एक्सप्लोरर

UN Failure: रूस-यूक्रेन से लेकर इजरायल-ईरान तक... कब-कब बुरी तरह फेल हुआ संयुक्त राष्ट्र संघ?

UN Failure: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के दौरान संयुक्त राष्ट्र संघ की बड़ी नाकामी देखने को मिल रही है. आइए जानते हैं कि इससे पहले संयुक्त राष्ट्र कब-कब फेल हो चुका है.

Show Quick Read
Key points generated by AI, verified by newsroom
  • संयुक्त राष्ट्र वैश्विक संघर्ष रोकने में नाकाम, वीटो शक्ति बड़ी बाधा.
  • रूस-यूक्रेन, गाजा युद्धों में यूएन की भूमिका निष्प्रभावी रही.
  • रवांडा, कंबोडिया नरसंहार में यूएन कार्रवाई की घोर उपेक्षा हुई.
  • श्रीलंका, सीरिया युद्धों में भी नागरिकों की सुरक्षा में विफल.

UN Failure: बीते कुछ सालों में संयुक्त राष्ट्र को बड़े वैश्विक संघर्षों को रोकने या सुलझाने में अपने नाकामी के लिए कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा है. रूस यूक्रेन के एक लंबे युद्ध से लेकर मिडल ईस्ट में इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तक संयुक्त राष्ट्र की सीमा बार-बार उजागर हुई है. इस नाकामी के केंद्र में एक काफी बड़ी समस्या है. आइए जानते हैं क्या है यह समस्या और इतिहास में संयुक्त राष्ट्र कितनी बार नाकाम हुआ है.

रूस यूक्रेन युद्ध 

2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद से संयुक्त राष्ट्र प्रभावी कार्रवाई करने के लिए संघर्ष कर रहा है. दरअसल मुद्दा यह है कि रूस खुद सुरक्षा परिषद का एक स्थायी सदस्य है. इससे उसे अपने काम के खिलाफ किसी भी कड़े प्रस्ताव को वीटो करने की अनुमति मिल जाती है. यहां तक कि जब संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2026 में शांति प्रस्ताव पारित किए तो वे काफी हद तक प्रतीकात्मक ही थे. बड़े देशों ने या तो मतदान में हिस्सा नहीं लिया या फिर कोई कड़ा रुख अपनाने से परहेज किया. इससे उनका प्रभाव कमजोर पड़ गया.  इन सबके अलावा ब्लैक सी ग्रेन इनीशिएटिव जैसी मानवीय पहल तब ठप पड़ गई जब रूस ने इससे हाथ खींच लिया. 

इजरायल-ईरान और गाजा 

मिडिल ईस्ट की स्थिति में निर्णायक कार्रवाई करने में संयुक्त राष्ट्र की नाकामी को और भी बड़े पैमाने पर दिखाया. गाजा में चल रहे संघर्ष में संयुक्त राज्य अमेरिका ने स्थायी संघर्ष विराम के प्रस्ताव को रोकने के लिए बार-बार अपनी वीटो शक्ति का इस्तेमाल किया है.

जब 2026 में ईरान और इजरायल के बीच तनाव बढ़ा तब संयुक्त राष्ट्र तनाव कम करने में कोई सार्थक भूमिका निभाने में नाकाम रहा. निंदा और चर्चा के बावजूद जमीन पर संघर्ष जारी रहा. यहां तक कि सुरक्षा परिषद के आधिकारिक बयान से भी घटनाओं के रूप में कोई खास बदलाव नहीं आया. 

रवांडा का नरसंहार 

इसे यूनाइटेड नेशन के इतिहास का सबसे काला अध्याय माना जाता है. दरअसल रवांडा में सिर्फ 100 दिनों के अंदर ही लगभग 8 लाख लोग बेरहमी से मारे गए थे. संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिक महापुर मौजूद थे लेकिन उन्हें हिंसा को रोकने के लिए जनादेश नहीं दिया गया था. जब यह नरसंहार अपनी चरम सीमा पर था तब यूनाइटेड नेशंस ने अपने सैनिकों की संख्या कम कर दी.

श्रीलंका गृहयुद्ध 

2009 में श्रीलंकाई सेना और लिट्टे के बीच युद्ध के अंतिम महीनों में संयुक्त राष्ट्र पर नागरिकों की सुरक्षा ना कर पाने के गंभीर आरोप लगे.  आरोप है कि युद्ध के आखिर दौर में लगभग 40000 नागरिक मारे गए लेकिन संयुक्त राष्ट्र वहां से अपनी टीम हटा चुका था.

सीरियाई गृहयुद्ध 

सीरिया में एक दशक से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध में लाखों लोग मारे गए हैं. दरअसल यहां पर भी वीटो पावर को सबसे बड़ी बाधा माना जा रहा है. रूस और चीन ने सीरिया की सरकार के खिलाफ आने वाले कई कड़े प्रस्ताव को ब्लॉक किया.

कंबोडियाई नरसंहार 

1975 से 1979 तक चला यह नरसंहार काफी भयानक था. खमेर रूज शासन के दौरान कंबोडिया में करीब 20 लाख लोग मारे गए थे. संयुक्त राष्ट्र ने सालों तक इस शासन को मान्यता दी और नरसंहार को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया.

