पानीपत में ही क्यों हुईं भारत की तीन सबसे बड़ी लड़ाइयां, किसी और जगह को क्यों नहीं चुनते थे राजा?
आखिर राजा-महाराजा किसी और जगह युद्ध करने के बजाय पानीपत को ही क्यों चुनते थे. यह सवाल हर इतिहास प्रेमी के मन में जरूर आता है. पानीपत की धरती ने न सिर्फ मुगल साम्राज्य की नींव रखी.

भारत का इतिहास वीरता, युद्ध और सत्ता संघर्षों से भरा पड़ा है. जब भी भारत के इतिहास में किसी बड़े युद्ध की बात होती है तो पानीपत का नाम अपने आप सामने आ जाता है. दिल्ली से लगभग 85 किलोमीटर दूर हरियाणा में बसा यह शहर सिर्फ एक आम नगर नहीं, बल्कि भारत के राजनीतिक और सैन्य इतिहास का सबसे अहम गवाह रहा है.
दिल्ली भले ही हमेशा सत्ता का केंद्र रही हो, लेकिन उसकी किस्मत तय करने वाली लड़ाइयां बार-बार पानीपत की धरती पर ही लड़ी गईं. ऐसा क्यों हुआ कि तीन-तीन बार भारत का भविष्य इसी एक स्थान पर तय हुआ. आखिर राजा-महाराजा किसी और जगह युद्ध करने के बजाय पानीपत को ही क्यों चुनते थे. यह सवाल हर इतिहास प्रेमी के मन में जरूर आता है. पानीपत की धरती ने न सिर्फ मुगल साम्राज्य की नींव रखी, बल्कि मराठों के पतन और अंग्रेजों के भारत में मजबूत होने का रास्ता भी यहीं से खुला. तो आइए जानते हैं कि पानीपत में ही क्यों भारत की तीन सबसे बड़ी लड़ाइयां हुईं, साथ ही राजा किसी और जगह को क्यों नहीं चुनते थे.
पानीपत एक प्राचीन और ऐतिहासिक नगर
पानीपत कोई नया शहर नहीं है. इसका इतिहास हजारों साल पुराना है. महाभारत काल में भी इस स्थान का उल्लेख मिलता है. मान्यता है कि पांडवों ने जिन पांच नगरों की स्थापना की थी, उनमें से एक पानीपत भी था. उस समय इसे पांडवप्रस्थ कहा जाता था यानी यह शहर सिर्फ मध्यकालीन ही नहीं, बल्कि पौराणिक काल से ही जरूरी रहा है. समय के साथ-साथ यह स्थान राजनीतिक और सैन्य दृष्टि से बेहद अहम बन गया.
पानीपत में ही क्यों भारत की तीन सबसे बड़ी लड़ाइयां हुईं?
प्राचीन समय में दिल्ली पर हमला करने वाले ज्यादातर आक्रमणकारी उत्तर-पश्चिम दिशा, यानी पंजाब और मध्य एशिया से आते थे, दिल्ली पहुंचने से पहले उन्हें पानीपत से गुजरना ही पड़ता था. जैसे ही दिल्ली के राजा को आक्रमण की खबर मिलती थी, वह अपनी सेना लेकर पानीपत पहुंच जाता था और वहीं आक्रमणकारियों को रोकने की कोशिश करता था. इससे दिल्ली सीधे युद्ध की चपेट में नहीं आती थी. पानीपत के आसपास का क्षेत्र बिल्कुल समतल और खुला मैदान है. बड़ी सेनाओं की तैनाती, घुड़सवारों, हाथियों और तोपों के इस्तेमाल के लिए यह जगह बिल्कुल सही थी. युद्ध के लिए इससे बेहतर मैदान मिलना मुश्किल था. उस समय पानीपत के दोनों ओर नहरें थीं. एक ओर यमुना से जुड़ी नहर और दूसरी ओर दिल्ली पैरलल नहर, इससे दोनों सेनाओं को आसानी से पानी मिल जाता था. सैनिकों के ठहरने, खाने-पीने और पशुओं के लिए यह स्थान बहुत उपयुक्त था.
राजा किसी और जगह को क्यों नहीं चुनते थे?
इतिहासकारों के अनुसार, उस समय पानीपत पर कब्जा करना लगभग दिल्ली पर कब्जा करने जैसा ही था. जो भी शासक पानीपत की लड़ाई जीतता था, वही दिल्ली की गद्दी तक पहुंच जाता था. इसी वजह से मराठा, राजपूत, अफगान और मुगल सभी जानते थे कि पानीपत में जीत का मतलब पूरे भारत में अपनी ताकत का संदेश देना है. इसी कारण से राजा किसी और जगह को हीं चुनते थे.
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