Climate Change: रिकॉर्ड तोड़ तापमान की ओर जा रहे हम! जानिए कितने साल बाद आग का गोला बन जाएगी धरती?
Climate Change: धरती पर बढ़ता तापमान अब एक चिंता का विषय बनता जा रहा है. आइए जानते हैं कि आखिर कितने सालों में पृथ्वी आग का गोला बन जाएगी.

- वैज्ञानिकों की चेतावनी: पृथ्वी भविष्य में जीवन के लिए अयोग्य होगी।
- 250 मिलियन साल बाद पैंजिया अल्टिमा, जीवन मुश्किल बनेगा।
- एक अरब साल में सूर्य चमकेगा, पृथ्वी के महासागर सूखेंगे।
- 4 अरब साल बाद पृथ्वी शुक्र जैसी गरम, निर्जन बनेगी।
Climate Change: दुनिया पहले ही रिकॉर्ड तोड़ने वाली हीटवेव, बढ़ते ग्लोबल तापमान और मौसम की खतरनाक घटनाओं को देख रही है. वैज्ञानिकों और जलवायु विशेषज्ञों ने बार-बार चेतावनी दी है कि आने वाले साल अब तक के सबसे गर्म सालों में से एक हो सकते हैं. हालांकि जलवायु से जुड़ी ये छोटी अवधि की चिंताएं काफी ज्यादा डरावनी हैं लेकिन शोधकर्ताओं ने पृथ्वी के भविष्य पर भी लंबी नजर डाली है. ऐसा इसलिए ताकि इस बात को समझा जा सके कि हमारे ग्रह का भविष्य क्या है. यूनाइटेड किंगडम की ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की एक स्टडी के मुताबिक पृथ्वी इतनी गरम हो सकती है कि यह इंसानों और ज्यादातर जीवों के रहने लायक नहीं रहेगी.
250 मिलियन सालों में पैंजिया अल्टिमा का बनना
वैज्ञानिकों का यह अनुमान है कि अब से लगभग 250 मिलियन साल बाद पृथ्वी के महाद्वीप धीरे-धीरे एक दूसरे के करीब आएंगे. इसी के साथ पैंजिया अल्टिमा नाम के एक बड़े सुपरकॉन्टिनेंट में मिल जाएंगे. जमीन का यह बड़ा हिस्सा दुनिया के मौसम के पैटर्न और वायुमंडलीय सर्कुलेशन को काफी हद तक बदल देगा.
जैसे-जैसे महाद्वीप जुड़ेंगे सुपरकॉन्टिनेंट के अंदरूनी हिस्सों में महासागरों से कम नमी पहुंचेगी. साथ ही टेक्टोनिक हलचल की वजह से ज्वालामुखी की गतिविधि बढ़ेंगी. इस वजह से भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड वायुमंडल में छोड़ी जाएगी. इन बदलावों से औसत ग्लोबल तापमान 50 डिग्री सेल्सियस से 60 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच सकता है. इससे इंसानों और ज्यादातर स्तनधारियों के जीवित रहने के लिए हालात काफी मुश्किल हो जाएंगे.
बढ़ती कार्बन डाइऑक्साइड हालात को और खराब करेगी
पैंजिया अल्टिमा का बनना न सिर्फ भूगोल को बदलेगा बल्कि ग्रीनहाउस प्रभाव को भी बढ़ाएगा. ज्वालामुखी के बड़े विस्फोटों से भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड निकलेगी. इससे वायुमंडल में ज्यादा गर्मी जमा होगी. ग्रीनहाउस गैसों की ज्यादा मात्रा और महासागरों से मिलने वाले ठंडक में कमी की वजह से ग्रह का बड़ा हिस्सा काफी ज्यादा गर्म हो जाएगा. शोधकर्ताओं का यह अनुमान है कि ऐसे हालात में पृथ्वी की सतह का लगभग 12% हिस्सा स्तनधारियों के जीवन के लिए बिल्कुल भी सही नहीं होगा.
पृथ्वी के महासागर गायब
सूरज उम्र बढ़ने के साथ धीरे-धीरे और चमकदार होता जा रहा है. वैज्ञानिकों का यह अनुमान है कि लगभग एक अरब साल में सूरज की चमक आज की तुलना में लगभग 10% ज्यादा होगी. सौर ऊर्जा में इस बढ़ोतरी से पूरे ग्रह का तापमान काफी ज्यादा बढ़ जाएगा. आखिरकार पृथ्वी मॉइस्ट ग्रीनहाउस चरण में प्रवेश कर सकती है. यहां वायुमंडल में जल वाष्प जमा हो जाएगी और महासागर सूखने लगेंगे. वक्त के साथ पृथ्वी के महासागर, नदियां और झीलें पूरी तरह से गायब हो सकती हैं. इससे यहां का माहौल काफी ज्यादा सूखा और रहने लायक नहीं रह जाएगा.
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आज से चार अरब साल बाद
भविष्य की तरफ आगे की बात करें तो वैज्ञानिकों का यह मानना है कि पृथ्वी पर भी रनअवे ग्रीन हाउस इफेक्ट हो सकता है. यह बिल्कुल शुक्र ग्रह पर देखा गया जैसा हो सकता है. इस चरण के दौरान तापमान इतना ज्यादा हो जाएगा कि ग्रह की सतह पर मौजूद चट्टानें और धातुएं पिघलने लगेंगी. वायुमंडल काफी घना और गर्म हो जाएगा. इससे पृथ्वी एक आग उगलती दुनिया में बदल जाएगी. यहां जीवन का अस्तित्व वैसा नहीं रह पाएगा जैसा हम जानते हैं.
क्या है वर्तमान स्थिति?
हालांकि ग्रहों में होने वाले ये बदलाव करोड़ों या फिर अरबों साल दूर हैं इसके बावजूद भी जलवायु विशेषज्ञ अभी हो रहे बदलावों को लेकर काफी चिंतित हैं. अंतरराष्ट्रीय जलवायु एजेंसियों की रिपोर्ट बताती हैं कि इंसानों की वजह से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की वजह से वैश्विक तापमान लगातार बढ़ रहे हैं.
वैज्ञानिक चेतावनी देते हैं कि आने वाले कुछ सालों में तापमान के पुराने रिकॉर्ड टूट सकते हैं. दुनिया के कई हिस्सों में हीटवेव, सूखा, भारी बारिश और मौसम की दूसरी चरम घटनाएं पहले से ही ज्यादा बार हो रही हैं.
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