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सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाकर कौन कर रहा असली कमाई? समझें पूरा खेल

सोशल मीडिया पर मजेदार वीडियो, छोटे-छोटे रील्स या इंस्टाग्राम पोस्ट देखकर ये लग सकता है कि हर कोई इस खेल से खूब पैसा कमा रहा है. लेकिन क्या सच में ऐसा है.

आज के समय में हर कोई कंटेंट क्रिएटर बनने की बात करता है. खासकर हमारी नई पीढ़ी, यानी जेन जी, दिन-रात अपने मोबाइल पर फॉलोअर्स बढ़ाने, लाइक्स पाने और वायरल वीडियो बनाने में जुटी रहती है. सोशल मीडिया पर मजेदार वीडियो, छोटे-छोटे रील्स या इंस्टाग्राम पोस्ट देखकर ये लग सकता है कि हर कोई इस खेल से खूब पैसा कमा रहा है. लेकिन क्या सच में ऐसा है.

भारत में लगभग 20 से 25 लाख लोग रोजाना मोबाइल की स्क्रीन पर अपने कंटेंट को पोस्ट करके अपनी पहचान बनाने में लगे हैं. इनमें से हर कोई यही सोचता है कि इससे जल्दी से जल्दी पैसे कमाए जा सकते हैं. लेकिन हकीकत ये है कि सिर्फ कुछ ही लोग हैं जो वाकई में इससे अच्छी कमाई कर पाते हैं. 

कंटेंट क्रिएटर इकोनॉमी की बढ़ती ताकत

भारत में कंटेंट क्रिएशन की दुनिया करीब 15 साल पहले शुरू हुई थी. उस समय लोगों को इसे नौकरी या कमाई का तरीका मानने में झिझक थी.लोग कंटेंट क्रिएटर्स को सिर्फ बेरोजगार समझते थे. लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल गए हैं. इस साल मई में मुंबई में हुए वेव्स समिट में बताया गया कि भारत के डिजिटल क्रिएटर्स हर साल करीब 350 अरब डॉलर की कस्टमर स्पेंडिंग को प्रभावित कर रहे हैं. अगले पांच साल में यह आंकड़ा 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा यानी भारत की कंटेंट क्रिएटर इकोनॉमी भविष्य में 1 लाख करोड़ डॉलर की होगी. सरकार भी इसे गंभीरता से ले रही है. मार्च 2025 में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि क्रिएटर इकोनॉमी को बढ़ाने के लिए 100 करोड़ डॉलर का निवेश किया जाएगा यानी यह साफ है कि मोबाइल स्क्रीन पर आप जो छोटे-छोटे वीडियो देखते हैं, वे बड़े-बड़े ब्रांड और कंपनियों के लिए एक नई सेल्स फोर्स का काम कर रहे हैं. 

असली कमाई कितने लोगों को होती है?

बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की रिपोर्ट बताती है कि सिर्फ 8-10 प्रतिशत क्रिएटर्स ही अपने कंटेंट से अच्छी कमाई कर पाते हैं यानी 20-25 लाख एक्टिव क्रिएटर्स में से केवल 2 से 2.5 लाख लोग ही पैसे कमा पाते हैं. बाकी 90-92  प्रतिशत क्रिएटर्स या तो बहुत कम कमाते हैं या सोशल मीडिया उनकी मुख्य कमाई का स्रोत नहीं है. इसका मतलब साफ है हर कोई वायरल होने या करोड़ों कमाने वाली कहानी नहीं लिख सकता है. 

कंटेंट क्रिएटर्स पैसे कैसे कमाते हैं?

जो क्रिएटर्स सफल होते हैं, उनके पास बड़ी ऑडियंस होती है. इससे उनके पास कई पैसे कमाने के रास्ते खुलते हैं.  जैसे ब्रांड पार्टनरशिप, बड़े ब्रांड उनके वीडियो के माध्यम से प्रोडक्ट बेचते हैं. स्पॉन्सरशिप, कंपनियां उन्हें सीधे पैसे देती हैं अपने प्रोडक्ट या सर्विस को प्रमोट करने के लिए, प्लेटफॉर्म एड यूट्यूब या इंस्टाग्राम से वीडियो पर एड्स के पैसे मिलते हैं. एफिलिएट मार्केटिंग प्रोडक्ट का लिंक शेयर करके सेल्स पर कमीशन, सब्सक्रिप्शन और प्रीमियम कंटेंट खास कंटेंट के लिए फॉलोअर्स सब्सक्राइब करते हैं. लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि सबसे ज्यादा पैसा प्लेटफॉर्म ही कमा रहे हैं, न कि क्रिएटर्स. यूट्यूब भारत की आय 2024 में 14,300 करोड़ रुपये थी. फेसबुक (मेटा) का टर्नओवर भी हजारों करोड़ रुपये में था. इसका मतलब है कि चाहे कोई कंटेंट क्रिएटर करोड़पति बने, असली पैसा तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के पास ही जाता है. 

कंटेंट क्रिएशन का दबाव

कंटेंट क्रिएशन सिर्फ पैसा कमाने का जरिया नहीं है, इसमें काफी कंपटीशन और मानसिक दबाव भी है. लोग अपने फॉलोअर्स की संख्या या लाइक्स से खुद की तुलना करते रहते हैं. कई बार कंटेंट वायरल न होने पर क्रिएटर्स का मनोबल गिरता है. ऐसे में, सिर्फ टैलेंट होना ही काफी नहीं, स्ट्रैटेजी और कड़ी मेहनत भी जरूरी है. 

यह भी पढ़ें: ग्रीनलैंड पर कब्जा कर लिया तो अमेरिका की कितनी बढ़ेगी कमाई? रकम सुन उड़ जाएंगे होश

मानसी उपाध्याय करीब दो साल से डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मूल रूप से उत्तराखंड से जुड़ी मानसी ने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए (ऑनर्स) हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की और वर्तमान में राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म कर रही हैं. पत्रकारिता में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अक्टूबर 2024 में एबीपी नेटवर्क से की. अब वह डिजिटल कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें फीचर और इंफॉर्मेटिव स्टोरीज लिखने के साथ-साथ स्क्रिप्ट राइटिंग, सोशल मीडिया और रिसर्च आधारित कंटेंट तैयार करने में रुचि है. हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखने वाली मानसी ऐसी स्टोरीज लिखना पसंद करती हैं, जो पाठकों को नई और जरूरी जानकारी आसान भाषा में दें. उनकी कोशिश रहती है कि कंटेंट सिर्फ जानकारी देने वाला ही नहीं, बल्कि पढ़ने में दिलचस्प और पाठकों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हुआ भी हो.

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