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मुगलों के दौर में क्या था यूपी का नाम, बंटवारे की खबरों के बीच जानें कब-क्या बदला?

Uttar Pradesh Name History: यूपी का नाम और नक्शा समय के साथ कई बार बदला है. अब बंटवारे की बहस के बीच इतिहास फिर याद दिला रहा है कि यह इलाका हमेशा एक जैसा नहीं रहा है.

उत्तर प्रदेश के बंटवारे की चर्चाओं के बीच एक सवाल लोगों के मन में बार-बार उठ रहा है कि क्या यह इलाका हमेशा से उत्तर प्रदेश ही कहलाता था? जवाब है नहीं. आज जिस यूपी को हम जानते हैं, उसका नाम, पहचान और सीमाएं समय-समय पर बदलती रही हैं. मुगल दौर से लेकर अंग्रेजी हुकूमत और आजादी के बाद तक, यह क्षेत्र कई नामों और प्रशासनिक ढांचों से गुजरा है. आइए जानें कि उस दौर में इसका क्या नाम था. 

बंटवारे की बहस और इतिहास की ओर लौटता सवाल

देश का सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है. 80 लोकसभा सीटों और 75 जिलों वाले इस विशाल प्रदेश को छोटे राज्यों में बांटने की मांग तेज हो रही है. पश्चिमी यूपी के बाद अब पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने की आवाज भी खुलकर सामने आई है. इसी बहस के बीच लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर मुगलों के दौर में यूपी को किस नाम से जाना जाता था और कब-कब इसकी पहचान बदली.

मुगल दौर में क्या था नाम?

मुगल शासन के समय उत्तर प्रदेश नाम का कोई राज्य या प्रशासनिक इकाई नहीं थी. उस दौर में पूरा इलाका अलग-अलग सूबों यानी प्रांतों में बंटा हुआ था. मुगल प्रशासन में सूबा व्यवस्था बहुत मजबूत थी और हर सूबा सीधे बादशाह के अधीन होता था. 

मुगल काल के प्रमुख सूबे

आज के यूपी का बड़ा हिस्सा तीन अहम मुगल सूबों में शामिल था. पहला था सूबा-ए-आगरा, जिसमें दिल्ली-आगरा क्षेत्र और पश्चिमी यूपी का बड़ा भाग आता था. दूसरा सूबा-ए-अवध था, जिसमें लखनऊ, फैजाबाद और पूर्वी यूपी शामिल थे. तीसरा सूबा-ए-इलाहाबाद था, जो गंगा-यमुना दोआब के दक्षिणी हिस्से को कवर करता था. इन सूबों की अपनी प्रशासनिक और सैन्य व्यवस्था थी. 

मुगल शासन में यूपी का विशेष महत्व

मुगल साम्राज्य के लिए यह इलाका सत्ता का केंद्र था. बाबर ने आगरा को राजधानी बनाया और अकबर ने फतेहपुर सीकरी को. यमुना नदी और दोआब क्षेत्र की वजह से यह क्षेत्र कृषि, व्यापार और सेना के लिहाज से बेहद अहम था. शाहजहां के दौर में ताजमहल और आगरा किले जैसी ऐतिहासिक इमारतें बनीं, जिन्होंने इस क्षेत्र को वैश्विक पहचान दी.

औरंगजेब के बाद बिखरता नियंत्रण

1707 में औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुगल साम्राज्य कमजोर पड़ने लगा. इसके साथ ही आज के यूपी का इलाका भी एकसमान नहीं रहा. अवध, रुहेलखंड और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्र धीरे-धीरे अलग-अलग सत्ता केंद्रों में बंट गए. मराठों और स्थानीय नवाबों का प्रभाव बढ़ता गया, जिससे मुगल नियंत्रण सीमित होता चला गया.

ब्रिटिश काल में पहली बार एक इकाई बनने की कोशिश

अंग्रेजों के आने के बाद पहली बार इस पूरे इलाके को एक प्रशासनिक इकाई के रूप में देखने की कोशिश हुई. 1836 में इसे North-Western Provinces कहा गया. 1856 में अवध का अंग्रेजों द्वारा विलय कर लिया गया. इसके बाद 1902 में इसका नाम United Provinces of Agra and Oudh रखा गया, जिसे आम बोलचाल में यूनाइटेड प्रोविंसेस कहा जाने लगा. 

नाम बदलने की यात्रा कैसे पूरी हुई?

1937 में नाम छोटा होकर सिर्फ United Provinces रह गया. आजादी के बाद 1950 में इस राज्य को नया नाम मिला- उत्तर प्रदेश. यहीं से यूपी को उसकी मौजूदा पहचान मिली, जो आज देश की राजनीति और प्रशासन में सबसे अहम राज्यों में गिनी जाती है.

यह भी पढ़ें: उत्तर प्रदेश को अलग-अलग राज्यों में बांटने की मांग, इसके लिए किससे लेनी होती है परमिशन?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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