वर्ल्ड वॉर 3 हुआ तो किन देशों में सबसे पहले होगा सर्वनाश? खुद चेक कर लें पूरी लिस्ट
इजरायल और ईरान की जंग के बीच तीसरे विश्व युद्ध की स्थिति पैदा हो गई है. अगर वाकई तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत हो जाए, तो क्या आप जानते हैं कि वो कौन से देश हैं, जो कि सबसे पहले तबाह होंगे. चलिए जानें.

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी भीषण संघर्ष ने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है. ईरान द्वारा तेल सप्लाई रोकने की कसम और होर्मुज की घेराबंदी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में हाहाकार मचा दिया है, लेकिन डराने वाली बात यह नहीं है कि तेल महंगा होगा, बल्कि यह है कि अगर यह तनाव पूर्ण युद्ध में बदला, तो दुनिया के कुछ नक्शे हमेशा के लिए मिट जाएंगे. रणनीतिकारों की मानें तो तबाही का सिलसिला उन देशों से शुरू होगा जो इन महाशक्तियों के पहले निशाने पर हैं. आइए जानें कि वो कौन से देश हैं.
ये बनेंगे तबाही का केंद्र
अगर तीसरा विश्व युद्ध शुरू होता है, तो इसका सबसे पहला और भीषण मंजर पश्चिम एशिया यानि मिडल ईस्ट में देखने को मिलेगा. इजरायल और ईरान इस युद्ध के दो मुख्य ध्रुव हैं. इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए ईरान के परमाणु ठिकानों पर सबसे पहले हमला करेगा, वहीं ईरान अपने प्रॉक्सी संगठनों के जरिए इजरायल के रिहायशी इलाकों को निशाना बनाएगा. इन दोनों देशों में सर्वनाश की शुरुआत सबसे पहले होगी. तेल के कुओं और रिफाइनरियों में लगने वाली आग पूरे क्षेत्र को एक ऐसे धुएं में लपेट देगी जिससे निकलना नामुमकिन होगा.
यूक्रेन और पोलैंड पर भी गिरेगी बिजली
यूक्रेन पहले से ही रूस के साथ युद्ध में है, लेकिन विश्व युद्ध की स्थिति में रूस अपने हमलों की तीव्रता को कई गुना बढ़ा देगा. रूस का लक्ष्य केवल कीव नहीं, बल्कि पोलैंड और बाल्टिक देश भी होंगे, क्योंकि यहीं से नाटो (NATO) की सेनाएं रूस की सीमा में घुसने का प्रयास करेंगी. पश्चिमी देशों की सैन्य मदद का केंद्र होने के कारण पोलैंड और जर्मनी के सैन्य अड्डे रूस की परमाणु मिसाइलों के पहले निशाने पर होंगे. यूरोप का यह हिस्सा सबसे पहले मलबे के ढेर में तब्दील हो सकता है.
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ताइवान और दक्षिण कोरिया की शामत
एशिया में तबाही का मोर्चा ताइवान और दक्षिण कोरिया से खुलेगा. अगर अमेरिका पश्चिम एशिया में उलझता है, तो चीन इस मौके का फायदा उठाकर ताइवान पर पूर्ण नियंत्रण के लिए हमला कर देगा. ताइवान की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि चीन के हमले से वहां घंटों के भीतर सर्वनाश शुरू हो जाएगा. वहीं, उत्तर कोरिया इस स्थिति का लाभ उठाकर दक्षिण कोरिया और जापान पर मिसाइलें दागना शुरू करेगा. सियोल और टोक्यो जैसे शहर अपनी सघन आबादी के कारण भारी जानमाल का नुकसान झेलेंगे.
महाशक्तियों के शहरों पर खतरा
विश्व युद्ध का मतलब है कि कोई भी देश सुरक्षित नहीं है. रूस की घातक मिसाइलें सीधे वाशिंगटन, न्यूयॉर्क और लंदन को निशाना बनाएंगी. जवाब में अमेरिका के परमाणु बम मास्को और सेंट पीटर्सबर्ग जैसे शहरों को राख कर देंगे. इन देशों में तबाही शायद थोड़ी देरी से आए, लेकिन जब आएगी तो वह परमाणु विकिरण के रूप में होगी, जिससे बचना नामुमकिन होगा. नाटो देशों के सभी प्रमुख मुख्यालय और कमांड सेंटर इस सर्वनाश की पहली सूची में शामिल हैं.
तेल और सप्लाई चेन का टूटना और पूरी दुनिया में भुखमरी
युद्ध केवल मिसाइलों से नहीं, बल्कि भूख से भी मचेगा. ईरान द्वारा तेल सप्लाई बाधित करने से उन देशों में सबसे पहले हाहाकार मचेगा जो ऊर्जा के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर हैं. जापान और कई यूरोपीय देश ऊर्जा संकट के कारण अंधेरे में डूब जाएंगे. जब परिवहन ठप होगा, तो अनाज की सप्लाई रुक जाएगी, जिससे अफ्रीका और एशिया के गरीब देशों में युद्ध से पहले भूख से सर्वनाश शुरू हो जाएगा. आर्थिक रूप से कमजोर देश इस महाजंग की पहली बलि चढ़ेंगे.
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