रात में ही क्यों निकलते हैं कॉकरोच, दिन में कहां छिप जाते हैं?
कॉकरोच स्वभाव से रात्रिचर जीव होते हैं जो रोशनी से बचते हुए रात के समय भोजन और प्रजनन के लिए बाहर निकलते हैं. जबकि दिन के उजाले में दरारों और कबाड़ जैसी अंधेरी जगहों पर छिपे रहते हैं.

जब भी घर की बत्तियां बुझती हैं और सन्नाटा पसरता है, तो रसोईघरों के अंधेरे कोनों से कॉकरोचों की फौज बाहर निकल आती है. हमारे घरों में घूम रहे ये छोटे कीट अपनी अजीब हरकतों और आदतों के लिए जाने जाते हैं. दिन के उजाले में ये कहीं नजर नहीं आते, लेकिन रात होते ही इनका साम्राज्य शुरू हो जाता है. इनके इस रहस्यमयी व्यवहार के पीछे एक खास जीवनशैली और वैज्ञानिक कारण छिपे होते हैं, जिन्हें समझकर ही इनसे छुटकारा पाया जा सकता है.
रात में सक्रिय होने वाले रात्रिचर जीव
विज्ञान की भाषा में कॉकरोच को 'नॉक्टर्नल' यानी रात्रिचर जीव माना जाता है. इनकी आंतरिक जैविक घड़ी इसी तरह से ढली होती है कि ये सूरज की रोशनी से दूर रहें. दिन के समय ये अपनी ऊर्जा बचाकर सुरक्षित कोनों में रहते हैं और जैसे ही रात होती है, इनकी गतिविधियां तेज हो जाती हैं. अंधेरे का फायदा उठाकर ये बिना किसी डर के अपने छिपने के ठिकानों से बाहर निकलते हैं और अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करते हैं.
रोशनी से डर और विशेष संवेदनशीलता
कॉकरोचों के शरीर में प्रकाश और कंपन को भांपने वाले बेहद संवेदनशील अंग होते हैं. इन्हें तेज रोशनी से सख्त नफरत होती है क्योंकि रोशनी इनके लिए किसी खतरे की घंटी जैसी होती है. जैसे ही अचानक किचन की लाइट जलाई जाती है, इनके सेंसर्स तुरंत हरकत में आ जाते हैं और ये खतरे को भांपते हुए पलक झपकते ही किसी नजदीकी दरार या ओट में गायब हो जाते हैं.
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भोजन की तलाश और खाने की महक
रात के सन्नाटे में कॉकरोच मुख्य रूप से भोजन की तलाश के लिए बाहर आते हैं. रसोई में खुला छोड़ा गया खाना, जूठे बर्तन, सिंक में जमा गंदगी और कचरे के डिब्बों से उठने वाली महक इन्हें अपनी ओर खींचती है. चूंकि रात के वक्त इंसानों की आवाजाही बंद हो जाती है, इसलिए इन्हें बिना किसी बाधा के खाने-पीने की चीजें आसानी से मिल जाती हैं, जो इनके जिंदा रहने के लिए जरूरी है.
अंधेरे और शांत माहौल में तेजी से प्रजनन
केवल खाना ही नहीं, बल्कि रात का शांत और अंधेरा माहौल कॉकरोचों के लिए अपनी आबादी बढ़ाने का सबसे सही समय होता है. इस दौरान वे सुरक्षित तरीके से प्रजनन करते हैं और तेजी से अपनी संख्या में इजाफा करते हैं. अगर आपको लगातार रातों में कॉकरोच दिखने लगे हैं, तो इसका साफ मतलब है कि घर के भीतर इनकी संख्या खतरनाक स्तर तक बढ़ चुकी है.
दिनभर कहां गायब रहते हैं कॉकरोच?
सूरज निकलते ही कॉकरोच ऐसी जगहों पर शरण लेते हैं जो इंसानी नजरों से दूर, गर्म, संकरी और नमी से भरपूर हों. उनके ये गुप्त ठिकाने घर के भीतर ही मौजूद होते हैं, जहां तक आसानी से पहुंचना मुश्किल होता है और वे दिनभर बिना किसी खलल के आराम करते हैं. कॉकरोचों को नमी वाली जगहें बहुत पसंद होती हैं. किचन के सिंक के नीचे का हिस्सा इनके लिए एकदम मुफीद जगह है क्योंकि वहां पानी के पाइपों की वजह से हल्की नमी, गर्माहट और पूरा अंधेरा एक साथ मिल जाता है, जो उनके छिपने के लिए आदर्श स्थिति बनाता है.
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के पीछे की गर्माहट
फ्रिज, ओवन और माइक्रोवेव जैसे घरेलू इलेक्ट्रॉनिक सामानों के पीछे का हिस्सा कॉकरोचों का पसंदीदा अड्डा होता है. इन मशीनों के मोटर से लगातार हल्की गर्माहट निकलती रहती है, जो इनके छिपने और पलने-बढ़ने के लिए बेहतरीन तापमान मुहैया कराती है. लकड़ी के पुराने फर्नीचर, दीवारों के छोटे गैप, फर्श की जोड़ियों और टाइल्स के बीच की संकरी दरारों में ये आसानी से दुबक जाते हैं. इन तंग जगहों पर इंसानी हाथ या स्प्रे आसानी से नहीं पहुंच पाता, इसलिए वे वहां पूरी तरह सुरक्षित महसूस करते हैं.
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