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Ayodhya Ram Mandir Controversy: मस्जिद के लिए वक्फ बोर्ड और मंदिर के लिए ट्रस्ट, जानें क्या है दोनों के संचालन तरीके में फर्क?

Ayodhya Ram Mandir Controversy: अयोध्या राम मंदिर में दान की चोरी को लेकर विवाद चल रहा है. इसी बीच आइए जानते हैं कि वक्फ बोर्ड पर मंदिर के ट्रस्ट में क्या फर्क होता है.

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  • राम मंदिर दान विवाद, धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन पर ध्यान।
  • वक्फ केंद्रीय कानून, मंदिर ट्रस्ट राज्य-नियमों से नियंत्रित।
  • वक्फ संपत्ति अल्लाह को, मंदिर देवता/ट्रस्ट के अधीन।

Ayodhya Ram Mandir Controversy: अयोध्या राम मंदिर दान की कथित चोरी को लेकर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक बैठक चल रही है. इसी बीच आपको बता दें कि भारत में धार्मिक संस्थानों का प्रबंधन अलग-अलग धर्म के हिसाब से काफी अलग-अलग होता है. हालांकि वक्फ बोर्ड और मंदिर ट्रस्ट दोनों ही धार्मिक संपत्तियों और धर्मार्थ संपत्तियों के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार होते हैं लेकिन उनका कानूनी ढांचा, प्रशासनिक संरचना, संपत्ति का मालिकाना हक और फैसले लेने की प्रक्रिया एक जैसी नहीं होती.

उनके काम-काज को अलग-अलग कानून कंट्रोल करते हैं 

सबसे बुनियादी अंतर कानूनी ढांचे में है. वक्फ बोर्ड वक्फ अधिनियम 1995 के तहत काम करते हैं. यह एक केंद्रीय कानून है और पूरे देश में वक्फ संपत्तियों को कंट्रोल करता है. वहीं दूसरी तरफ मंदिर ट्रस्ट राज्य विशिष्ट पब्लिक ट्रस्ट अधिनियम या फिर अलग-अलग मंदिरों और मंदिर बोर्ड के प्रबंधन के लिए बनाए गए खास कानून के तहत काम करते हैं. 

केंद्रीकृत और विकेंद्रीकृत प्रबंधन 

वक्फ प्रणाली एक केंद्रीकृत मॉडल को अपनाती है. हर राज्य में एक राज्य वक्फ बोर्ड होता है. यह बोर्ड अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली सभी पंजीकृत वक्फ संपत्तियों की देख-रेख करता है. इसके उलट हिंदू मंदिरों के लिए कोई भी एक राष्ट्रव्यापी शासी निकाय नहीं है. आमतौर पर हर मंदिर का प्रबंधन उसके अपने स्वतंत्र ट्रस्ट द्वारा ही किया जाता है. 

धार्मिक संपत्तियों पर हक 

मालिकाना हक की संरचना भी बिल्कुल अलग-अलग है. वक्फ संपत्ति हमेशा के लिए अल्लाह को समर्पित होती हैं और उन्हें बेचा नहीं जा सकता. संपत्ति हमेशा वक्फ के रूप में बनी रहती है. दूसरी तरफ मंदिर की संपत्तियां या तो मुख्य देवता के नाम पर होती है या फिर मंदिर का प्रबंधन करने वाले ट्रस्ट के नाम पर.

रोजमर्रा का प्रशासन 

मस्जिदों और दूसरे वक्फ संस्थाओं के रोजमर्रा के प्रबंधन का काम मुतव्वली संभालता है. इस बोर्ड नियुक्त या फिर मान्यता देता है. यह डिड के मुताबिक संपत्ति की सुरक्षा और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार होता है लेकिन उसका मालिक नहीं होता. 

इसी के साथ मंदिर का प्रशासन आमतौर पर ट्रस्टियों, पुजारियों या फिर कुछ बड़े मंदिरों में प्रमुख कार्यकारी अधिकारी द्वारा चलाया जाता है. प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ वे मंदिर की परंपराओं के मुताबिक धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा पाठ की देख-रेख भी करते हैं.

यह भी पढ़ेंः NGO से कितना अलग होता है ट्रस्ट का कामकाज, 'राम मंदिर चंदा चोरी' विवाद के लिए जान लीजिए जवाब?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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