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Revenue VS Non Revenue Districts: राजस्व और गैर-राजस्व जिलों में क्या होता है अंतर, ये एक-दूसरे से कितने होते हैं अलग?

Revenue VS Non Revenue Districts: भारत में दो तरह के जिले होते हैं. राजस्व और गैर राजस्व. आइए जानते हैं दोनों में क्या फर्क है.

Revenue VS Non Revenue Districts: जब भी हम भारत में जिला शब्द सुनते हैं तो आमतौर पर हम एक ऐसी एडमिनिस्ट्रेटिव यूनिट के बारे में सोचते हैं जो जमीन के रिकॉर्ड से लेकर कानून व्यवस्था तक सब कुछ संभालती है. लेकिन असल में ऐसा नहीं है. यह सिस्टम काफी ज्यादा लेयर्ड है. भारत का एडमिनिस्ट्रेशन राजस्व जिले और  गैर राजस्व जिले के जरिए काम करता है. इनमें से हर एक अलग-अलग मकसद के लिए बनाया गया है. आइए जानते हैं दोनों के बीच अंतर.

राजस्व जिला क्या है 

 राजस्व जिला भारत में सबसे जरूरी एडमिनिस्ट्रेटिव यूनिट है. इसका मकसद जमीन, रेवेन्यू और कुल मिलाकर सिविल एडमिनिस्ट्रेशन को मैनेज करना है. यह वही जिला है जो जनगणना के डेटा, चुनाव के नक्शे और ज्यादातर सरकारी रिकॉर्ड्स में दिखता है.

राजस्व जिले का हेड डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट या कलेक्टर होता है. यह मुख्य एडमिनिस्ट्रेटिव अथॉरिटी के तौर पर काम करता है. उनकी जिम्मेदारियों में जमीन के रिकार्ड्स का रखरखाव, टैक्स और रेवेन्यू कलेक्शन, आपदा प्रबंधन, वेलफेयर स्कीम को लागू करना और चुनाव करवाना शामिल है. एडमिनिस्ट्रेटिव सुविधा के लिए हर राजस्व जिले को आगे तहसील या फिर तालुकों में बांटा जाता है. यह स्थानीय स्तर पर रेवेन्यू का काम संभालते हैं.

आसान शब्दों में कहें तो जब सरकार डेवलपमेंट प्रोजेक्ट की योजना बनाती है, आबादी गिनती है या फिर फंड बांटती है तो वह आमतौर पर राजस्व जिले को बेस यूनिट के तौर पर इस्तेमाल करती है.

गैर राजस्व जिला क्या है

गैर  राजस्व जिले खास एडमिनिस्ट्रेटिव जरूरतों के लिए बनाए जाते हैं. यहां रेवेन्यू की सीमाएं हमेशा प्रैक्टिकल नहीं होती. यह जिले मुख्य रूप से पुलिसिंग, न्यायिक एडमिनिस्ट्रेशन या फिर डेवलपमेंट के काम के लिए बनाए जाते हैं. आम उदाहरण पुलिस जिला है. बड़े या फिर संवेदनशील इलाकों में बेहतर कानून व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए एक राजस्व जिले को कई पुलिस जिलों में बांटा जा सकता है. हर पुलिस जिले का हेड एसपी या फिर एसएसपी होता है. यह हेड पूरी तरह से सुरक्षा, अपराध नियंत्रण और जांच पर ध्यान देता है. ठीक इसी तरह डेवलपमेंट प्लानिंग के लिए जिले को डेवलपमेंट ब्लॉक में बांटा जा सकता है.

प्रैक्टिस में राजस्व और पुलिस जिले कैसे अलग होते हैं 

भारत के कई हिस्सों में राजस्व जिला और पुलिस जिला ओवरलैप करते हैं. यानी कि एक ही जिला एडमिनिस्ट्रेशन और पुलिसिंग दोनों संभालता है. मुंबई या दिल्ली जैसे बड़े मेट्रो शहरों में राजस्व जिला छोटा होता है जबकि पुलिस ज्यूरिडिक्शन बड़े होते हैं.  साथ ही यह शहरी अपराध पैटर्न को संभालने के लिए जोन में  बंटे होते हैं. ज्यादा अपराध या फिर सुरक्षा चिंता वाले इलाकों में सरकार एक अलग पुलिस जिला बना सकती है भले ही राजस्व एडमिनिस्ट्रेशन मूल जिले के तहत जारी रहे. 

न्यायिक जिले की मौजूदगी 

राजस्व जिले और पुलिस जिलों के अलावा न्यायिक जिले भी होते हैं. यह जिला अदालतों के अधिकार क्षेत्र को तय करते हैं. कुछ मामलों में एक ही न्यायिक जिला दो या फिर दो से ज्यादा छोटे राजस्व जिलों को कवर कर सकता है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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