ही लेती है तो फिर नेशनल हाईवे पर अलग से टोल टैक्स क्यों वसूला जाता है.
रोड टैक्स का असली मकसद
रोड टैक्स को लेकर सरकार का कहना है कि इसका इस्तेमाल सड़क लाइट, सिग्नल, सुरक्षा सेवाओं और फर्स्ट एड सुविधाओं पर होता है. साथ ही इस पैसे से नए हाईवे और एक्सप्रेसवे का भी विस्तार किया जाता है. मोटर व्हीकल टैक्सेशन एक्ट 1988 की धारा 39 के तहत यह टैक्स अनिवार्य है और इससे वाहन मालिक को गाड़ी लेने के समय एकमुश्त चुकाना होता है.
फिर टोल टैक्स क्यों?
यहीं पर आम जनता के मन में सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है. अगर सरकार पहले से ही रोड टैक्स के जरिए पैसा ले रही है तो फिर यात्रियों से नेशनल हाईवे पर चलने के लिए अलग से टोल टैक्स क्यों लिया जाता है. सड़क परिवहन मंत्रालय का तर्क है कि टोल दरअसल हाईवे निर्माण की लागत और उस पर खर्च होने वाले रखरखाव को निकालने के लिए लिया जाता है. कई प्रोजेक्ट्स लोन लेकर पूरे किए जाते हैं और उन पर ब्याज भुगतान के लिए भी लंबे समय तक टोल की वसूली जारी रहती है.
कोर्ट तक पहुंचीं शिकायतें
कई बार ऐसा देखा गया है कि सड़क पूरी बने बिना ही टोल वसूली शुरू हो जाती है. सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया से यही सवाल पूछा कि जब सड़कें अधूरी है तो टोल क्यों वसूला जाता है. अदालत ने कहा कि यह जनता के भरोसे से खिलवाड़ है. केरल हाईकोर्ट ने भी एक मामले में चार हफ्तों के लिए टोल वसूली पर रोक लगा दी थी.
सरकार की नई तैयारी
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने हाल ही में एक बड़ा प्रस्ताव रखा था इसके तहत अगर दो लेने वाली सड़क को चार लेन में बदला जा रहा है तो निर्माण के दौरान टोल आधा कर दिया जाए. अभी तक ऐसी सड़कों पर टोल सामान्य दर का 60% होता है लेकिन मंत्रालय इसे घटाकर 30% करने की योजना पर काम कर रहा है.
जनता को कितनी राहत?
लोगों की शिकायतों को देखते हुए सरकार पहले ही कई कदम उठा चुकी है. 3000 का सालाना टोल पास से निजी गाड़ियां 200 टोल प्लाजा पार कर सकती हैं. इसके अलावा पुलों, सुरंगों और फ्लाईओवर पर भारी वाहनों के लिए टोल में 50% तक की कटौती की गई है. इसके बाद बावजूद सवाल यही है, जब हर गाड़ी पर रोड टैक्स पहले से वसूला जाता है तो फिर टोल टैक्स का बोझ अलग से क्यों यही मुद्दा आज देश भर में बहस का विषय बना हुआ है.
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Source: IOCL





















