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CNG क्या होती है? क्यों मानी जाती है पेट्रोल और डीजल से बेहतर ईंधन, जानिए इसके फायदे

सीएनजी एक कम्प्रेस की गई प्राकृतिक गैस है, जो एकदम साफ, गंध रहित और गैर-संक्षारक है. सीएनजी मुख्य रूप से मीथेन से बनी होती है.

What Is CNG: पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से लोगों का ध्यान इनके वैकल्पिक फ्यूल्स की तरफ भी बढ़ता जा रहा है. प्राकृतिक गैस भी पारंपरिक ईंधनों के वैकल्पिक स्रोतों में से ही एक है. व्हीकल कंपनियों ने भी गाड़ियों के CNG Varient लॉन्च किए हैं, ताकि लोगों के जेब से ईंधन के खर्च का बोझ कम हो सके.

कम कीमत होने के साथ-साथ CNG गाड़ियों का माइलेज भी बढ़ा देती है. क्या आपको मालूम है कि CNG क्या है और यह कैसे बनती है? अगर नहीं, तो घबराने की जरूरत नहीं है. आज के इस लेख में आपको सीएनजी के बारे में सभी जरूरी जानकारी मिलने वाली है. 

सीएनजी क्या है?

सीएनजी को वाहनों में ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा, CNG का इस्तेमाल बिजली उत्पादन और घरों में खाना पकाने के लिए भी किया जा सकता है. CNG की खोज सन् 1626 में अमेरिका में विलियम हार्ट (William Hart) ने की थी. CNG का पूरा नाम Compressed Natural Gas होता है. जिसका हिंदी में मतलब होता है- संपीड़ित प्राकृतिक गैस.

सीएनजी एक कम्प्रेस की गई प्राकृतिक गैस है, जो एकदम साफ, गंध रहित और गैर-संक्षारक है. सीएनजी मुख्य रूप से मीथेन से बनी होती है. Standard Atmospheric Pressure पर इसका जितना आयतन होता है, उससे 1% से भी कम आयतन में इसे कम्प्रेस किया जाता है. सीएनजी से बहुत कम मात्रा में प्रदूषण होता है, इसलिए इसे Eco-Friendly Gas भी कहा जाता है. यह अन्य ईंधन जैसे पेट्रोल और डीजल की तुलना में सस्ती होती है. ईंधन के बढ़ते दामों और पर्यावरण प्रदूषण से बचने के लिए सीएनजी का इस्तेमाल ज्यादातर ऑटोरिक्शा, पिकअप ट्रकों, स्कूल बसों आदि में किया जा रहा है. 

कैसे बनती है CNG? 

प्राकृतिक गैस पृथ्वी की सतह के नीचे कोयले और तेल के साथ होती है. लाखों वर्ष पूर्व पौधों और पशुओं के अवशेषों के नीचे दबे रहने से यह तैयार होती है. धरती और समुद्र सतह के नीचे प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार हैं. इन गैसों को कुओं से ड्रिल करके बाहर निकाला जाता है. कुओं से निकलते समय इसमें मीथेन के साथ-साथ इथेन, प्रोपेन, पैंटेन और जल वाष्प आदि भी शामिल होते हैं. इसके अलावा इसमें सल्फर, नाइट्रोजन, हाइड्रोजन सल्फाइड और कार्बन डाइऑक्साइड आदि भी होते हैं. कुओं से निकलने के बाद इस प्राकृतिक गैस को प्रोसेसिंग प्लांट्स में भेजा जाता है, वहां इसमें से जल वाष्प और नॉन हाइड्रोकार्बन यौगिकों को अलग किया जाता है.

गैस के गंधरहित होने के कारण कुछ केमिकल जिन्हें Odorants कहा जाता है, इसमें डाले जाते हैं ताकि गैस के पाइपलाइन में रिसाव होने का पता चल सके. Coal Mining के दौरान या पहले भी कोयले के भंडार से Coalbed Methane को निकाला जाता है और इसे बिना किसी स्पेशल ट्रीटमेंट के Natural Gas पाइपलाइन में डाल दिया जाता है. इस पाइपलाइन से यह गैस CNG Stations तक पहुंचती है. यहां इसे Dryer से गुजार कर दो या पांच चरणों में गैस को कंप्रेस करके 20-25 MPa (2900.75 से 3625.94 psi) के प्रेशर को प्राप्त किया जाता है. एक बार कंप्रेस हो जाने के बाद इसे स्टोर करके पेट्रोल या डीजल की तुलना में काफी कम कीमत पर वितरित किया जाता है. 

सीएनजी से होने वाले फायदे 

  • CNG को एक हरित ईंधन माना जाता है. इससे ग्रीन हाउस प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है. 
  • CNG के गैर-संक्षारक होने की वजह से व्हीकल के स्पार्क प्लग की आयु बढ़ती है. 
  • हवा से हल्की होने की वजह से लीक होने की स्थिति में यह तुरंत हवा में फैल जाती है और आसानी से हवा में मिक्स हो जाती है. 
  • CNG में Narrow Flammability Range होती है. इसीलिए यह अन्य ईंधन की तुलना में अधिक सुरक्षित मानी जाती है. 
  • इसका ज्वलन तापमान उच्च होता है, इसलिए इसमें आकस्मिक और अपने आप होने वाले Ignition की संभावना घट जाती है. 
  • CNG की कीमत कम होती है और व्हीकल्स में इसके इस्तेमाल से अच्छा माइलेज मिलता है. 
  • इसके इस्तेमाल से Lubricant Oils की लाइफ भी बढ़ती है, क्योंकि यह Crankcase Oil को दूषित और पतला नहीं बनाती है. 

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