उत्तराखंड बीजेपी चीफ ने सोशल मीडिया पोस्ट करने वालों को दी 'धमकी', जानें इस पर क्या कहता है कानून
Social Media Law: उत्तराखंड बीजेपी के अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि वो मुख्यमंत्री से कहेंगे कि इस पर नजर रखी जाए कि कौन-कौन सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर लिख रहा है.

Social Media Law: पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों से खूब बवाल चल रहा है, अब आप सोच रहे होंगे कि खानपुर में दो नेताओं के बीच तमंचे लहराने की बात तो पुरानी हो चुकी है... लेकिन अब एक और विधायक और मंत्री साहब ने कुछ ऐसा कर दिया, जिसके बाद एक बार फिर उत्तराखंड सुर्खियों में हैं. उत्तराखंड के वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने विधानसभा में जोशीले अंदाज में पहाड़ और पहाड़ियों को लेकर जो बात कही, उससे लोग गुस्से में हैं. वहीं सरकार की तरफ से डैमेज कंट्रोल की बजाय अब सोशल मीडिया पर इस बारे में लिखने वालों को चेतावनी दी जा रही है. ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि इसे लेकर कानून क्या कहता है.
कैसे शुरू हुआ पूरा बवाल?
दरअसल उत्तराखंड में पिछले कुछ महीनों में कई ऐसी बयानबाजी और पहाड़ विरोधी बातें हुई हैं, जिससे पहाड़ बनाम बाहरी लोगों वाली बहस तेज हो गई है. इस बहस को शुरू करने में बीजेपी के पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह का भी बड़ा हाथ है. इसके बाद बीजेपी सरकार इस बात को लेकर डैमेज कंट्रोल कर रही थी और ये कहा जा रहा था कि क्षेत्रवादी बातें करना गलत है. उत्तराखंड सभी लोगों का है और उन सभी का यहां पूरा अधिकार है.
मंत्री जी ने कह दी ये बात
अब इसी पहाड़ बनाम बाहरी वाली बहस का जवाब देते हुए उत्तराखंड सरकार में मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल थोड़ा भटक गए और उन्होंने पहाड़ी लोगों को लेकर टिप्पणी कर दी. कांग्रेस का आरोप है कि उन्होंने पहाड़ियों के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया. जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है उसमें मंत्री जी को कहते सुना जा सकता है- ये उत्तराखंड पहाड़ी लोगों के बना है क्या? पहाड़ में है कौन, कोई मध्य प्रदेश से आया है कोई राजस्थान से आया है, कोई कहीं से आया है... इसे पहाड़ी देसी में क्यों ले जाना चाहते हैं आप?
फजीहत के बाद दी गई चेतावनी
अब प्रेमचंद अग्रवाल के मामले को लेकर हो रही फजीहत के बीच उत्तराखंड बीजेपी के अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि वो मुख्यमंत्री से कहेंगे कि इस पर नजर रखी जाए कि कौन-कौन सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर लिख रहा है और ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का प्रबंध किया जाए. उनके इस बयान ने आग में घी डालने का काम किया है और अब तमाम लोग उन्हें चुनौती दे रहे हैं कि वो पोस्ट करेंगे और गिरफ्तार करके दिखाइए.
उत्तराखंड में सोशल मीडिया पोस्ट पर गिरफ्तारी!
देश के तमाम राज्यों में सोशल मीडिया को लेकर अलग-अलग कानून और नियम भी बनाए गए हैं. उत्तराखंड में सरकारी कर्मचारियों को सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट करने की पाबंदी है. वहीं पिछले कुछ महीनों में ये भी देखा गया है कि सीएम पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ बोलने या फिर सरकार के खिलाफ लिखने को लेकर भी गिरफ्तारियां हुई हैं. हाल ही में उत्तराखंड में चल रहे नेशनल गेम्स को लेकर गुरुग्राम में रहने वाले उत्तराखंड के एक युवक को पुलिस रातोंरात उठाकर ले गई थी, हालांकि कोर्ट में जाते ही पुलिस की ये तेजी काम नहीं आई और जज ने युवक को तुरंत रिहा करने के आदेश दे दिए.
क्या कहता है कानून?
अब सवाल है कि सोशल मीडिया को लेकर कानून क्या है, आईटी एक्ट की कई धाराओं के तहत ऐसे मामले में कार्रवाई होती है. इसमें अगर कोई किसी समुदाय को भड़काने के लिए पोस्ट करता है या फिर समाज में नफरत फैलाने के लिए कोई वीडियो या तस्वीर डालता है तो उसके खिलाफ एक्शन लिया जा सकता है. इसके अलावा सांप्रदायिक टिप्पणी या फिर किसी नेता को जान से मारने की धमकी जैसी पोस्ट पर भी कार्रवाई होती है.
आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत पहली बार ऐसा करने वाले को तीन साल तक की जेल और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है. आईटी एक्ट की धारा 66ए सरकार या पुलिस को ये ताकत देती है कि वो ऐसे किस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है, जिसने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट की हो. इसी का सहारा लेते हुए पुलिस और सरकार लोगों की गिरफ्तारी करती है, हालांकि अगर ये गिरफ्तारी सिर्फ आलोचना पर हुई है या सरकार से सवाल पूछा गया है तो कोर्ट से सरकार और पुलिस को फटकार लगती है और गिरफ्तार व्यक्ति को आसानी से बेल मिल जाती है.
ये भी पढ़ें - पानी के जहाज से भागने के बाद सावरकर का क्या हुआ था, दोबारा कैसे चढ़े थे अंग्रेजों के हत्थे?
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL























