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आम लोगों तक कब तक पहुंचेगा Satellite Internet, कितना सस्ता होगा डेटा प्लान?

Satellite Internet: भारत में सैटलाइट इंटरनेट को लेकर चर्चा चल रही है. आइए जानते हैं कि देश में सैटलाइट इंटरनेट कब शुरू होगा और क्या होगी इसकी कीमत.

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  • भारत में सैटलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत जल्द, कंपनियां तैयार।
  • प्रशासनिक स्पेक्ट्रम आवंटन के बाद सेवाएं चरणों में शुरू होंगी।
  • जियो-स्टारलिंक ₹500-₹4200 मासिक प्लान देंगे; अलग रणनीति।
  • कंपनियों की प्रतिस्पर्धा से कीमतें भविष्य में काफी घट सकती हैं।

Satellite Internet: भारत का सैटलाइट इंटरनेट मार्केट एक बड़े बदलाव के लिए तैयार हो रहा है. जरूरी रेगुलेटरी मंजूरी मिलने के बाद रिलायंस जियो, भारती एयरटेल, स्टारलिंक और अब अमेजॉन जैसी कंपनियां पूरे देश में सेवाएं शुरू करने की तैयारी कर रही हैं. हालांकि आने वाले महीनों में कमर्शियल सेवा चरणों में शुरू होने की उम्मीद है लेकिन मुकेश अंबानी, एलन मस्क और बाकी कंपनियों के बीच कीमतों में जंग शुरू हो सकती है. इसी बीच आइए जानते हैं कि आम लोगों तक सैटलाइट इंटरनेट कब तक पहुंचेगा और इसका डेटा प्लान कितना सस्ता होगा.

सैटलाइट इंटरनेट कब उपलब्ध होगा? 

कंपनी द्वारा गेटवे इंफ्रास्ट्रक्चर, स्पेक्ट्रम आवंटन और रेगुलेटरी नियम का पालन पूरा करने के बाद सैटेलाइट इंटरनेट सेवा चरणों में शुरू होने की उम्मीद है. जियो, एयरटेल समर्थित वनवेब और स्टारलिंक ने पहले ही बड़ी मंजूरी हासिल कर ली है. इसी के साथ अमेजन का प्रोजेक्ट कुइपर 2027-28 तक बड़े पैमाने पर रोल आउट का लक्ष्य बना रहा है.


आम लोगों तक कब तक पहुंचेगा Satellite Internet, कितना सस्ता होगा डेटा प्लान?

रोल आउट में इतना समय क्यों लगा? 

सबसे बड़ी बाधा यह तय करना था कि सेटेलाइट स्पेक्ट्रम का आवंटन कैसे किया जाएगा. रिलायंस जियो ने नीलामी आधारित आवंटन का समर्थन किया लेकिन स्टारलिंक ने प्रशासनिक आवंटन की वकालत की. सरकार ने अंत में प्रशासनिक आवंटन को चुना. इससे कंपनियों को कमर्शियल तैयारी के साथ आगे बढ़ने की मंजूरी मिल गई है. 

बड़ी कंपनियां कैसे तैयारी कर रही हैं?

रिलायंस जियो ने मीडियम अर्थ आर्बिट सैटेलाइट का इस्तेमाल करके जियोस्पेसफाइबर लॉन्च करने के लिए SES के साथ साझेदारी की है और पूरे भारत में लगभग 20 से 22 गेटवे स्टेशन स्थापित करने की योजना बनाई है. इनकी कुल क्षमता लगभग 5 टीबीपीएस होगी.

एयरटेल ने यूटेलसैट वनवेब के साथ साझेदारी की है जो पहले से ही दुनिया भर में 600 से ज्यादा लो अर्थ आर्बिट सैटेलाइट संचालित करती है. साथ ही गुजरात और तमिलनाडु में गेटवे स्टेशन स्थापित कर चुकी है. 

स्टारलिंक विश्व स्तर पर 4400 से ज्यादा एलईओ सैटेलाइट संचालित करती है और भारत में अपने संचालन के लिए लगभग 9 से 10 गेटवे स्टेशन तैयार कर रही है. अमेजन का प्रोजेक्ट कुइपर 2027-28 तक अपने सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन के साथ कंपटीशन में शामिल होने की उम्मीद कर रहा है. 