यह भी पढ़ें: देश में कब-कब हुए मजदूरों के बड़े प्रदर्शन, नोएडा में बवाल के बीच देख लीजिए इनके आंदोलन का इतिहास

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

Polymer Plastic: क्या जल‌ सकती है पॉलीमर प्लास्टिक, जानें किन चीजों को बनाने में होता है इसका इस्तेमाल?
क्या जल‌ सकती है पॉलीमर प्लास्टिक, जानें किन चीजों को बनाने में होता है इसका इस्तेमाल?
Smallest Tenure Prime Minister: भारत के किन प्रधानमंत्रियों का रहा है सबसे छोटा कार्यकाल? यहां देखिए लिस्ट
भारत के किन प्रधानमंत्रियों का रहा है सबसे छोटा कार्यकाल? यहां देखिए लिस्ट
Black Hole: ब्लैक होल के नजदीक चला जाए सूरज तो क्या होगा, जानें पृथ्वी पर कैसा पड़ेगा असर?
ब्लैक होल के नजदीक चला जाए सूरज तो क्या होगा, जानें पृथ्वी पर कैसा पड़ेगा असर?
Cricket vs Football: क्रिकेट से ज्यादा पैसा फुटबॉल में क्यों, दोनों स्पोर्ट्स की दीवानगी में कितना अंतर?
क्रिकेट से ज्यादा पैसा फुटबॉल में क्यों, दोनों स्पोर्ट्स की दीवानगी में कितना अंतर?
Advertisement

वीडियोज

Breaking | Malviya Nagar Fire Update: होटल जला तो पता चला, सब मिले हैं जी! | Delhi News | Fire
Malviya Nagar Fire | Janhit: 'करप्शन' की 'आग' में पूरा परिवार खत्म! | Delhi News | Chitra Tripathi
Delhi Malviya Nagar Fire | Bharat Ki Baat: 1 परिवार, 8 जिंदगी...'सिस्टम' ने छीन ली! | Fire Accident
Sandeep Chaudhary: 'FLOP SYSTEM' की पोल-खेल Analysis! | Lavkesh Bajaj | Malviya Fire News | Delhi
Malviya Nagar Fire News | Mahadangal: कागजों मे ही कायदे कानूनहकीकत में तबाही और मौत? | Breaking
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
Aaj Ka Mausam: 19 राज्यों में आंधी-बारिश, 80 KMPH की रफ्तार से तूफानी हवाएं, देश में मानसून की एंट्री के बाद IMD की नई चेतावनी
19 राज्यों में आंधी-बारिश, 80 KMPH की रफ्तार से तूफानी हवाएं, देश में मानसून की एंट्री के बाद IMD की नई चेतावनी
54 साल के हुए योगी आदित्यनाथ: 22 की उम्र में संन्यास, फिर महंत से मुख्यमंत्री तक का सफर, ऐसे हैं अजय सिंह बिष्ट
54 साल के हुए योगी आदित्यनाथ: 22 की उम्र में संन्यास, फिर महंत से मुख्यमंत्री तक का सफर
मार्क बाउचर की टेस्ट वर्ल्ड XI में 3 भारतीय, कोहली-रोहित किसी को जगह नहीं, कप्तान किसे बनाया जानिए
मार्क बाउचर की टेस्ट वर्ल्ड XI में 3 भारतीय, कोहली-रोहित किसी को जगह नहीं, कप्तान किसे बनाया जानिए
Gullak 5 Review: पहले की तरह तो नहीं लेकिन इस बार भी दिल छूएगी रिश्तों की ये 'गुल्लक', अन्नू भैया का सिर्फ चेहरा बदला, अंदाज नहीं
गुल्लक 5 रिव्यू: इस बार भी दिल छूएगी रिश्तों की ये 'गुल्लक', अन्नू भैया का सिर्फ चेहरा बदला, अंदाज नहीं
Maharashtra News: पाकिस्तान से आए मैसेज, डिलीट हुई चैट्स, महाराष्ट्र ATS ने जब्त किए कई मोबाइल फोन
पाकिस्तान से आए मैसेज, डिलीट हुई चैट्स, महाराष्ट्र ATS ने जब्त किए कई मोबाइल फोन
Black Hole: ब्लैक होल के नजदीक चला जाए सूरज तो क्या होगा, जानें पृथ्वी पर कैसा पड़ेगा असर?
ब्लैक होल के नजदीक चला जाए सूरज तो क्या होगा, जानें पृथ्वी पर कैसा पड़ेगा असर?
सिर्फ डिजाइन देखकर Smartwatch लेना पड़ सकता है भारी, खरीदते समय इन चीजों का रखें ध्यान
सिर्फ डिजाइन देखकर Smartwatch लेना पड़ सकता है भारी, खरीदते समय इन चीजों का रखें ध्यान
UP Recruitment 2026: यूपी में निकली एक्साइज कॉन्स्टेबल की बंपर भर्ती, 12वीं पास उम्मीदवार 24 जून तक करें अप्लाई
यूपी में निकली एक्साइज कॉन्स्टेबल की बंपर भर्ती, 12वीं पास उम्मीदवार 24 जून तक करें अप्लाई
Embed widget