होर्मुज छोड़िए, अगर ये जलधारा बंद हुई तो बर्बाद हो जाएगा यूरोप, जानिए क्यों खौफ खा रहा वेस्ट
समुद्र की गल्फ स्ट्रीम कमजोर होती जा रही है, और इसका मुख्य कारण क्लाइमेट चेंज और ग्लोबल वॉर्मिंग है. अगर ऐसा हुआ तो यूरोप पर भयानक संकट आ सकता है और वहां कड़ाके की सर्दी और सूखे की प्रबल संभावना हो सकती है.

जब भी कभी समुद्र के जरूरी रास्तों की बात होती है तो हमारा ध्यान सबसे पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और स्वेज नहर जैसे समुद्री रास्तों पर जाता है. इस रास्तों पर अगर कोई भी भू-राजनैतिक तनाव हो या किसी भी तरह का सैन्य टकराव हो तो जहाजों की रफ्तार पर लगाम लग जाती है और कई देशों की अर्थव्यवस्था हिल जाती है. लेकिन इस वक्त पश्चिमी देश और वैज्ञानिक एक ऐसे खतरे को लेकर खौफ में हैं जो कि प्रकृतिक असंतुलन से जुड़ा है. यह खतरा है समुद्र की एक और जरूरी जलधारा गल्फ स्ट्रीम का कमजोर होना, अगर यह थम गई तो यूरोप में भयानक तबाही मच सकती है, इसीलिए पूरे वेस्ट खौफ में है.
कंवैयर बेल्ट की तरह काम
गल्फ स्ट्रीम असल में समुद्र में बहने वाली नदी की तरह है जो कि बहुत बड़े सिस्टम का हिस्सा है. वैज्ञानिक भाषा में इसे अटलांटिक मेरिडियोनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन यानि AMOC कहते हैं. यह पूरा सिस्टम समुद्र के अंदर एक कंवैयल बेल्ट की तरह काम करता है. इसमें भूमध्य रेखा की तरफ से गर्म पानी समुद्र की सतह से होता हुआ उत्तर दिशा की ओर बहता है. जब यह पानी उत्तर के ठंडे इलाकों में पहुंचता है तो वहां की ठंडी हवाओं के संपर्क में आकर नीचे बैठ जाता है. नीचे बैठने के बाद यह गहरा ठंडा पानी वापस दक्षिण की ओर लौट आता है. इसी तरह से समुद्र के अंदर पानी का एक पूरा चक्र चलता है, जो कि दुनिया के तापमान को नियंत्रित करता है.
कैसे काम करता है गल्फ स्ट्रीम का सिस्टम?
इस पूरे समुद्री चक्र को लगातार चालू रखने कि लिए उत्तर के इलाकों में पानी का ठंडा होना बेहद जरूरी है. इसमें बैरेंट्स सी एक तरह से कूलिंग मशीन का काम करता है, जो गर्म पानी को ठंडा करके नीचे की ओर भेजता है. इसीलिए गर्म पानी लगातार उत्तर की तरफ खिंचा चला जाता है और यूरोप का मौसम सर्दियों में ज्यादा ठंडा नहीं हो पाता है. गल्फ स्ट्रीम की वजह से ही ब्रिटेन, नॉर्वे औ पश्चिमी यूरोप के देशों का मौसम ऐसा रहता है, जिससे वहां इंसान रह सकते हैं और खेती कर सकते हैं. अगर यह गर्म पानी उत्तर की ओर जाना बंद कर दे तो पश्चिमी देशों का मौसम पूरी तरह से बदल जाएगा और वहां भयानक ठंड होगी.
क्लाइमेट चेंज की वजह से समुद्र में क्या परिवर्तन हो रहा है?
ग्लोबल वॉर्मिंग और क्लाइमेट चेंज की वजह से समुद्र का पूरा संतुलन बिगड़ जाता है. प्रदूषण और बढ़ती गर्मी की वजह से उत्तर के समुद्री इलाकों का तापमान बढ़ रहा है, जिससे वहां का पानी अब उतना ठंडा नहीं हो पा रहा है, जितना कि पहले हुआ करता था. साथ ही ग्लेशियरों के पिघलने और भारी बारिश की वजह से यहां पर मीठे पानी की मात्रा तेजी से बढ़ रही है. विज्ञान के अनुसार मीठा पानी खारे पानी की तुलना में हल्का होता है. इसी घनत्व की वजह से पानी भारी होकर नीचे नहीं बैठ पा रहा है. जब पानी नीचे नहीं बैठेगा तो दक्षिण से उत्तर की ओर आने वाला पानी का लूप धीमा पड़ जाएगा और गल्फ स्ट्रीम के बंद होने का खतरा है.
व्यापारिक मार्ग पर क्या होगा असर?
अगर गल्फ स्ट्रीम का सिस्टम पूरी तरह से बंद हो गया या टूट गया तो इसके नतीजे यूरोप के लिए कयामत से कम नहीं होंगे. इससे समुद्र में जहाजों का चलना कम हो जाएगा, लेकिन मौसम में आने वाला भयानक बदलाव यूरोपीय देशों और उसकी अर्थव्यवस्था को अंदर से खोखला कर देगा. ऐसे में उत्तर-पश्चिम यूरोप में सर्दियों का तापमान 2 से 10 डिग्री तक गिर सकता है, जिससे वहां बिजली और एनर्जी ग्रिड पूरी तरह से ठप हो जाएगा. बारिश का सिस्टम ठप होने से दक्षिणी यूरोप में ऐसा सूखा पड़ेगा कि खेती-किसानी तबाह हो जाएगी. जब अंदरूनी व्यवस्था फेल होगी तो फैक्ट्रियां बंद होगी, जिससे कच्चा माल नहीं मिल पाएगा और व्यापार तो फिर अपने आप ही ठप पड़ जाएगा.
आर्कटिक की बर्फ कैसे बनेगी संकटमोचन?
इस भीषण संकट के बीच वैज्ञानिकों की एक और खोज ने थोड़ा राहत दी है. रिपोर्ट की मानें तो वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर मॉडल के जरिए एक सिमुलेशन तैयार किया है, जिसके अनुसार आर्कटिक महासागर में तेजी से पिघटती बर्फ गल्फ स्ट्रीम को डूबने से बचा सकती है. रिसर्च की मानें तो आर्कटिक की बर्फ कम होने से समुद्र के कुछ नए इलाके खुल रहे हैं, जहां हवा के संपर्क में आकर पानी तेजी से ठंडा हो सकता है. यानि जो काम पहले नॉर्वेजियन सी करता है, अब यही काम आर्कटिक के नए खुले इलाके कर सकते हैं, जिससे गल्फ स्ट्रीम को सहारा मिल जाएगा.
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