सैटलाइट इंटरनेट की कीमत कितनी हो सकती है? 

जियो के ₹500 से ₹1000 के बीच मासिक प्लान पेश करके बड़े पैमाने पर ग्राहकों को लक्षित करने की उम्मीद है. इसी के साथ सैटेलाइट उपकरणों पर भारी सब्सिडी भी दी जाएगी. हर घर के लिए अलग-अलग डिश लगाने के बजाय जियो एयरफाइबर इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े साझा सैटेलाइट गेटवे के जरिए से गांव को सेवा देने की योजना बना रही है. 

स्टारलिंक प्रीमियम ग्राहकों को और दूरदराज के उपयोगकर्ताओं को लक्षित करेगी. ग्राहकों को लगभग ₹30,000 से ₹34,000 की कीमत वाला हार्डवेयर खरीदना पड़ सकता है. इसी के साथ महीने के अनलिमिटेड प्लान की कीमत ₹3,000 से ₹4,200 के बीच हो सकती है. कंपनी लॉन्च के समय प्रमोशन प्लान और फ्री ट्रायल ऑफर भी पेश कर सकती है. एयरटेल का वन वेब मुख्य रूप से आम घरों के बजाय एंटरप्राइज ग्राहकों, सरकारी एजेंसी, डिफेंस, एविएशन, शिपिंग और बैंकिंग सेक्टर पर ध्यान केंद्रित करेगा. 


आम लोगों तक कब तक पहुंचेगा Satellite Internet, कितना सस्ता होगा डेटा प्लान?

सरकार की भूमिका 

टेलीकम्युनिकेशन विभाग सैटेलाइट ऑपरेटरों से एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू का लगभग 5% स्पेक्ट्रम यूसेज फीस और साथ ही सालाना अर्बन सब्सक्राइबर लेवी लेने पर विचार कर रहा है. इन शुल्कों का सीधा असर ग्राहकों को दी जाने वाली कीमतों पर पड़ेगा. 

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सुरक्षा से जुड़ी चिंता 

सैटेलाइट ऑपरेटर इंटर सैटेलाइट लिंक का इस्तेमाल करते हैं. इससे सैटेलाइट अंतरिक्ष में लेजर लिंक के जरिए एक दूसरे से कम्युनिकेट कर पाते हैं. इससे सुरक्षा और निगरानी से जुड़ी कुछ चुनौतियां पैदा हो सकती है. इस वजह से बड़े पैमाने पर कमर्शल इस्तेमाल शुरू करने से पहले भारत के डाटा और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा नियमों का पालन करना एक जरूरी शर्त बन जाती है. 

क्या भविष्य में कीमतें कम हो सकती हैं?

कंपनियों के बीच कॉम्पिटीशन से आने वाले कुछ सालों में सैटलाइट इंटरनेट की कीमतें काफी कम हो सकती हैं. जब अमेजन का प्रोजेक्ट भारतीय बाजार में आएगा तो ग्राहकों के लिए टैरिफ में 30% से 40% तक की कमी आ सकती है.  इससे दूर दराज और कम सुविधा वाले इलाकों के घरों के लिए सैटेलाइट ब्रॉडबैंड ज्यादा सस्ता हो जाएगा.

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स्पर्श गोयल एबीपी लाइव के साथ कंटेंट राइटर के तौर पर जुड़े हुए हैं. वह जनरल नॉलेज बीट की जिम्मेदारी संभालते हैं. कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में उन्हें चार साल का अनुभव है. एबीपी से पहले वह डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद में करीब दो साल तक काम कर चुके हैं. उन्होंने नमस्कार भारत से अपने करियर की शुरुआत की थी. .

वह अलग-अलग विषयों पर रिसर्च करके पाठकों के लिए जानकारी को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण अंदाज में पेश करते हैं. उन्होंने न्यूज राइटिंग के साथ-साथ स्क्रीनराइटिंग में भी अपनी पकड़ मजबूत की.

उन्होंने मां शाकुम्भरी यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. इसके साथ उन्होंने एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलिविजन से स्क्रीनप्ले का डिप्लोमा भी हासिल किया है.

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