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Meat Consumption: पूरी दुनिया में किस जानवर का मांस सबसे ज्यादा खाया जाता है, नाम जानकर चौंक जाएंगे आप

Meat Consumption: क्या आप जानते हैं कि दुनिया में सबसे ज्यादा मांस किस जानवर का खाया जाता है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब और साथ ही बाकी देशों की खाद्य संस्कृति भी.

Meat Consumption: जब वैश्विक मांस उपभोग की बात आती है तो लोगों को लगता है की सबसे ज्यादा चिकन या फिर बीफ ही खाया जाता है. लेकिन ऐसा नहीं है. संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन के मुताबिक सबसे ज्यादा खाया जाने वाला मांस सूअर का है. यह कुल वैश्विक मांस उपभोग का लगभग 36% है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह.

क्यों खाया जाता है सबसे ज्यादा सूअर का मांस 

दरअसल एशिया में सूअर पालन हजारों साल पुराना है. सूअर को पालना आसान है और वे विविध जलवायु के अनुकूल ढल जाते हैं. इसके अलावा वह बाकी पशुओं की तुलना में ज्यादा तेजी से बढ़ते हैं और प्रति इकाई चारे में ज्यादा मांस पैदा करते हैं. 

क्या हैं पूरे आंकड़े 

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन के आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर में मांस की कुल खपत में 36% के साथ सूअर का मांस सबसे आगे है. इसके बाद 33% पोल्ट्री, 24% बीफ और 5% भेड़ बकरी का मांस है. इस रैंकिंग से पता चलता है कि सूअर का मांस बाजार पर किस तरह से हावी है. सिर्फ चीन में ही जहां दुनिया की सबसे बड़ी आबादी रहती है सूअर के मांस का सबसे ज्यादा उत्पादन किया जाता है. साथ ही यहीं पर सूअर के मांस के सबसे ज्यादा उपभोक्ता भी हैं.

सांस्कृतिक और पाक कला प्रभाव 

सूअर का मांस सिर्फ एक ही जगह सीमित नहीं है. यह कई देशों की पाक परंपराओं में गहराई तक समाया हुआ है. चीन में चा सिउ से लेकर ब्राजील में फेजोआडा तक सूअर के मांस को कई पारंपरिक व्यंजनों में शामिल किया जाता है. स्वाद और बनावट की वजह से इसे सॉसेज और रोस्ट से लेकर सूप और स्नैक्स तक हर चीज में शामिल किया जाता है. 

हालांकि इस्लाम और यहूदी धर्म में सूअर का मांस खाने पर सख्त पाबंदी है. यही वजह है कि सऊदी अरब, ईरान और इजराइल जैसे देशों में इसका सेवन बहुत कम होता है. इसी के साथ भारत में भी धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं की वजह से सूअर का मांस और बीफ दोनों का सेवन ही सीमित है. इसी वजह से यहां पर चिकन सबसे ज्यादा खाया जाता है. 

सूअर के मांस का उत्पादन 

सूअर को कम जगह की जरूरत होती है. वे तेजी से प्रजनन करते हैं और चारे को मांस में अधिक प्रभावी ढंग से परिवर्तित करते हैं. जिन देशों में संसाधन सीमित है सूअर के मांस के उत्पादन को आर्थिक रूप से टिकाऊ और काफी ज्यादा सुलभ बनाया जाता है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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