एक्सप्लोरर

Noida Sectors: नोएडा के पुराने सेक्टर और नए सेक्टरों में कितना अंतर, जानें कमाई के मामले में कौन आगे?

Noida Sectors: नोएडा ने पिछले दो दशकों में काफी तरक्की की है. आइए जानते हैं कि नए सेक्टर और पुराने सेक्टर में क्या अंतर है और कमाई के मामले में कौन से सेक्टर आगे हैं.

Show Quick Read
Key points generated by AI, verified by newsroom
  • नोएडा के पुराने सेक्टर स्वतंत्र घर, नए में ऊंची इमारतें।
  • नए सेक्टरों में आधुनिक सुविधाएँ, पुराने में पार्किंग समस्या।
  • नए एक्सप्रेसवे सेक्टरों में संपत्ति की कीमतों में तेज़ वृद्धि।
  • पुराने सेक्टरों में किराए की निरंतर माँग, अच्छी कमाई।

Noida Sectors: पिछले दो दशकों में नोएडा में जबरदस्त बदलाव आया है. जहां शहर के पुराने सेक्टर स्वतंत्र घरों, लोकल मार्केट और दिल्ली से नजदीकी को ध्यान में रखकर बसाए गए थे वहीं नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के किनारे बसे नए सेक्टर आधुनिक शहरी हब के तौर पर उभरे हैं. यहां ऊंची इमारतें और बड़े कमर्शियल प्रोजेक्ट देखने को मिलते हैं. इससे इंफ्रास्ट्रक्चर, लाइफस्टाइल, ‌ कनेक्टिविटी और निवेश की संभावनाओं के मामले में दोनों इलाकों के बीच साफ फर्क दिखता है. घर खरीदने वालों और निवेशकों के लिए प्रॉपर्टी से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले इन अंतरों को समझना जरूरी है. आइए जानते हैं कमाई के मामले में कौन से सेक्टर सबसे आगे हैं.

पुराने और नए सेक्टर के बीच क्या फर्क है?

नोएडा के पुराने सेक्टर जैसे कि 15, 19, 27, 37, 44, 55 और 56 अपने बसे बसाए मोहल्ले, स्वतंत्र घरों और मजबूत सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जाने जाते हैं. इसके उलट नए सेक्टर जैसे 94, 137, 143 और 150 को आधुनिक शहरी प्लानिंग के तहत डिजाइन किया गया है. यहां ऊंची रिहायशी इमारतें, गेटेड सोसायटी और आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं. 

इंफ्रास्ट्रक्चर और हाउसिंग पैटर्न 

दोनों इलाकों के बीच सबसे बड़ा फर्क उनके हाउसिंग स्टाइल का है. पुराने सेक्टर में ज्यादातर स्वतंत्र बंगले, प्लॉट वाले घर और कम ऊंचाई वाली रिहायशी सोसाइटी हैं. ये इलाके तब बने थे जब जमीन ज्यादा मौजूद थी और आबादी का घनत्व कम था. वहीं नए सेक्टर में ऊंची इमारत वाले अपार्टमेंट कॉम्पलेक्स, इंटीग्रेटेड टाउनशिप और आधुनिक गेटेड कम्युनिटी हैं. 

पार्किंग और नागरिक सुविधा 

पुराने सेक्टर में पार्किंग एक बड़ी चुनौती है. ज्यादातर सड़कें आज की गाड़ियों की संख्या के हिसाब से नहीं बनी थी. इस वजह से जाम और सड़क किनारे पार्किंग की समस्या होती है. साथ ही कुछ इलाकों में ड्रेनेज सिस्टम और नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर पुराने हो रहे हैं. नए सेक्टर में डेडीकेटेड बेसमेंट पार्किंग, चौड़ी अंदरूनी सड़कें, क्लबहाउस, जिम, स्विमिंग पूल, पार्क और 24 घंटे सुरक्षा जैसी सुविधाएं मिलती हैं.

कनेक्टिविटी और पहुंच

पुराने सेक्टर को दिल्ली के पास होने का बड़ा फायदा मिलता है. दिल्ली बॉर्डर के पास के इलाके दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन और पहले से बने सड़क नेटवर्क से अच्छी तरह से जुड़े हुए हैं. वहीं नए सेक्टर नोएडा ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के किनारे  स्थित हैं. 

यह भी पढ़ेंः मुगल बादशाह क्यों नहीं करते थे अपनी बेटियों के निकाह, किस मजबूरी में उठाते थे यह कदम?

प्रॉपर्टी की कीमत के लिहाज से कौन से सेक्टर बेहतर? 

जब प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ने की बात आती है तो बीते कुछ सालों में नए एक्सप्रेसवे सेक्टर पुराने इलाकों से काफी आगे रहे हैं. खबरों के मुताबिक पिछले तीन से पांच सालों में नोएडा एक्सप्रेसवे के पास के सेक्टर में प्रॉपर्टी की कीमतों में 70% से 110% तक की बढ़ोतरी हुई है. कुछ कमर्शियल हब सेक्टरों में अच्छी खासी ग्रोथ देखी गई. इसी के साथ सेक्टर 150 और नोएडा एक्सटेंशन जैसे इलाकों को इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और जेवर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट से जुड़ी ग्रोथ की संभावनाओं का फायदा मिल रहा है. 

