क्या टमाटर से पैदा हुए थे आलू? वैज्ञानिकों ने खोल दिया 90 लाख साल पुराना राज
वैज्ञानिकों ने खुलासा किया है कि आलू की जड़ें टमाटर और एक जंगली पौधे Etuberosum से जुड़ी हैं. करीब 90 लाख साल पहले इनके संकरण से आलू बना. इसमें टमाटर से SP6A और Etuberosum से IT1 जीन मिला.

हम सब आलू और टमाटर को अक्सर साथ खाते हैं. कभी सब्जी में, कभी चाट में तो कभी पराठे और सॉस के रूप में. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आलू का रिश्ता टमाटर से इतना गहरा है कि वह असल में उसी से पैदा हुआ हो. जी हां ताजा साइंटिफिक रिसर्च ने 90 लाख साल पुराना राज खोल दिया है.
90 लाख साल पहले बना था नया पौधा
नई स्टडी के अनुसार करीब 90 लाख साल पहले दक्षिण अमेरिका में टमाटर और आलू जैसे एक जंगली पौधे Etuberosum के बीच प्राकृतिक संकरण हुआ. इस जेनेटिक्स मिक्स से ऐसा नया पौधा बना जिसकी जड़ों में खाने का भंडार जमा होने लगा. यही शुरुआत थी उस फसल की जिसे आज पूरी दुनिया आलू के नाम से जानती है.
कौन सा जीन बना आलू की ताकत
वैज्ञानिकों ने इस रिसर्च में पाया कि आलू बनने में दो खास जीन सबसे अहम रहे.
- SP6A (टमाटर से आया) यह जीन पौधे को बताता है कि जमीन के नीचे कब और कैसे ट्यूबर यानी आलू का कंद बने.
- IT1 (Etuberosum) यह जीन ट्यूबर की ग्रोथ को नियंत्रित करता है.
यानी आलू को बनाने में टमाटर और Etuberosum दोनों की बराबर की भूमिका रही. एक ने शुरुआत करवाई और दूसरे ने उसे आकर दिया.
रिसर्च कैसे हुई
यह रिसर्च मशहूर साइंस जर्नल सेल में छपी है. वैज्ञानिकों ने इसमें 450 से ज्यादा खेती में उगने वाले आलुओं और 56 जंगली प्रजातियों के जीनोम की जांच की. हर आलू में टमाटर और Etuberosum दोनों का डीएनए मिला, जिससे साफ हो गया कि आलू वास्तव में दोनों का संकर वंशज है.
एंडीज की कठिन जलवायु में भी टिक गया आलू
इतिहास की इस प्राकृतिक और जेनेटिकता ने आलू को ऐसी शक्ति दी कि वह बीज या फूल पर निर्भर हुए बिना भी पनप सके. आलू का ट्यूबर खुद अंकुरित होकर नया पौधा बना देता था. यही वजह रही कि एंडीज पर्वतों की कठिन जलवायु में भी यह पौधा बचा रहा और धीरे-धीरे पूरी दुनिया की भरोसेमंद फसल बन गया.
आलू सिर्फ सब्जी नहीं इंसान का सहारा
आज आलू को हम सब खाने का हिस्सा मानते हैं लेकिन असल में यह इंसानों की सबसे जरूरी फसलों में से एक है. इसमें कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व है. यह पर्यावरण के लिए भी बेहतर है, कम पानी मांगता है, ज्यादा जमीन नहीं घेरता और ग्रीनहाउस गैसें भी उत्सर्जित करता है.
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Source: IOCL






















