Waqf Amendment Bill: वक्फ बोर्ड मामले पर दिल्ली कूच की बात, जानें कब हुआ भारत में मुस्लिमों का सबसे बड़ा आंदोलन
Waqf Amendment Bill: वक्फ संशोधन बिल आज लोकसभा में पेश किया गया है, जिसके खिलाफ देश के मुसलमान हैं. चलिए आपको बताएं कि देश में पहला मुस्लिमों का सबसे बड़ा आंदोलन कब हुआ.

Waqf Amendment Bill: अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने आज लोकसभी में वक्फ संशोधन बिल 2024 पेश कर दिया है. इस बिल के जरिए वक्फ बोर्ड की संपत्ति को कानून के दायरे में लाए जाने का प्रस्ताव है. इस मामले को लेकर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि अगर यह बिल पास हो गया तो इसके खिलाफ देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा और हम चुप नहीं बैठेंगे. हालांकि यह पहली बार नहीं है जब मुस्लिम समाज के लोग किसी बात पर आपत्ति को लेकर आंदोलन कर रहे हों, इसके पहले भी देश में 1940 में मुस्लिमों का एक सबसे बड़ा आंदोलन हो चुका है. आज इस आर्टिकल में हम आपको उसके बारे में बताएंगे.
कब हुआ था मुसलमानों का सबसे बड़ा आंदोलन
भारत में 1940 में ऑल इंडिया मुस्लिम लीग द्वारा पाकिस्तान की मांग मुसलमानों के सबसे बड़े आंदोलनों में से एक था. मोहम्मद अली जिन्ना ने इसका नेतृत्व किया था. 1906 में ऑल इंडिया मुस्लिम लीग की स्थापना मुस्लिम विद्वानों, धार्मिक नेताओं और राजनेताओं द्वारा की गई थी. शुरू में तो यह भारत में मुसलमानों के अधिकारों के लिए लड़ा, लेकिन बाद में ऑल इंडिया मुस्लिम लीग एक अलग मुस्लिम राष्ट्र की मांग की थी. 1930 का वह दशक था जब डॉ. सर अल्लामा मोहम्मद इकबाल ने एक अलग मुस्लिम देश बनाए जाने की अवधारणा प्रस्तुत की थी. बस इसके बाद से ऑल इंडिया मुस्लिम लीग ने लाहौर में पाकिस्तान की मांग शुरू कर दी थी.
मुहम्मद अली जिन्ना ने किया था इसका नेतृत्व
मुसलमानों के आंदोलन का नेतृत्व करने वाले प्रमुख नेताओं में मुहम्मद अली जिन्ना शामिल थे. इन्होंने ही 1940 में पाकिस्तान बनाए जाने का प्रस्ताव रखा था. यही वजह है कि मुहम्मद अली जिन्ना को पाकिस्तान का जन्मदाता माना जाता है. मुस्लिम लीग का यह सत्र 22 मार्च से 24 मार्च 1940 तक लाहौर के मिंटो पार्क (अब इकबाल पार्क) में हुआ था. पहली बार पाकिस्तान शब्द का प्रयोग और उसे अलग देश बनाने के लिए चौधरी रहमत अली ने जनवरी 1933 में प्रकाशित एक पर्चे में किया था. उनकी मांग थी कि पंजाब, नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर, सिंध, बलूचिस्तान और कश्मीर यानि भारत के पांच उत्तरी राज्यों को मिलाकर राष्ट्रीय दर्जा दिया जाए.
लाहौर अधिवेशन के बाद बदल गया जिन्ना का रुख
रहमत अली ने भले ही सबसे पहले पाकिस्तान बनाए जाने की मांग की हो लेकिन यह मुस्लिम लीग के प्रस्ताव के बाद से लोकप्रिय हुआ. इस प्रस्ताव को एके फजलुल हक ने पेश किया और पाकिस्तान बनाए जाने की मांग को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया. इतिहासकार बताते हैं कि लाहौर अधिवेशन के बाद जिन्ना के रवैये में बड़ा बदलाव देखा गया. पहले वह हिंदू मुस्लिम एकता के पैरोकार हुआ करते थे, लेकिन बाद में इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद जिन्ना ने उस पर अमल किया और विभाजन के बाद जिन्ना पाकिस्तान के पहले गवर्नर जनरल बने.















