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Petrol Price History: जब मिट्टी के तेल का था बोलबाला, तब कितना था पेट्रोल-डीजल का दाम, केरोसिन से कम या ज्यादा?

Petrol Price History: पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी ने एक बड़े सवाल को खड़ा कर दिया है. आइए जानते हैं मिट्टी तेल के दौर में पेट्रोल और डीजल के क्या दाम हुआ करते थे?

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  • पेट्रोल ₹2.61, डीजल ₹2.71 महंगा होकर बजट पर दबाव डाला।
  • 1970-90 में केरोसिन पर भारी सब्सिडी, पेट्रोल लग्जरी ईंधन था।
  • 1970 में केरोसिन 20-30 पैसे, पेट्रोल ₹1.80 तक मिलता था।
  • 2000 तक केरोसिन ₹5.5, डीजल ₹14, पेट्रोल ₹26 तक पहुंचा।

Petrol Price History: पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी ने एक बार फिर से पूरे भारत में घरों के बजट पर दबाव डाला है. पेट्रोल ₹2.61 प्रति लीटर महंगा हो गया है और डीजल ₹2.71. ईंधन की कीमतों पर चल रही इस बहस के बीच कई लोग उस पुराने दौर को याद कर रहे हैं जब मिट्टी के तेल को भारतीय घरों की जीवन रेखा माना जाता था. आइए जानते हैं उस समय पेट्रोल और डीजल की कीमत क्या थी.

पुराने दौर में पेट्रोल और डीजल की कीमत 

1970 के दशक से लेकर 1990 के दशक तक पेट्रोल और डीजल मिट्टी के तेल की तुलना में काफी महंगे थे. सरकार मिट्टी के तेल को गरीब परिवारों के लिए एक जरूरी ईंधन मानती थी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए इस पर भारी सब्सिडी देती थी. यही वजह है कि मिट्टी के तेल की कीमत काफी कम रहती थी. 

भारतीय घरों की रीढ़

एलपीजी सिलेंडर और गांवों तक बिजली पहुंचाने से पहले मिट्टी के तेल की रोजमर्रा की जिंदगी में एक बड़ी भूमिका थी. बिजली गुल होने पर परिवार रोशनी के लिए मिट्टी के तेल की लालटेन का इस्तेमाल करते. साथ ही खाना पकाने के लिए मिट्टी के तेल के स्टोव का इस्तेमाल किया जाता था. ग्रामीण भारत में यह अक्सर कम इनकम वाले परिवारों के लिए ऊर्जा का एकमात्र किफायती जरिया होता था. यही वजह है कि सरकार ने दशकों तक मिट्टी के तेल की कीमतों पर भारी सब्सिडी दी.

पेट्रोल एक लग्जरी ईंधन 

उस समय पेट्रोल को ज्यादातर निजी वाहन और समाज के अमीर तबके से जोड़ा जाता था. सरकार ने पेट्रोल को एक लग्जरी वस्तु के तौर पर वर्गीकृत किया था. इसका मतलब था कि दूसरे इंधनों की तुलना में इस पर काफी ज्यादा टैक्स लगता था. यही वजह है कि पेट्रोल की कीमत डीजल और मिट्टी के तेल से काफी ज्यादा रहती थी. वहीं दूसरी तरफ डीजल को परिवहन और खेती-बाड़ी के लिए जरूरी माना जाता था. इस वजह से इस पर टैक्स थोड़ा कम था.

ईंधन के ऐतिहासिक कीमतें 

उस दौर के ईंधन की कीमतें बताती हैं कि मिट्टी के तेल और पेट्रोल के बीच कितना बड़ा अंतर था. 1970 के दशक में मिट्टी का तेल लगभग 20 से 30 पैसे प्रति लीटर में मिलता था और पेट्रोल की कीमत लगभग 90 पैसे से ₹1.80 प्रति लीटर के बीच थी. 

1980 के दशक तक मिट्टी के तेल की कीमत बढ़ाकर लगभग ₹1 से ₹1.50 प्रति लीटर हो गई थी. लेकिन पेट्रोल की कीमत पहले ही तीन से चार रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच चुकी थी. 1989 में केरोसिन की कीमत लगभग ₹2.25 प्रति लीटर थी और डीजल की लगभग ₹3.50. इसी के साथ पेट्रोल की कीमत बढ़कर लगभग ₹8.50 प्रति लीटर हो गई थी. साल 2000 तक यह अंतर और भी बढ़ गया था. केरोसिन की कीमत लगभग ₹5.5 प्रति लीटर हो रही थी और डीजल बढ़कर ₹14.04 हो गया था. इसी के साथ पेट्रोल ₹25.94 प्रति लीटर तक पहुंच गया था.

यह भी पढ़ेंः पहले पोस्टमॉर्टम के बाद कैसे होता है दूसरा पोस्टमॉर्टम, दोनों प्रोसेस में कितने दिन का अंतर जरूरी?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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