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क्या है फॉर्म 47? जिसे लेकर UN के भरे मंच पर भारत ने पाक को लगाई लताड़

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में फॉर्म 47 का जिक्र कर पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार की चुनावी धांधली को उजागर किया और उसके फर्जी लोकतांत्रिक दावों की पोल वैश्विक मंच पर खोल दी.

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में भारत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा फैलाए गए झूठ का पुरजोर खंडन करते हुए उसे दुनिया के सामने पूरी तरह बेनकाब कर दिया. भारतीय मिशन की राजनयिक पेटल गहलोत ने राइट ऑफ रिप्लाई का उपयोग करते हुए न केवल आतंकवाद और ईशनिंदा कानून पर पड़ोसी देश को घेरा, बल्कि उनके अपने देश के अंदरूनी तंज फॉर्म 47 सरकार का जिक्र कर कड़ा प्रहार किया. भारत ने साफ कर दिया कि जो मुल्क अपने नागरिकों को बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार नहीं दे सकता, वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर लोकतंत्र और मानवाधिकार का पाखंडी उपदेश न दे. इस मंच पर जो फॉर्म 47 का जिक्र छिड़ा है, आइए जान लेते हैं कि आखिर वह क्या है.

वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के दावों की खुली पोल

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की ओर से कश्मीर, लोकतंत्र और मानवीय मूल्यों पर लंबे-चौड़े भाषण दिए गए. इसके जवाब में भारत की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने करारा रुख अपनाते हुए याद दिलाया कि दुनिया यह कभी नहीं भूलेगी कि ओसामा बिन लादेन को किस देश ने अपनी सैन्य अकादमी के ठीक बगल में छिपाकर रखा था. भारत ने स्पष्ट कर दिया कि पाकिस्तान की यह पुरानी आदत बन चुकी है कि वह मंच पर आकर खुद को पाक-साफ दिखाने की कोशिश करता है, जबकि उसकी असलियत आतंकवाद और दमन पर टिकी है.

फॉर्म 47 और भारत का तीखा प्रहार

पाकिस्तानी नेतृत्व को असहज करते हुए भारतीय राजनयिक ने सीधे शहबाज शरीफ प्रशासन को 'फॉर्म 47 की सरकार' कहकर संबोधित किया. भारत ने कहा कि यह कोई भारत का दिया हुआ नाम नहीं है, बल्कि पाकिस्तान की आम जनता और वहां का विपक्ष खुद अपनी सरकार को इसी नाम से बुलाता है. इस तंज के जरिए भारत ने वैश्विक समुदाय का ध्यान पाकिस्तान में हुए हालिया आम चुनावों की अनियमितताओं और वहां सेना के इशारे पर बनाई गई कठपुतली सरकार की तरफ खींचा.

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क्या है फॉर्म 47? जिसे लेकर UN के भरे मंच पर भारत ने पाक को लगाई लताड़

2024 के चुनाव में धांधली और सेना की भूमिका

फरवरी 2024 में पाकिस्तान के भीतर हुए आम चुनाव काफी विवादों में घिरे रहे थे. उस चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी PTI को दरकिनार करने और नवाज शरीफ व शहबाज शरीफ की पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए सेना के हस्तक्षेप के गंभीर आरोप लगे थे. मतगणना के दौरान अप्रत्याशित देरी हुई और चुनावी आंकड़ों में अचानक बदलाव देखे गए, जिससे वहां के आवाम का भरोसा चुनाव व्यवस्था से पूरी तरह उठ गया.

क्या होता है चुनाव आयोग का फॉर्म 47?

तकनीकी रूप से देखें तो फॉर्म 47 पाकिस्तान निर्वाचन आयोग का एक बेहद जरूरी आधिकारिक दस्तावेज है. किसी भी संसदीय क्षेत्र में वोटिंग खत्म होने के बाद जब सभी पोलिंग बूथों से प्राथमिक आंकड़े इकट्ठा होते हैं, तो रिटर्निंग ऑफिसर इस फॉर्म को तैयार करता है. इसमें किसी क्षेत्र के अनंतिम यानी अस्थाई नतीजों का संकलन होता है, जिसमें उम्मीदवारों को मिले शुरुआती वोट और रद्द किए गए वोटों का ब्योरा दर्ज किया जाता है.

फॉर्म 45 बनाम फॉर्म 47 का असली विवाद

पाकिस्तान में वोटों की हेराफेरी का असली खेल फॉर्म 45 और फॉर्म 47 के बीच आंकड़ों के भारी अंतर को लेकर शुरू हुआ. फॉर्म 45 सीधे पोलिंग बूथ के स्तर पर बना वह कागज होता है जिस पर वास्तविक मतदान दर्ज होता है. विपक्ष का आरोप था कि बूथों पर तो उनके उम्मीदवार जीत रहे थे और फॉर्म 45 में वही दिख रहा था, लेकिन जब केंद्रीय स्तर पर फॉर्म 47 तैयार किया गया तो आंकड़ों को बदलकर विपक्षी उम्मीदवारों को हरा दिया गया.

विपक्ष का तंज और शहबाज सरकार पर ठप्पा

इमरान खान की पार्टी और अन्य आलोचकों ने आरोप लगाया कि रातों-रात चुनाव परिणाम पलट दिए गए और फर्जी कागजातों के आधार पर नया जनादेश तैयार किया गया. इसी जालसाजी के विरोध में पाकिस्तान के विपक्ष ने मौजूदा शासन को संवैधानिक जनादेश के बजाय ‘फॉर्म 47 की उपज' कहना शुरू कर दिया. तब से वहां की सियासत में शहबाज सरकार को बिना किसी जनसमर्थन वाली असंवैधानिक व्यवस्था के रूप में चिन्हित करने के लिए यह नाम इस्तेमाल किया जा रहा है.


क्या है फॉर्म 47? जिसे लेकर UN के भरे मंच पर भारत ने पाक को लगाई लताड़

2024 चुनाव के कुछ बड़े आंकड़े

पाकिस्तान के उस विवादास्पद आम चुनाव में करीब 12.86 करोड़ पंजीकृत मतदाता मौजूद थे. हालांकि, जब वोट डाले गए तो सिर्फ 6.13 करोड़ लोगों ने ही अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया, जिससे कुल वोटिंग प्रतिशत महज 47.65% ही दर्ज हुआ. चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, पूरे देश में 90 हजार से ज्यादा मतदान केंद्र बनाए गए थे और 10 लाख से अधिक प्रशासनिक व सुरक्षा कर्मचारियों को तैनात किया गया था.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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