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Oil Formation: जमीन के नीचे कहां से आता है तेल, जानें यह कुछ ही जगहों पर क्यों पाया जाता है?

Oil Formation: वेनेजुएला में दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार पाया जाता है. आइए जानते हैं कि जमीन के नीचे तेल कैसे बनता है और यह सिर्फ कुछ ही जगह पर क्या होता है.

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  • लाखों साल पहले मरे समुद्री जीव-पौधे तलछट में दबे।
  • दबाव और गर्मी से अवशिष्ट पदार्थ कच्चे तेल में बदले।
  • तेल निर्माण हेतु विशिष्ट तापमान, दबाव और भूवैज्ञानिक स्थितियां आवश्यक।
  • प्राचीन महासागरों वाले क्षेत्रों में तेल भंडार मिलते हैं।

Oil Formation: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के दौरान लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर भारत जैसे कुछ देश ईंधन के लिए दूसरे देशों पर निर्भर क्यों है? तेल या फिर पेट्रोल सिर्फ कुछ ही जगहों पर क्यों पाया जाता है और यह जमीन के नीचे कैसे बनता है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

जमीन के नीचे तेल कैसे बनता है? 

तेल बनने की प्रक्रिया काफी ज्यादा लंबी और धीमी होती है. इस प्रक्रिया को जीवाश्म ईंधन निर्माण के नाम से जाना जाता है. लगभग 30 से 40 करोड़ साल पहले प्लैंकटन जैसे सूक्ष्मजीव और समुद्री पौधे मर गए और महासागरों की तलहटी में जमा हो गए. समय के साथ कीचड़, रेत और गाद की परतें इन अवशेषों के ऊपर जम गईं.

जैसे-जैसे परतें जमा होती गई दबाव काफी बढ़ गया और पृथ्वी की अंदरूनी गर्मी ने भी इसमें एक बड़ी भूमिका निभाई. ऑक्सीजन की गैर मौजूदगी में गर्मी और दबाव के इस मेल ने धीरे-धीरे दबे हुए जैविक पदार्थ को हाइड्रोकार्बन में बदल दिया. इससे कच्चा तेल बना. इस प्रक्रिया में लाखों साल लगते हैं. यही वजह है कि एक बार इस्तेमाल हो जाने के बाद तेल को जल्दी से दोबारा नहीं बनाया जा सकता.

गर्मी और दबाव की भूमिका 

तेल बनने के लिए तापमान और दबाव की एक खास सीमा की जरूरत होती है. अगर तापमान काफी कम हो तो जैविक पदार्थ तेल में नहीं बदल पाता. अगर यह काफी ज्यादा हो तो यह तेल के बजाय प्राकृतिक गैस में बदल सकता है. यह नाजुक संतुलन ही उन मुख्य वजहों में से एक है जिनकी वजह से तेल का निर्माण पृथ्वी की सतह के नीचे कुछ खास इलाकों तक ही सीमित है. 

तेल सिर्फ कुछ जगहों पर ही क्यों पाया जाता है? 

तेल पूरे ग्रह पर एक जैसा नहीं फैला हुआ है. दरअसल इसका बनना तीन जरूरी भूवैज्ञानिक स्थितियों पर निर्भर करता है. पहली बात वहां ऐसी सोर्स रॉक्स होनी चाहिए जिनमें जैविक पदार्थ भरपूर मात्रा में हो. इनके बिना तेल बिल्कुल भी नहीं बन सकता. 

दूसरी बात वहां पर एक जाल जैसी संरचना होनी चाहिए. क्योंकि तेल पानी से हल्का होता है इस वजह से वह स्वाभाविक रूप से चट्टानों के बीच से ऊपर की तरफ बढ़ता है. उसे सतह पर पहुंचने से रोकने के लिए चट्टानों की एक ऐसी परत होनी चाहिए जो पानी को अपने से गुजरने ना दे. 

तीसरी बात उस इलाके का इतिहास ऐसा होना चाहिए कि वहां कभी पुराने जमाने में महासागर रहे हों. आज के तेल से भरपूर कई इलाके खासकर मध्य पूर्व में, कभी समुद्रों से ढके हुए थे. वक्त के साथ टेक्टोनिक हलचलों ने वहां के भूभाग को बदल दिया. 

तेज जमीन के नीचे कैसे जमा होता है? 

बनने के बाद तेल एक ही जगह पर रुका नहीं रहता. यह धीरे-धीरे चट्टानों से गुजरता है जब तक कि यह जमीन के नीचे बने भंडारों में फंस नहीं जाता. यह भंडार प्राकृतिक भंडारण स्थलों की तरह काम करते हैं. 

प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्र 

वैश्विक स्तर पर वेनेजुएला, सऊदी अरब, रूस और इराक जैसे देशों में तेल का सबसे बड़ा भंडार मौजूद है. भारत में तेल राजस्थान के बाड़मेर, गुजरात के खंभात, मुंबई हाई, असम के डिगबोई और कृष्णा गोदावरी बेसिन जैसे क्षेत्रों में पाया जाता है.

यह भी पढ़ें: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत आने में जहाज को कितने घंटे लगते हैं, इसमें कितना खर्च हो जाता है तेल?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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