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कौन है हमदर्द कंपनी का मालिक, इसका किस धर्म से है वास्ता?

Hamdard Company: हमदर्द का कोई एक मालिक नहीं, बल्कि यह एक ट्रस्ट की सोच है. धर्म से जुड़ी पहचान के बावजूद इसकी सेवा हर इंसान के लिए है. आइए जान लेते हैं कि इसकी शुरुआत किसने की थी.

हाथ में शरबत की बोतल हो या घर की अलमारी में रखी यूनानी दवा, ‘हमदर्द’ नाम भरोसे का दूसरा नाम बन चुका है. लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर इस मशहूर कंपनी का मालिक कौन है, क्या यह किसी एक परिवार की निजी कंपनी है या फिर इसके पीछे कोई और व्यवस्था है? और जिस नाम से यह पहचानी जाती है, उसका धर्म से क्या कोई सीधा रिश्ता है? सच जानकर कई धारणाएं बदल सकती हैं.

हमदर्द की शुरुआत

हमदर्द की नींव साल 1906 में दिल्ली में रखी गई थी. इसके संस्थापक थे हकीम हाफिज अब्दुल मजीद, जो पेशे से यूनानी चिकित्सा पद्धति के प्रसिद्ध हकीम थे. उस दौर में इलाज महंगा और आम लोगों की पहुंच से बाहर था. हकीम अब्दुल मजीद ने यह तय किया कि दवाएं केवल व्यापार नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम होनी चाहिए. इसी सोच से हमदर्द नाम सामने आया, जिसका अर्थ ही होता है दुख-दर्द में साथ देने वाला.

निजी कंपनी नहीं, एक ट्रस्ट है हमदर्द

बहुत कम लोग जानते हैं कि हमदर्द कोई निजी लिमिटेड कंपनी नहीं है. यह एक गैर-लाभकारी ट्रस्ट के रूप में काम करती है, जिसे हमदर्द ट्रस्ट कहा जाता है. इस ट्रस्ट की खास बात यह है कि कंपनी से होने वाला अधिकांश मुनाफा समाजसेवा, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े कार्यों में लगाया जाता है. यानी हमदर्द से कमाया गया पैसा किसी एक मालिक की जेब में नहीं जाता, बल्कि सामाजिक विकास में खर्च होता है.

हमदर्द का संचालन और नेतृत्व

हकीम हाफिज अब्दुल मजीद के निधन के बाद हमदर्द की जिम्मेदारी उनके बेटे हकीम अब्दुल हमीद ने संभाली. हकीम अब्दुल हमीद सिर्फ एक उद्योगपति नहीं, बल्कि शिक्षाविद और समाज सुधारक भी थे. उन्हीं के प्रयासों से दिल्ली का जामिया हमदर्द विश्वविद्यालय अस्तित्व में आया, जो आज एक प्रतिष्ठित संस्थान है. वर्तमान समय में भारत में हमदर्द के संचालन में हामिद अहमद जैसे लोग प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं, जो संस्थापक परिवार के वंशज हैं और ट्रस्ट की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं.

धर्म से जुड़ाव का सच

हमदर्द कंपनी का संबंध इस्लाम धर्म से जुड़े परिवार से है, क्योंकि इसके संस्थापक और ट्रस्टी मुस्लिम समुदाय से आते हैं. लेकिन कंपनी की कार्यप्रणाली किसी एक धर्म तक सीमित नहीं है. हमदर्द के उत्पाद हर धर्म, हर समुदाय और हर वर्ग के लोग इस्तेमाल करते हैं. ट्रस्ट के तहत मिलने वाली शिक्षा, अस्पताल और शोध संस्थान भी धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करते. यही वजह है कि हमदर्द को एक सेक्युलर और समाजसेवी संस्था के रूप में देखा जाता है.

पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी हमदर्द

देश के विभाजन के बाद हमदर्द की कहानी तीन हिस्सों में बंट गई. भारत में हमदर्द ट्रस्ट उसी मूल दर्शन के साथ आगे बढ़ा. वहीं, संस्थापक के बेटे हकीम मोहम्मद सईद पाकिस्तान चले गए और वहां ‘हमदर्द पाकिस्तान’ की स्थापना की. बाद में उन्होंने ही पाकिस्तान में हमदर्द विश्वविद्यालय की नींव रखी. बांग्लादेश में हमदर्द की शाखा वहां के स्थानीय लोगों को सौंप दी गई, जिससे वह स्वतंत्र रूप से काम कर सके.

यूनानी चिकित्सा और आधुनिक पहचान

हमदर्द की पहचान यूनानी चिकित्सा पद्धति से जुड़ी हुई है, जिसमें जड़ी-बूटियों और प्राकृतिक तत्वों का इस्तेमाल होता है. रूह अफजा, रोगन बादाम शीरीन और साफी जैसे उत्पाद सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी लोकप्रिय हैं. समय के साथ हमदर्द ने आधुनिक गुणवत्ता मानकों को अपनाया, लेकिन अपनी पारंपरिक जड़ों से समझौता नहीं किया.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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