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Indian Warships: DRDO और SAIL की किस खास स्टील से बनते हैं भारतीय युद्धपोत? जानें इसकी खासियत

Indian Warships: भारतीय युद्धपोतों को बनाने के लिए एक खास तरह की स्टील का इस्तेमाल किया जाता है. आइए जानते हैं कौन सी होती है यह स्टील और क्या होती है इसकी खासियत.

Indian Warships: आधुनिक भारतीय नौसेना खास तौर से युद्धपोतों के निर्माण में स्वदेशी तकनीक पर निर्भर है. इसमें एक बड़ा योगदान डीआरडीओ द्वारा विकसित और एसएआईएल द्वारा भारत में उत्पादित एक विशेष श्रेणी के स्टील ने दिया है. इस स्टील को डीएमआर-249ए के नाम से पहचाना जाता है. आईए जानते हैं क्या है इस स्टील की खास बात. 

क्यों है यह खास 

डीएमआर-249ए का सबसे बड़ा लाभ इसकी मजबूती है. यह युद्धपोतों को समुद्र में चरम स्थितियों का सामना करने में मदद करती है. युद्धपोतों को बड़ी लहरों, भारी भार, चरण जलवायु और उच्च गति वाले युद्ध अभ्यासों का सामना करना पड़ता है. इस वजह से उनको बनाने में आम स्टील का इस्तेमाल नहीं किया जाता. इसके लिए ऐसी स्टील का इस्तेमाल किया जाता है जो असाधारण रूप से टिकाऊ, और विश्वसनीय हो. डीएमआर-249ए इन सभी जरूरतों को पूरा करती है और साथ ही काफी ज्यादा हल्की भी है. 

कार्बन की कम मात्रा 

इस स्टील में कार्बन की मात्रा काफी कम होती है लेकिन इसमें क्रोमियम, निकाल और मैंगनीज जैसे तत्वों की एक नियंत्रित मात्रा होती है. यह सभी एलिमेंट्स मैकेनिकल शक्ति और तनाव प्रतिरोध दोनों को बढ़ाते हैं. लो कार्बन कंपोजिशन स्टील की दरारें और विकृतियों को सहने की क्षमता को बढ़ाने में भी काफी मदद करती है.

काफी ज्यादा मजबूत 

इस स्टील की खास बात यह है कि यह काफी ज्यादा मजबूत है और साथ ही इसकी वेल्डेबिलिटी काफी ज्यादा बेहतर है. दरअसल जहाजों को खंडों में जोड़ा जाता है. इसी के साथ बड़ी संरचनाओं में मजबूत, निर्बाध वेल्डिंग की जरूरत होती है. यह स्टील इस बात को सुनिश्चित करती है कि पटवार और आंतरिक फ्रेम काफी ज्यादा तनाव में भी मजबूत बनी रहे.

रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता 

भारत में डीएमआर-249ए का विकास और उत्पादन इस देश के रक्षा निर्माण के लिए मील का पत्थर साबित हुआ है. पहले इस तरह के इस्पात का आयात काफी महंगे दामों पर करना पड़ता था, जिस वजह से विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता काफी ज्यादा बढ़ जाती थी. 

इस स्टील का इस्तेमाल भारतीय नौसेना के युद्धपोतों के पटवार और आंतरिक संरचना ढांचे में किया जाता है. इसी का एक प्रकार डीएमआर-249बी खास तौर से विमानवाहक पोतों के उड़ान डेक जैसे जरूरी उच्च भार वाले क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जाता है. 

आपको बता दें कि भारत के पहले स्वदेशी विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत में डीएमआर-249ए और डीएमआर-249बी का ही इस्तेमाल किया गया था. इतना ही नहीं बल्कि आईएनएस किल्टन,  आईएनएस नीलगिरी, आईएनएस अर्नाला जैसे अन्य युद्धपोतों और भारतीय नौसेना के आधुनिक फ्रिगेट और कॉर्वेट कार्यक्रमों के कई जहाज में भी इसी स्टील का इस्तेमाल किया गया है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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