War Crimes: ईरान पर हमला करके क्या क्राइम कर रहे अमेरिका-इजरायल, क्या उन्हें मिलेगी इसकी सजा?
War Crimes: हाल ही में ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर जिनेवा संधियों के उल्लंघन का आरोप लगाया है. आइए जानते हैं कि क्या ईरान पर हमला करके इन दोनों देशों ने कोई जुर्म किया है.

- ईरान ने अमेरिका-इजरायल पर सैन्य हमले का आरोप लगाया।
- हमलों से नागरिक ठिकानों और ढांचों को नुकसान पहुंचा।
- अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत यह युद्ध अपराध माना जाएगा।
- सबूत मिलने पर जवाबदेही देश और व्यक्तियों की होगी।
War Crimes: बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय सहित वैश्विक कानूनी संस्थान से संपर्क किया है. ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर बिना किसी उकसावे के सैन्य आक्रामकता का आरोप लगाया है. ईरान के मुताबिक फरवरी के अंत से जारी इन हमलों ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और जिनेवा संधियों का उल्लंघन किया है. लेकिन क्या इन्हें कानूनी तौर पर अपराध माना जाता है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
नागरिकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए
आधुनिक युद्ध के सबसे बुनियादी सिद्धांतों में से एक है भेदभाव. इसका मतलब है कि सेनाओं को नागरिकों और सैन्य लक्ष्यों के बीच अंतर करना चाहिए. ईरान ने यह आरोप लगाया है कि स्कूल और अस्पताल के साथ-साथ हजारों घरों को भी नुकसान पहुंचा है. अगर यह साबित हो जाता है कि नागरिकों को सीधे तौर पर निशाना बनाया गया था तो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इसे युद्ध अपराध माना जाएगा.
नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले
जिनेवा संधियां बिजली ग्रिड, जल प्रणाली और खाद्य आपूर्ति नेटवर्क जैसे जरूरी नागरिक बुनियादी ढांचे को नष्ट करने पर रोक लगाती हैं. ऐसे आरोप कि इन सुविधाओं को निशाना बनाया गया था, गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में आ सकते हैं.
अस्पताल और चिकित्सा इकाइयां
अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत चिकित्सा केंद्रों, एंबुलेंस और मानवीय संगठनों को खास सुरक्षा प्राप्त है. स्वास्थ्य सुविधाओं और रेड क्रिसेंट केंद्रों पर हमले के दावे विशेष रूप से गंभीर हैं. अगर इसकी पुष्टि हो जाती है तो ऐसे हमलों को गंभीर उल्लंघन के रूप में देखा जाएगा.
इतना ही नहीं बल्कि किसी वैध सैन्य लक्ष्य पर हमला करते समय भी नागरिकों को होने वाला नुकसान अपेक्षित सैन्य लाभ से ज्यादा नहीं होना चाहिए. मानवाधिकार समूहों ने चिंता जताई है कि कुछ हमले डिस्प्रोपोर्शनल हो सकते हैं.
युद्ध अपराध किसे माना जाता है?
जिनेवा संधियों के तहत नागरिकों की जानबूझकर हत्या करना, बिना किसी सैन्य जस्टिफिकेशन के बड़े पैमाने पर तबाही मचाना, यातना देना और संरक्षित सुविधाओं पर हमला करना युद्ध अपराध माना जाता है. अगर यह आरोप सिद्ध हो जाते हैं तो सिर्फ देश ही नहीं बल्कि इसमें शामिल हर व्यक्ति इसके लिए जवाबदेह ठहराया जा सकता है.
क्या है सजा का प्रावधान?
सैद्धांतिक रूप से आरोप सिद्ध होने पर सजा दी जा सकती है. सार्वभौमिक क्षेत्राधिकार की अवधारणा देशों को युद्ध अपराधों पर मुकदमा चलाने की अनुमति देती है. यानी कि अगर पुख्ता सबूत मौजूद हों तो किसी भी देश के अधिकारियों को विदेश में गिरफ्तार किया जा सकता है.
सजा देने में बाधाएं
इसमें कानूनी और राजनीतिक बाधाएं हैं. अमेरिका और इजरायल आईसीसी की संस्थापक संधि के पक्षकार नहीं हैं. इसका मतलब है कि वे इसके अधिकार क्षेत्र को मानता नहीं देते. इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के जरिए की जाने वाली कार्रवाई को वीटो शक्तियों द्वारा रोका जा सकता है, खासकर अमेरिका जैसे बड़े देशों द्वारा.
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