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Wars For Oil: ट्रंप से पहले तेल के लिए कौन-कौन से अमेरिकी राष्ट्रपति कर चुके जंग? देख लें पूरी लिस्ट

Wars For Oil: अमेरिका ने हाल ही में वेनेजुएला पर एक बड़ा मिलिट्री ऑपरेशन किया था. आइए जानते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप से पहले कौन से अमेरिकी राष्ट्रपति तेल के लिए जंग कर चुके हैं.

Wars For Oil: 2026 की शुरुआत में संयुक्त राज्य अमेरिका ने वेनेजुएला में एक बड़ा मिलिट्री ऑपरेशन किया. इसमें राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया. आधिकारिक तौर पर वाशिंगटन ने इस कदम को ड्रग तस्करी विरोधी कार्रवाई बताया, लेकिन ऑपरेशन के समय और पैमाने ने तुरंत वेनेजुएला के बड़े तेल भंडार की तरफ पूरी दुनिया का ध्यान खींचा. इसी बीच आइए जानते हैं कि ट्रंप से पहले तेल के लिए कौन-कौन से अमेरिकी राष्ट्रपति जंग कर चुके हैं.

अमेरिकी विदेश नीति 

100 से ज्यादा सालों से ऊर्जा संसाधन खासकर तेल तक पहुंच अमेरिकी वैश्वीकरण नीति का एक मुख्य हिस्सा रही है. अमेरिकी प्रशासन ने अक्सर राष्ट्रीय सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता या फिर लोकतंत्र की रक्षा जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके सैन्य कार्रवाइयों को सही ठहराया है. मध्य पूर्व से लेकर लैटिन अमेरिका तक तेल से संबंधित क्षेत्रों ने बार-बार अमेरिकी सैन्य योजना की मार को झेला है.

वुडरो विल्सन और पहला तेल संबंधित हस्तक्षेप 

सबसे शुरुआती उदाहरण में से एक 1914 का है. उस वक्त वुडरो विल्सन राष्ट्रपति थे. अमेरिकी सेना ने मैक्सिकन बंदरगाह शहर वेराक्रूज पर कब्जा कर लिया था. उन्होंने ऐसा प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जर्मन हथियारों की खेप को रोकने के लिए किया था. हालांकि यह जगह रणनीतिक रूप से मेक्सिको के प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्र के पास भी बसी हुई थी. उस समय अमेरिकी तेल कंपनियों ने मेक्सिको में बड़ा निवेश किया था और उन हितों की रक्षा करना एक अनकहा मकसद था. 

जिमी कार्टर का सिद्धांत 

1979 की ईरानी क्रांति और मध्य पूर्व में बढ़ती अस्थिरता के बाद जिमी कार्टर ने उस सिद्धांत की घोषणा की जिसे कार्टर सिद्धांत के नाम से जाना जाता है. उनका कहना था कि किसी भी बाहरी शक्ति द्वारा फारस की खाड़ी को कंट्रोल करने की कोई भी कोशिश अमेरिकी जरूरी हितों पर हमला मानी जाएगी और उसका जवाब सैन्य बल से दिया जाएगा.

खाड़ी में टैंकर युद्ध 

ईरान इराक युद्ध के दौरान राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने फारस की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य भागीदारी का विस्तार किया. जब तेल टैंकरों पर हमले होने लगे तो अमेरिकी नौसेना ने कुवैती तेल शिपमेंट को एस्कॉर्ट किया और सही तरीके से सुरक्षा दी. इसे टैंकर युद्ध के नाम से जाना गया. हालांकि इसे नेविगेशन की आजादी को पक्का करने के रूप में पेश किया गया था. लेकिन यह ऑपरेशन मूल रूप से खाड़ी से तेल के प्रभाव को सुरक्षित रखने के बारे में था.

जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश और खाड़ी युद्ध 

राष्ट्रपति जॉर्ज बुश कार्यकाल में 1990 से 1991 के बीच एक खाड़ी युद्ध हुआ. इराक ने कुवैत पर हमला कर दिया और अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन सेनन ने ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म को शुरू किया. आधिकारिक तौर पर युद्ध का मकसद कुवैत की संप्रभुता को बहाल करना था. लेकिन सऊदी अरब की रक्षा करना और सद्दाम हुसैन को दुनिया के तेल भंडार के बड़े हिस्से पर नियंत्रण करने से रोकना काफी जरूरी था. इस संघर्ष ने अमेरिका को तेल समृद्ध खाड़ी क्षेत्र में प्रमुख सैन्य शक्ति के रूप में मजबूती से स्थापित किया.

जॉर्ज डब्ल्यू बुश और इराक युद्ध 

सबसे विवादास्पद तेल से जुड़ा संघर्ष राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के तहत 2003 में इराक पर आक्रमण के साथ हुआ था. उन्होंने इस युद्ध के पीछे सामूहिक विनाश के हथियारों को खत्म करने का उद्देश्य बताया. लेकिन यह हथियार कभी नहीं मिले. दुनिया भर के आलोचकों ने यह तर्क दिया कि इराक के विशाल तेल भंडार और मध्य पूर्व के ऊर्जा मानचित्र को फिर से आकार देने के लिए यह युद्ध किया गया था.

ये भी पढ़ें: क्रूड ऑयल ही क्यों बेचते हैं रूस-अमेरिका जैसे देश, रिफाइन करके क्यों नहीं करते सौदा?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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