सोलर पैनल में क्यों लगता है नेट मीटर, यह कैसे करता है काम?
नेट मीटर एक दोतरफा बिजली मीटर है, जो सोलर पैनल द्वारा ग्रिड में भेजी गई और ग्रिड से ली गई बिजली का सटीक हिसाब रखता है. यह उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिल को भारी हद तक कम करता है.

अक्षय ऊर्जा और सौर ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ते कदम के बीच नेट मीटर एक क्रांतिकारी माध्यम बनकर उभरा है. साधारण बिजली मीटरों के विपरीत यह उपकरण घर पर सोलर पैनल लगाने वाले उपभोक्ताओं के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रहा है. अधिकांश लोग सोलर सिस्टम लगाने की योजना तो बना लेते हैं, लेकिन उन्हें यह पता नहीं होता कि ग्रिड से उनका बिजली बिल कैसे शून्य या कम हो जाता है. नेट मीटर वास्तव में आपकी छत पर बनने वाली बिजली और बिजली विभाग द्वारा दी जाने वाली बिजली का पारदर्शी हिसाब रखने का काम करता है.
क्या है नेट मीटर और इसका बेसिक ढांचा?
नेट मीटर दरअसल एक आधुनिक बाय-डायरेक्शनल यानी दोतरफा काम करने वाला डिजिटल मीटर है. सामान्य मीटर केवल बिजली की खपत को रिकॉर्ड करते हैं, लेकिन यह विशेष उपकरण बिजली के आने और जाने दोनों दिशाओं को मापता है. यह ग्रिड-कनेक्टेड या ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम का एक अनिवार्य हिस्सा माना जाता है. इसके जरिए बिजली वितरण कंपनी को सटीक जानकारी मिलती है कि आपके सोलर पैनल ने कितनी अतिरिक्त बिजली तैयार कर ग्रिड को वापस भेजी है और आपने ग्रिड से कितनी बिजली इस्तेमाल की है.
दिन के समय ग्रिड को बिजली भेजने का तरीका
जिन ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम में महंगी बैटरी नहीं लगी होती, उनके लिए सरकारी या स्थानीय बिजली ग्रिड ही एक तरह से वर्चुअल पावर बैंक या स्टोरेज की तरह काम करता है. दिन के समय जब कड़क धूप होती है, तब सोलर पैनल बहुत ज्यादा बिजली पैदा करते हैं. यदि उस समय आपके घर में बिजली उपकरण कम चल रहे हों, तो बची हुई अतिरिक्त बिजली खुद-ब-खुद पावर ग्रिड में ट्रांसफर हो जाती है. नेट मीटर इस एक्सपोर्ट की गई हर एक यूनिट को डिजिटल रूप से तुरंत दर्ज कर लेता है.
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रात और बादलों के दौरान बिजली का इस्तेमाल
रात के समय या जब आसमान में गहरे बादल छाए होते हैं, उस वक्त सोलर पैनल बिजली का उत्पादन बंद या बहुत कम कर देते हैं. ऐसे समय में आपके घर के टीवी, फ्रिज, पंखे और लाइटें चलाने के लिए बिजली सीधे सरकारी ग्रिड से आती है. नेट मीटर ग्रिड से ली गई इस बिजली की यूनिट्स को अलग से जोड़ता रहता है. यानी दिन में आपकी बनाई बिजली ग्रिड में जमा होती है और जरूरत पड़ने पर आप उसी ग्रिड से वापस बिजली खींच लेते हैं.

महीने के अंत में बिजली बिल की गणना
महीने का बिल तैयार करते समय बिजली कंपनी नेट मीटर का डेटा चेक करती है. बिल की गणना एक बहुत ही सरल फॉर्मूले पर होती है- 'कुल इंपोर्ट यूनिट - कुल एक्सपोर्ट यूनिट = नेट कंजप्शन'. यदि आपने महीने भर में 300 यूनिट बिजली ग्रिड से ली और आपके सोलर पैनल ने 250 यूनिट बिजली ग्रिड को भेजी, तो आपको केवल बची हुई 50 यूनिट का ही भुगतान करना होगा. यदि आपकी एक्सपोर्ट यूनिट्स ज्यादा हैं, तो वह फायदा अगले महीने के बिल में जुड़ जाता है.
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