पुरुष के शरीर में गर्भाशय? आखिर कितना अनोखा है यह मामला, जानें इसका साइंस?
Uterus In Male Body: हाल ही में दिल्ली में एक पुरुष के अंदर गर्भाशय का अनोखा मामला देखने को मिला है. आइए जानते हैं कि यह मामला कितना अनोखा है और इसके पीछे क्या साइंस है.

- दिल्ली में व्यक्ति की बांझपन जांच में गर्भाशय मिला।
- यह दुर्लभ स्थिति ‘पर्सिस्टेंट मुलेरियन डक्ट सिंड्रोम’ कहलाती है।
- भ्रूण विकास के दौरान हार्मोनल कमी से यह अंग विकसित होते हैं।
- जटिलताओं से बचने हेतु अक्सर सर्जरी की सलाह दी जाती है।
Uterus In Male Body: दिल्ली में 26 साल के एक व्यक्ति ने शादी के 2 साल बाद भी बच्चा ना हो पाने पर डॉक्टर से सलाह ली. मेडिकल जांच के दौरान डॉक्टरों को पता चला कि उसके शरीर में गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब मौजूद है. ये अंदरूनी प्रजनन अंग आमतौर पर महिलाओं के प्रजनन तंत्र से जुड़े होते हैं. इस असामान्य खोज से पर्सिस्टेंट मुलेरियन डक्ट सिंड्रोम नाम की दुर्लभ स्थिति का पता चला.
हालांकि कोई व्यक्ति बाहर से पूरी तरह पुरुष जैसा दिख सकता है लेकिन शरीर के अंदर महिलाओं से जुड़े कुछ प्रजनन अंग मौजूद हो सकते हैं. ऐसा उस हार्मोन की समस्या के कारण होता है जो उनके सामान्य विकास के लिए जिम्मेदार होता है.
पर्सिस्टेंट मुलेरियन डक्ट सिंड्रोम क्या है?
भ्रूण के विकास की शुरुआती हफ्तों में भ्रूण में प्रजनन नलिकाओं के दो सेट होते हैं जो पुरुष और महिला प्रजनन अंगों के विकास में योगदान दे सकते हैं. पुरुषों के सामान्य विकास में विकसित हो रहे वृक्षण एंटी मुलेरियन हार्मोन बनाते हैं. यह हार्मोन मुलेरियन नलिकाओं को खत्म करने या फिर सिकुड़ने का काम करते हैं. यह नलिकाएं गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब जैसे अंगों में विकसित हो सकती हैं.
पर्सिस्टेंट मुलेरियन डक्ट सिंड्रोम मैं यह प्रक्रिया ठीक से नहीं हो पाती. या तो शरीर पर्याप्त एएमएच नहीं बनाता है या फिर कोशिकाएं हार्मोन पर प्रतिक्रिया नहीं देती हैं. यही वजह है कि मुलेरियन अंग शरीर के अंदर ही रह सकते हैं भले ही व्यक्ति की बाहरी शारीरिक बनावट पुरुष जैसी ही हो. यह स्थिति आमतौर पर एएमएच या एएमएचआर2 जिन में म्यूटेशन से जुड़ी होती है.

पुरुष के शरीर में गर्भाशय क्यों हो सकता है?
पुरुष जैसी बाहरी शारीरिक बनावट वाले व्यक्ति में गर्भाशय की मौजूदगी को जन्म से पहले होने वाले प्रजनन विकास के तरीके से समझा जा सकता है. पुरुष भ्रूण में एएमएच मुलेरियन नलिकाओं को आगे विकसित होने से रोकता है. जब यह नहीं होता या फिर उसका बायोलॉजिकल सिग्नल ठीक से काम नहीं करता तो यह नलिकाएं बनी रह सकती है और एक विकसित गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब बना सकती है. जरूरी बात यह है कि इन अंगों के होने का मतलब यह नहीं होता कि व्यक्ति में अंडाशय है या फिर वह गर्भवती हो सकता है.
इसके लक्षण क्या हैं?
पर्सिस्टेंट मुलेरियन डक्ट सिंड्रोम वाले लोगों का रूप रंग पूरी तरह से सामान्य पुरुषों जैसा हो सकता है. उनके चेहरे के बाल, आवाज और पुरुषों वाले दूसरे बाहरी लक्षण सामान्य रूप से विकसित हो सकते हैं.
इस स्थिति में अक्सर कोई साफ लक्षण नहीं दिखते और यह सालों तक बिना पता चले रह सकती है. इसका पता कभी-कभी तब चलता है जब कोई व्यक्ति पुरुषों में बांझपन की जांच करवाता है या फिर जब डॉक्टर अंडकोष के नीचे ना उतरने की जांच करते हैं. क्योंकि इन लोगों में आमतौर पर ओवरी नहीं होती इस वजह से उन्हें पीरियड्स नहीं आते और वे बच्चों को जन्म नहीं दे सकते.

क्यों दी जाती है सर्जरी की सलाह?
डॉक्टर व्यक्ति की मेडिकल स्थिति के आधार पर शरीर में मौजूद म्यूलेरियन संरचनाओं को हटाने और नीचे ना उतरे अंडकोष का इलाज करने की सलाह दे सकते हैं. एक बड़ी चिंता नीचे ना उतरे अंडकोष से जुड़ा जोखिम है. ऐसा इसलिए क्योंकि इससे जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है जिसमें टेस्टिकुलर कैंसर भी शामिल है.
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क्या कोई व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है?
आपको बता दें कि दुनिया भर के चिकित्सा इलाज में अब तक इस तरह के मामले 300 से भी कम दर्ज किए गए हैं. यह इसे विज्ञान की दुनिया में एक काफी ज्यादा दुर्लभ घटना बनाता है. पर्सिस्टेंट मुलेरियन डक्ट सिंड्रोम होने का यह मतलब नहीं होता कि व्यक्ति सामान्य जीवन नहीं जी सकता. इलाज व्यक्ति की शारीरिक बनावट, हार्मोन के स्तर, फर्टिलिटी की स्थिति और दूसरे मेडिकल कारकों पर निर्भर करता है.
जहां सर्जरी की जरूरत होती है वहां अंदरूनी संरचनाओं को हटाने के लिए कम चिर फाड़ वाली लैप्रोस्कोपिक प्रकिया का इस्तेमाल किया जा सकता है. टेस्टोस्टेरोन का सही स्तर बनाए रखने के लिए जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की देखरेख में हार्मोन ट्रीटमेंट पर भी विचार किया जा सकता है.
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