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तो इसलिए कार में बैठते ही आने लगती है नींद... जानिए क्या ये आपकी सेहत के लिए ठीक है

विज्ञान की भाषा में इस पूरे प्रोसेस को रॉकिंग सेंसेशन कहते हैं. रॉकिंग सेंसेशन का मतलब कि आप एक फ्लो में जब हिलते रहते हैं तो आपको नींद आने लगती है.

आप में से कई लोगों ने नोटिस किया होगा कि जब भी हम कार से या फिर बस से लंबी दूरी के लिए ट्रैवल करते हैं तो अक्सर हमें गाड़ी में बैठने के कुछ देर बाद ही नींद आने लगती है. हालांकि, ट्रैवल करने के बाद नींद आए तो समझ में आता है कि ट्रैवल के दौरान आप इतने ज्यादा थक गए हैं, इसलिए आपको नींद आ रही है. लेकिन यहां उल्टा होता है, जैसे ही आप कार में बैठते हैं कुछ दूर चलने के बाद अपने आप आपकी आंखें बंद होने लगती हैं और आप सो जाते हैं. क्या आप इसका कारण जानते हैं. कहीं यह किसी बीमारी की वजह से तो नहीं है. तो चलिए जानते हैं आखिर असलियत में इसकी वजह क्या है और विज्ञान इसके पीछे क्या लॉजिक देता है.

क्या कहता है इस पर विज्ञान

ट्रैवल के दौरान आने वाली नींद को लेकर कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा हाईवे हीप्रोरिस की वजह से होता है. दरअसल, इसे आसान भाषा में ऐसे समझिए कि जब कभी आप कहीं के लिए ट्रेवल कर रहे होते हैं तो गाड़ी में बैठने से पहले आपके दिमाग में तमाम तरह की चीजें चल रही होती हैं. जैसे कि कोई चीज छूट न जाए, घर के अंदर सभी लाइट के स्विच बंद है या नहीं, खिड़की दरवाजे अच्छे से बंद किए हैं या नहीं, गैस चूल्हा बंद है या नहीं इस तरह की कई चीजें आपके दिमाग में चल रही होती हैं... जो आपको मानसिक रूप से थका देती हैं. लेकिन जैसे ही आप कार के अंदर बैठते हैं और कार चलना शुरू हो जाती है तो आप इन सभी चिंताओं से मुक्त हो जाते हैं, जिसके बाद आपका दिमाग शांत हो जाता है और आपको नींद आने लगती है.

ड्राइवर को क्यों नहीं आती नींद

अब सवाल उठता है कि अगर ऐसा ही है तब तो फिर ड्राइवर को भी नींद आनी चाहिए. या फिर गाड़ी में बैठे कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें गाड़ी के चलने के बाद नींद नहीं आती. क्या यह मान लिया जाए कि उन्हें घर की चिंता नहीं होती या कार चलने से पहले उनके दिमाग में कोई टेंशन नहीं होता. ऐसा बिल्कुल नहीं है. दरअसल, हमें नींद तभी आती है जब हमारा दिमाग एकदम शांत हो जाता है.

ड्राइवर गाड़ी चला रहा होता है इसलिए उसका दिमाग और आंखें सामने रोड पर होती हैं और उसका पूरा ध्यान गाड़ी चलाने पर होता है, जिसकी वजह से उसे नींद नहीं आती. इसी तरह आपने गाड़ी में जिन लोगों को जागते हुए देखा होगा, अगर ध्यान से नोटिस करें तो वह कुछ ना कुछ कर रहे होते हैं. चाहे वह कुछ पढ़ रहे होते हैं, गाड़ी चलाने वाले व्यक्ति से बातचीत कर रहे होते हैं या अपने फोन पर कुछ देख रहे होते हैं. इन सब चीजों की वजह से उनका दिमाग शांत नहीं रहता, इसलिए उन्हें नींद नहीं आती.

गाड़ी के हिलने की वजह से भी आती है नींद

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि गाड़ी में बैठने के बाद हमें नींद इस वजह से भी आती है क्योंकि वह लगातार हिल रही होती है. दरअसल, आपको याद होगा कि जब आप छोटे बच्चे रहे होंगे तो आपको गोदी में सुलाते समय आपके प्रिय जन आपकी पीठ पर थपकी देने के साथ-साथ आपको हिलाते भी रहते हैं. आज भी हम बच्चों को सुलाने के लिए इसी प्रक्रिया का पालन करते हैं और यह बहुत सही काम भी करता है.

पालने में भी जब बच्चों को रखकर हिलाया जाता है तो थोड़ी देर बाद वह सो जाते हैं. विज्ञान की भाषा में इस पूरे प्रोसेस को रॉकिंग सेंसेशन कहते हैं. रॉकिंग सेंसेशन का मतलब कि आप एक फ्लो में जब हिलते रहते हैं तो आपको नींद आने लगती है. यही वजह है कि जब कार एक मोमेंटम में चलती रहती है तो आप वहां बैठे बैठे सो जाते हैं.

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