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किस फोर्स के जवानों को मिलता है शहीद का दर्जा? क्या हैं इसके लिए नियम

अपने देश की सुरक्षा के लिए अलग-अलग फोर्स के जवान लगे हुए हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में किन फोर्स के जवानों को शहीद का दर्जा मिलता है और इसके लिए क्या नियम बने हुए हैं.

देश की विपक्षी पार्टियों ने संसद में रेगुलर और अग्निवीर जवानों को मिलने वाली सुविधाओं का मुद्दा उठाया है. ये सच है कि अग्निवीर जवान और उनके परिवार को रेगुलर जवानों की तुलना में बहुत कम सुविधाएं मिलती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अपने देश में किस फोर्स के जवानों को शहीद का दर्जा दिया जाता है? 

सैन्य बल 

देश की सुरक्षा में अलग-अलग फोर्स के जवान तैनात है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि किन जवानों को शहीद का दर्जा दिया जाता है. हां ये सुनने में थोड़ा अटपटा लग सकता है, क्योंकि देश की सुरक्षा के लिए अपने जान की कुर्बानी देने वाले सभी जवानों को शहीद ही कहा जाता है. लेकिन असल में आम बोलचाल की भाषा में शहीद कहना और डाक्यूमेंट्स में शहीद होने में एक बड़ा फर्क होता है. भारत सरकार जिन जवानों को शहीद का दर्जा देती है, उन्हें कई तरह की सुविधाएं भी मुहैया कराई जाती है. जिसमें शहीद की पत्नी को जीवन भर सैलरी के बराबर पेंशन, हवाई जहाज और रेल किरायों में छूट, स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं और मत्यु के बाद कुछ सहायता राशि शामिल है. 

किस फोर्स के जवानों को मिलता है शहीद का दर्जा

सबसे पहले अग्निवीर जवानों के बारे में बताते हैं. बता दें अग्निवीर जवान अगर किसी ऑपरेशन, सैन्य दुर्घटना या आतंकी हमले में शहीद होता है, तो उसे शहीद का दर्जा नहीं मिलता है. अग्निवीर जवानों को इस दौरान तय राशि और बीमा राशि ही सरकार की तरफ से दी जाती है. इसके अलावा किसी भी राज्य का पुलिसकर्मी अगर किसी आतंकी कार्रवाई या अन्य किसी ऑपरेशन में अपनी जान गंवाता है, तो उसे भी शहीद का दर्जा नहीं मिलता है. जानकारी के मुताबिक पैरामिलिट्री फोर्सेज़ के जवान की अगर किसी आतंकी वारदात, ऑपरेशन, या किसी अन्य गतिविधियों में जान जाती है, तो उन्हें भी शहीद का दर्जा नहीं मिलता है. 

शहीद होने का दर्जा

देश में किसी भी फोर्स के जवान की मृत्यु के बाद आम बोल-चाल की भाषा में उसे शहीद ही कहा जाता है. लेकिन असल में सेना के जिन जवानों को शहीद का दर्जा मिलता है, उन्हें कई अन्य सुविधाएं भी दी जाती हैं. जिसमें जमीन या मकान, पेट्रोल पम्प या गैस एजेंसी, शहीद की पत्नी को पूरा वेतन, शहीद के परिवार वालों को रेल और हवाई किराया में 50 प्रतिशत छूट और राज्य सरकार की ओर से आर्थिक मदद और सरकारी नौकरी समेत कुछ अतिरिक्त सुविधाएं मिलनी शुरु हो जाती हैं. जानकारी के मुताबिक अपने देश में शहीद का दर्जा सिर्फ सेना के जवानों को ही मिलता है. 

ये भी पढ़ें: CSD कैंटीन से लेकर मुफ्त इलाज तक... रिटायर जवान की तरह अग्निवीर को नहीं मिलती ये सुविधाएं

गिरिजांश गोपालन को मीडिया इंडस्ट्री में चार साल से ज्यादा का अनुभव है. फिलहाल वह डिजिटल में सक्रिय हैं, लेकिन इनके पास प्रिंट मीडिया में भी काम करने का तजुर्बा है. दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद गिरिजांश ने नवभारत टाइम्स अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की. उन्हें घूमना बेहद पसंद है. पहाड़ों पर चढ़ना, कैंपिंग-हाइकिंग करना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना उनकी हॉबी में शुमार है। यही कारण है कि वह तीन साल से पहाड़ों में ज्यादा वक्त बिता रहे हैं. अपने अनुभव और दुनियाभर की खूबसूरत जगहों को अपने लेखन-फोटो के जरिए सोशल मीडिया के रास्ते लोगों तक पहुंचाते हैं.
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