इसी के साथ ज्यादातर पुराने सेक्टर में प्रॉपर्टी की कीमतें काफी हद तक स्थिर रही हैं. हालांकि कीमत बढ़ रही है लेकिन जमीन की सीमित उपलब्धता और इन इलाकों के पूरी तरह विकसित होने की वजह से यह रफ्तार आमतौर पर धीमी हो गई है. 

कौन से सेक्टर बेहतर रेंटल इनकम देते हैं? 

किराए से कमाई के मामले में पुराने सेक्टरों को फायदा मिलता रहता है. सेक्टर 15A, 44, 52, 62 जैसी जगहों पर किराएदार की मांग लगातार बनी रहती है. ऐसा इसलिए क्योंकि ये दिल्ली के पास हैं और यहां अच्छे स्कूल, अस्पताल, ऑफिस और बाजार हैं. सेक्टर 62 और 63 जैसे कमर्शियल सेंटर पास के आईटी और कॉर्पोरेट हब में काम करने वाले प्रोफेशनल के बीच लोकप्रिय हैं.

हालांकि सेक्टर 137 और 143 जैसे नए सेक्टर में भी किराए की मांग तेजी से बढ़ रही है. इसकी वजह आईटी प्रोफेशनल्स और कॉर्पोरेट कर्मचारियों का यहां आना है. इन इलाकों में आमतौर पर सालाना लगभग 4% से 6% तक रेंटल यील्ड मिलती है.

यह भी पढ़ेंः न कोई बार, न शराब की दुकानें... फिर मुगल काल में लोग कैसे खरीदते थे शराब

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

कब-कब हुई पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की कोशिश, इसमें West का मतलब क्या?
कब-कब हुई पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की कोशिश, इसमें West का मतलब क्या?
क्या सिर्फ फल ही खाते हैं फलाहारी महाराज, क्यों पड़ा यह नाम?
क्या सिर्फ फल ही खाते हैं फलाहारी महाराज, क्यों पड़ा यह नाम?
क्या हैं फायर ब्रिगेड के इस्तेमाल के नियम, गलत यूज पर कितनी सजा?
क्या हैं फायर ब्रिगेड के इस्तेमाल के नियम, गलत यूज पर कितनी सजा?
क्या पुलिस कहीं और कभी भी लगा सकती है बैरिकेड्स? जानें इसके नियम
क्या पुलिस कहीं और कभी भी लगा सकती है बैरिकेड्स? जानें इसके नियम

वीडियोज

बीवी की बेवफाई....पति का गुस्सा !
Rahul Gandhi पर पुलिस का एक्शन! हिरासत में लेकर बस में बैठाया
प्रेमानंद महाराज के यहां जाने पर मिले 5 करोड़?
विपक्ष का प्रदर्शन...कांग्रेस ने किया 'हाइजैक' ?
त्योहारों से पहले RBI का बड़ा झटका! महंगा हुआ Loan, बढ़ी Repo Rate

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
हिरासत से छूटने के बाद राहुल गांधी की पहली प्रतिक्रिया, 'संसद, सड़क और जंतर-मंतर...'
हिरासत से छूटने के बाद राहुल गांधी की पहली प्रतिक्रिया, 'संसद, सड़क और जंतर-मंतर...'
झारखंड के CM हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का निधन
झारखंड के CM हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का निधन
आडवाणी से मिले PM मोदी, जनसेवा के 25 साल पूरे होने पर की मुलाकात
आडवाणी से मिले PM मोदी, जनसेवा के 25 साल पूरे होने पर की मुलाकात
भारतीय गेंदबाज ने टेस्ट में 14 विकेट लेकर रचा इतिहास, बन गया नया 'वर्ल्ड रिकॉर्ड'
भारतीय गेंदबाज ने टेस्ट में 14 विकेट लेकर रचा इतिहास, बन गया नया 'वर्ल्ड रिकॉर्ड'
'प्रियंका और राहुल गांधी को जान का खतरा', पप्पू यादव बोले- 'दिल्ली पुलिस…'
'प्रियंका और राहुल गांधी को जान का खतरा', पप्पू यादव बोले- 'दिल्ली पुलिस…'
अपने फार्म हाउस पर कैसे उगाएं जापान का कामो बैंगन, कितना होगा मुनाफा?
अपने फार्म हाउस पर कैसे उगाएं जापान का कामो बैंगन, कितना होगा मुनाफा?
तुम मुझे पाकिस्तान भेजना चाहते हो...सचिन पर बरसीं सीमा हैदर
तुम मुझे पाकिस्तान भेजना चाहते हो...सचिन पर बरसीं सीमा हैदर
Old Photo Album: एलबम से चिपक गई हैं पुरानी तस्वीरें? बिना फाड़े ऐसे निकालें
एलबम से चिपक गई हैं पुरानी तस्वीरें? बिना फाड़े ऐसे निकालें
Embed widget