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Mughal Era Alcohol Trade: न कोई बार, न शराब की दुकानें... फिर मुगल काल में लोग कैसे खरीदते थे शराब

Mughal Era Alcohol Trade: मुगल काल में शराब की दुकानें नहीं होती थी. आइए जानते हैं कि लोग शराब कहां से खरीदते थे.

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  • मुगल काल में शराब आसानी से उपलब्ध, बादशाह भी पीते थे।
  • देशी शराब कलाल समुदाय बनाते, सराय में बेची जाती थी।
  • पुर्तगाली विदेशी शराब लाते, कई बादशाह इसका सेवन करते थे।
  • औरंगजेब ने शराब पर प्रतिबंध लगाया, जिससे व्यापार गुप्त हुआ।

Mughal Era Alcohol Trade: मुगल काल में आज की तरह शराब की दुकानें, सरकारी ठेके या फिर मॉडर्न बार नहीं होते थे. इसके बावजूद भी स्थानीय उत्पादकों, व्यापारियों, सराय और विदेशी व्यापारियों के एक अच्छे नेटवर्क के जरिए समाज के अलग-अलग वर्गों में शराब आसानी से उपलब्ध थी. दिलचस्प बात यह है कि बाबर, अकबर और जहांगीर जैसे कई मुगल बादशाह शराब पीते थे. 

स्थानीय उत्पादक शराब का मुख्य स्रोत थे 

आम नागरिकों के लिए शराब का मुख्य स्रोत कलाल या फिर कलवार समुदाय था. ये स्थानीय शराब बनाने और बेचने में माहिर थे. ये पारंपरिक शराब बनाने वाले महुआ के फूल, अंगूर, गन्ने के रस और खजूर जैसी चीजों का इस्तेमाल करके ताड़ी, अर्क और मदिरा जैसी ड्रिंक बनाते थे. शराब बक्सर गांव और कस्बों में छोटी-छोटी भट्टियों में बनाई जाती थी. यहां ग्राहक सीधे इसे खरीदकर अपने बर्तनों में घर ले जा सकते थे.

सराय और बाजार की भूमिका 

बड़ा मुगल साम्राज्य व्यापारिक मार्गों से जुड़ा हुआ था. इन पर सराय या फिर सड़क के किनारे बने विश्राम गृह होते थे. यहां लंबी यात्राओं के दौरान रुका जाता था. ये जगहें अक्सर स्थानीय शराब की बिक्री की अनौपचारिक केंद्र बन जाती थी. इसके अलावा मीना बाजार जैसे खास बाजार रईसों और शाही दरबार के सदस्यों की जरूरतों को पूरा करते थे. इन बाजारों में कभी-कभी महंगी और विदेशी शराब चुपके से या फिर खास इजाजत के साथ बेची जाती थी. 

विदेशी व्यापारी प्रीमियम शराब की सप्लाई करते थे 

मुगल रईसों के पास आम लोगों की तुलना में कई तरह की शराब मौजूद थी. पुर्तगाली, ब्रिटिश और डच व्यापारी यूरोप और फारस से वाइन और स्पिरिट इंपोर्ट करते थे. यह विदेशी व्यापारी अक्सर राजनीतिक और व्यावसायिक संबंध मजबूत करने के लिए बादशाहों और प्रभावशाली दरबारियों को तोहफे के तौर पर प्रीमियम शराब देते थे. इंपोर्टेड शराब को विलासिता की चीज माना जाता था और यह अक्सर अमीरों को ही मिलती थी. 

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शराब को लेकर मुगल बादशाहों का नजरिया 

हालांकि इस्लामी सिद्धांतों के तहत शराब पीने को आधिकारिक तौर पर गलत माना जाता है लेकिन मुगल शासकों का नजरिया काफी अलग था. बाबर ने खुलकर अपनी शराब पीने की आदत के बारे में लिखा. इसी के साथ जहांगीर शराब के शौकीन होने के लिए खास तौर पर मशहूर हुए. अकबर ने ज्यादा संतुलित नजरिया अपनाया और पूरी तरह से पाबंदी लगाने के बजाय कुछ नियम लागू किए. इस छूट की वजह से मुगल काल के ज्यादातर समय में शराब का व्यापार फला-फूला.

औरंगजेब ने व्यापार को गुप्त किया 

औरंगजेब के शासनकाल में हालात तेजी से बदले. उसने सख्त इस्लामी कानून लागू किए और शराब पर रोक लगा दी. जब शराब की कानूनी बिक्री नामुमकिन हो गई तो यह व्यापार गुप्त रूप से होने लगा. शराब बनाने की गुप्त भट्टियां चलती रहीं और गुप्त नेटवर्क के जरिए शराब की तस्करी होती रही.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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