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ताजमहल में रात में लाइट जलाने पर है पाबंदी, क्या ये सुरक्षा का मामला है या कुछ और? जानें पूरा इतिहास

ताजमहल दुनिया के सात अजूबों में शुमार है, लेकिन 1997 से यहां रात में लाइट जलाना प्रतिबंधित है. पत्थर खराब होने का खतरा और सुरक्षा कारणों से भी इसे अंधेरे में रखा जाता है. आइए इसकी वजह समझें.

दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताजमहल अपनी खूबसूरती और बेदाग सफेद संगमरमर के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. भारत के लगभग सभी ऐतिहासिक स्मारकों को रात में रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगाया जाता है, लेकिन ताजमहल रात के समय अंधेरे की चादर ओढ़े रहता है. यह कोई संयोग नहीं बल्कि एक बेहद सोच-समझकर लिया गया वैज्ञानिक और कानूनी फैसला है. आगरा की यमुना किनारे खड़ी यह इमारत रात में लाइटों से क्यों नहीं नहलाई जाती, इसके पीछे बेहद गंभीर कारण छिपे हैं.

सफेद संगमरमर कीड़ों का घातक आकर्षण

ताजमहल को रात में रोशनी न देने की सबसे मुख्य और वैज्ञानिक वजह इसका सफेद पत्थर है. सफेद संगमरमर रोशनी को बहुत तेजी से रिफ्लेक्ट करता है. अगर रात में ताज पर तेज लाइटें जलाई जाती हैं, तो आसपास के कीड़े-मकोड़े रोशनी की तरफ खिंचे चले आएंगे. यमुना नदी के किनारे होने की वजह से वहां गोल्डिचिली जैसे कीटों की भरमार रहती है. ये कीड़े ताजमहल की दीवारों पर बैठते हैं और वहां अपना एसिडिक कचरा (मल-मूत्र) छोड़ देते हैं. इससे सफेद पत्थर पर हरे और काले धब्बे पड़ जाते हैं, जो इसकी खूबसूरती को हमेशा के लिए खत्म कर सकते हैं.

1997 का वह ऐतिहासिक फैसला 

ऐसा नहीं है कि ताजमहल में कभी रात में रोशनी नहीं की गई. इतिहास गवाह है कि साल 1997 में प्रसिद्ध पियानो वादक यानी यन्नी के कॉन्सर्ट के दौरान ताजमहल को लाइटों से जगमगाया गया था. लेकिन उस रात जो हुआ उसने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की आंखें खोल दीं. अगली सुबह ताज की दीवारों पर लाखों कीड़े चिपके मिले और पत्थर पर दाग नजर आने लगे. इसके बाद विशेषज्ञों की सलाह पर एएसआई ने फैसला लिया कि भविष्य में ताज पर कभी कृत्रिम लाइटें नहीं लगाई जाएंगी. यह नियम आज भी पूरी सख्ती से लागू है.

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सुरक्षा का नजरिया और युद्ध का इतिहास

कीड़ों के अलावा, ताजमहल में लाइट न होने का एक बड़ा कारण सुरक्षा भी है. द्वितीय विश्व युद्ध और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान ताजमहल को दुश्मन के लड़ाकू विमानों की नजर से बचाने के लिए काले कपड़ों से ढका गया था. जानकारों का मानना है कि रात में तेज रोशनी ताज को मीलों दूर से एक स्पष्ट टारगेट बना सकती है. सामरिक दृष्टिकोण से भी ताज को अंधेरे में रखना बेहतर माना जाता है ताकि रात के समय हवाई हमले या किसी भी अवांछित गतिविधि की पहचान आसानी से न हो सके.

प्रदूषण और ताज की प्राकृतिक चमक

ताजमहल को अंधेरे में रखने का एक और पहलू लाइट पॉल्यूशन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है. ताजमहल को इस तरह से बनाया गया है कि वह चांदनी रात में प्राकृतिक रूप से चमकता है. कृत्रिम रोशनी न केवल पर्यावरण के चक्र को प्रभावित करती है, बल्कि पत्थर की प्राकृतिक आभा को भी फीका कर देती है. सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार, ताज ट्रेपेजियम जोन (TTZ) में प्रदूषण के स्तर को कम रखने के लिए हर संभव प्रयास किए जाते हैं, और रात में अंधेरा रखना भी इसी संरक्षण प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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