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US Fertility Rate: 80 के दशक में 8-8 बच्चे पैदा करता था एक कपल, तब अमेरिका में क्या हाल था?

US Fertility Rate: भारत में पहले के समय में एक महिला का छह से आठ बच्चों को जन्म देना नॉर्मल था, लेकिन क्या आपको पता है कि उस दौर में अमेरिका में प्रजनन दर कितनी थी, चलिए विस्तार से समझें.

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  • 1980 के दशक में भारत की प्रजनन दर 4.5-5.0 थी।
  • भारत में परिवार नियोजन से प्रजनन दर कम हुई।
  • अमेरिका की प्रजनन दर 1.84 थी, 2.1 से नीचे।

US Fertility Rate: आज के समय में चाहे भारत हो या अमेरिका, लोग एक या दो से ज्यादा बच्चे पैदा नहीं करना चाह रहे हैं. लोग इतने में ही परिवार को पूरा मान लेते हैं, लेकिन अस्सी का दशक ज्यादातर लोगों को याद ही होगा. वह ऐसा दौर था जब भारत के गांव-गांव में आंगन में बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं और एक घर में छह से आठ बच्चे होना नॉर्मल बात थी. लेकिन क्या आपको पता है कि जब हमारे देश में लंबे परिवारों का चलन था, उस वक्त दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका का क्या हाल था. वहां पर उस दौरान फर्टिलिटी रेट क्या था. चलिए उस दौर का दिलचस्प इतिहास जानते हैं.

भारत में बड़े परिवारों का पुराना दौर

साल 1980 और उसके आसपास की बात करें तो भारत में संयुक्त परिवार और बड़े कुनबे की गहरी जड़ें थीं. सरकारी आंकड़ों और रिकॉर्ड्स को खंगाला जाए तो पता चलता है कि उस दौर में फर्टिलिटी केट 4.5 से 5.0 तक हुआ करता था. इसका सीधा मतलब है कि तब एक महिला अपने औसत जीवनकाल में करीब 5 बच्चों को तो जन्म देती ही थी. वहीं अगर गांव की बात की जाए तो वहां पर छह से आठ बच्चे होना नॉर्मल बात थी. लोग बच्चों को अपने बुढ़ापे का सहारा मानते थे और खेती-किसानी में मददगार समझते थे. यही वजह थी लोग परिवार बढ़ाने पर तुले हुए थे.

कब हुई बदलाव की शुरुआत और जागरूकता

हालांकि 80 के दशक में देश में बदलाव की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी थी. अगर 1970 की बात की जाए तो देश में प्रजनन दर 5.4 के आसपास हुआ करती थी, जो कि 1980 आते-आते थोड़ी कम हो गई थी. सरकार ने हम दो हमारे दो जैसे नारों और परिवार नियोजन के कार्यक्रम शुरू कर दिए थे. इसका असर सबसे पहले शहरों में रहने वाले पढ़े-लिखे लोगों पर देखने को मिल और उन्होंने परिवार नियोजन के महत्व को समझना शुरू किया. लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में तब भी पुरानी सोच हावी रही और बड़े परिवारों का सिलसिला नहीं थमा.

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अस्सी के दशक में अमेरिका में प्रजनन दर कितनी थी?

अब दुनिया के ताकतवर देश अमेरिका की बात कर लेते हैं, जिसकी स्थिति तब भी भारत से एकदम अलग थी और आज भी है. जहां भारत के शहरों में 5-6 और गांवों में 7-8 बच्चे पल रहे थे, वहीं अमेरिका में तब भी समाज आधुनिकता की सीढ़ी पर था. रिपोर्ट्स बताती हैं कि वहां पर महिलाओं की प्राथमिकता करियर बनाने और छोटे परिवारों की थी. अमेरिका में अस्सी के दशक में एक महिला अपने जीवनकाल में औसतन 1.8 से 2.0 बच्चों को ही जन्म दे रही थी. वहां पर बहुत पहले ही बड़े-बड़े लंबे परिवारों का दौर खत्म हो चुका था.

घटते प्रजनन से चिंता में अमेरिका

अमेरिका संस्था सेंटर्स फॉर डिजीर कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के आंकड़ों पर गौर करें तो साल 1980 में अमेरिका की कुल प्रजनन दर 1.84 थी, जो कि 1983 तक घटकर 1.8 ही रह गई थी. लेकिन किसी भी देश की आबादी को स्थिर रखने के लिए प्रजनन दर का 2.1 होना जरूरी होता है, लेकिन उस दौर में भी अमेरिका इस आंकड़े से काफी पीछे चल रहा था. बता दें कि अमेरिका में चार या उससे ज्यादा बच्चों वाले गिने-चुने सिर्फ 11 फीसदी परिवार ही बचे हुए थे.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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