Nuclear Power: कंगाल होने के बाद भी पाकिस्तान के पास क्यों भारत से ज्यादा रहा परमाणु जखीरा, जानिए कहां से करता है इंतजाम?
Nuclear Power: एक वक्त ऐसा था जब पाकिस्तान के पास भारत से ज्यादा परमाणु हथियार थे. आइए जानते हैं कि इतनी गरीबी होने के बावजूद भी पाकिस्तान के पास भारत से ज्यादा परमाणु हथियार क्यों रहे.

- पाकिस्तान की
- अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम से शस्त्रों का तीव्र निर्माण।
- आर्थिक चुनौतियों के बावजूद सैन्य प्राथमिकता, चीन का सहयोग।
- डॉ. ए क्यू खान ने परमाणु प्रसार नेटवर्क बनाया।
Nuclear Power: दशकों से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बार-बार संकटों का सामना करना पड़ा है. इसमें बढ़ते कर्ज, हाई इन्फ्लेशन और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता पर निर्भरता शामिल हैं. इसके बावजूद भी इस दौरान पाकिस्तान ने अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम में भारी निवेश करना जारी रखा. इसकी वजह पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति, सैन्य प्राथमिकता और दीर्घकालिक रक्षा सिद्धांत है. हालांकि स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के मुताबिक भारत अब अपने परमाणु शस्त्रागार के आकार में पाकिस्तान से आगे निकल गया है. इसी बीच आइए जानते हैं कि आखिर पाकिस्तान के पास भारत से ज्यादा परमाणु हथियार क्यों रहे हैं.
पाकिस्तान की परमाणु रणनीति
पाकिस्तान द्वारा बड़ी संख्या में परमाणु हथियार जमा करने की सबसे बड़ी वजह दोनों देशों के बीच सैन्य सिद्धांत में अंतर था. भारत नो-फर्स्ट-यूज नीति का पालन करता है. इसके तहत भारत यह कहता है कि वह किसी संघर्ष में परमाणु हथियार का इस्तेमाल करने वाला पहला देश नहीं होगा. भारत की परमाणु रणनीति न्यूनतम विश्वसनीय निरोध बनाए रखने पर आधारित है. इसका मतलब है कि वह किसी हमले को रोकने के लिए सिर्फ पर्याप्त परमाणु क्षमता चाहता है.
दूसरी तरफ पाकिस्तान ने कभी भी पहले इस्तेमाल न करने की नीति नहीं अपनाई है. इसके बजाय वह पहले इस्तेमाल सिद्धांत का पालन करता है. यह बड़े पैमाने पर पारंपरिक सैन्य हमले के खिलाफ भी परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की अनुमति देता है. क्योंकि भारत की पारंपरिक सशस्त्र सेना काफी बड़ी है इस वजह से पाकिस्तान ने पूर्ण स्पेक्ट्रम निरोध नाम की एक रणनीतिक विकसित की है. इसमें रणनीतिक और कम दूरी के सामरिक परमाणु हथियार दोनों शामिल हैं.
काफी ज्यादा समृद्ध यूरेनियम की संख्या
पाकिस्तान का परमाणु हथियार कार्यक्रम शुरू में प्लूटोनियम के बजाय काफी ज्यादा समृद्ध यूरेनियम पर निर्भर था. गैस सेंट्रीफ्यूज एनरिचमेंट के जरिए यूरेनियम आधारित हथियारों का उत्पादन करने से पाकिस्तान को तेजी से और कम लागत पर परमाणु हथियार बनाने की अनुमति मिली. वहीं भारत प्लूटोनियम आधारित हथियारों पर ज्यादा निर्भर रहा है. इनका उत्पादन आमतौर पर तकनीकी रूप से काफी ज्यादा मुश्किल होता है.
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आर्थिक चुनौती के बावजूद सैन्य प्राथमिकता
पाकिस्तान ने पिछले कई दशकों में कई आर्थिक संकटों का अनुभव किया है. इसके बावजूद भी रक्षा खर्च खास तौर से परमाणु कार्यक्रम पर सबसे ज्यादा प्राथमिकता बनी हुई है. कहा जाता है कि पाकिस्तान की सेना ने ऐतिहासिक रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा और बजट फैसलों पर काफी ज्यादा प्रभाव डाला है. यही वजह है कि रणनीतिक रक्षा परियोजना अक्सर गंभीर वित्तीय तनाव के दौरान भी जारी रहती है.
इसी के साथ चीन ने भी पाकिस्तान की परमाणु और मिसाइल क्षमता के विकास में बड़ी भूमिका निभाई है. कई सालों में चीन द्वारा यूरेनियम संवर्धन, परमाणु डिजाइन ज्ञान और मिसाइल प्रौद्योगिकी से संबंधित सहायता के साथ अलग-अलग तरह की तकनीकी सहायता प्रदान करने की व्यापक रूप से सूचना मिली है.
ग्लोबल प्रोक्योरमेंट नेटवर्क
परमाणु वैज्ञानिक डॉ अब्दुल कादिर खान के काम से पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम का काफी ज्यादा विस्तार हुआ है. 1970 के दशक के दौरान खान ने यूरोपीय यूरेनियम संवर्धन कंसोर्टियम यूरेंको से जुड़ी गैस सेंट्रीफ्यूज तकनीक को हासिल किया. पाकिस्तान ने बाद में अपनी यूरेनियम संवर्धन क्षमता स्थापित करने के लिए सेंट्रीफ्यूज तकनीक का इस्तेमाल किया. कई सालों बाद जांच से यह पता चला कि खान ने एक अंतरराष्ट्रीय प्रसार नेटवर्क संचालित किया था जो उत्तर कोरिया, लीबिया और ईरान के साथ-साथ देशों को परमाणु प्रौद्योगिकी और उपकरण दे रहा था. नेटवर्क के सार्वजनिक हो जाने के बाद पाकिस्तान ने खान को घर में नजरबंद कर दिया.
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