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हर चार साल में ही क्यों होता है लीप ईयर, अगर 29 की फरवरी न हो तो क्या होगा?

Why Leap Year Comes In Four Years: हर चार साल में एक बार लीप ईयर आता है. लेकिन ऐसा क्यों होता है और अगर ऐसा न हो तो इसका असर कब और क्यों पड़ेगा.

एक साल में कितने दिन होते हैं, ये बताना तो सभी के लिए आसान है. इसका जवाब बहुत आसान है 365 दिन, लेकिन पिछले साल ये दिन 266 थे. क्योंकि पिछले साल फरवरी में 29 दिन थे. लीप ईयर हर चार साल में एक बार आता है. हर चार साल में हमारे कैलेंडर में एक दिन ज्यादा क्यों और कैसे जुड़ जाता है. अगर ऐसा न हो तो दुनिया में क्या होगा. चलिए इस बारे में थोड़ा जानते हैं. 

कैसे बनता है लीप ईयर

लीप ईयर होने का एक वैज्ञानिक कारण है. यह धरती के घूमने को एक इंसानी कैलेंडर के साथ जोड़े रखता है. यह एक्स्ट्रा दिन, मौसमों, छुट्टियों और कृषि की गतिविधियों के बीच के तालमेल को सुनिश्चित करता है. लीप ईयर हर साल नहीं आता, बल्कि हर चार साल में पड़ता है. इसका कारण है कि धरती को सूरज के चक्कर काटने में 365 दिन और छह घंटे लगते हैं. ये छह घंटे चार साल तक जमा होते हैं और इसे 24 घंटे बना देते हैं, और इसीलिए एक दिन एक्स्ट्रा हो जाता है. 

अगर लीप ईयर न हो तो क्या होगा

एक तरीके से देखा जाए तो लीप ईयर एक सुधार वर्ष की तरह होता है, जो कि हमारे कैलेंडर के दिनों को धरती को गलत तरीके से घुमाने से रोकता है. अगर लीप ईयर न हो तो धरती पर चीजें अव्यवस्थित हो सकती हैं. अगर लीप ईयर न हो तो मौसम की समयसीमा पर इसका असर पड़ेगा. यह सिर्फ कैलेंडर में एक दिन जोड़ने भर से नहीं है, बल्कि दुनिया की अलग-अलग जगहों पर इसका महत्व भी होता है. आयरलैंड में तो महिलाएं इस खास दिन पर अपने पार्टनर को प्रपोज करती हैं.

लीप ईयर का इतिहास

कई जगहों पर इस दिन को लीप ईयर और प्रपोजल ईयर भी कहते हैं. चीन में कई जगहों पर तो इस खास दिन पर बच्चे अपने माता-पिता को खास तोहफा देते हैं. कई लोगों के पास शादियों के लिए भी यह खास दिन होता है. लीप ईयर का इतिहास प्राचीन समय से जुड़ा हुआ है. उस वक्त के कैलेंडर में कई गड़बड़ियां थीं. तब पोप ग्रेगरी XIII ने लीप ईयर को शामिल करते हुए ग्रेरोरियन कैलेंडर बनाया था, जो कि बहुत प्रभावी रहा.

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