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अंबानी-अडानी या कोई और... ट्रंप के टैरिफ का सबसे ज्यादा असर भारत के किस रईस पर?

Tariff Effect On Millionaire Of India: अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए नए टैरिफ से रिलायंस, अदाणी, आर्सेलर मित्तल और बिड़ला जैसी दिग्गज कंपनियों में से आखिर किसपर ज्यादा असर पड़ सकता है.

अमेरिका द्वारा भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने के फैसले ने देश के शीर्ष व्यापारिक घरानों की नींद उड़ा दी है. यह फैसला ऐसे समय आया है जब भारत की सबसे बड़ी कंपनियां जैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज, अदाणी ग्रुप, आर्सेलर मित्तल और आदित्य बिड़ला ग्रुप, पहले से ही वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और रूस से तेल आयात को लेकर अमेरिका की आलोचना का सामना कर रही हैं. अब टैरिफ का सीधा असर इन कंपनियों की कमाई, निर्यात रणनीति और वैश्विक विस्तार योजनाओं पर पड़ सकता है.

रिलायंस इंडस्ट्रीज पर दोहरी मार

मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज रूस से सस्ते कच्चे तेल खरीदकर अपने ऑयल-टू-केमिकल यानि O2C बिजनेस में मुनाफा कमा रही थी. केवल इस साल की पहली छमाही में कंपनी ने 14.2 करोड़ बैरल कच्चा तेल आयात करके करीब 5 हजार करोड़ रुपये बचाए. लेकिन अमेरिका न केवल रूस से तेल आयात करने को लेकर तंज कस रहा है बल्कि उसके पेट्रोकेमिकल और एनर्जी उत्पादों पर टैरिफ लगने से छह लाख करोड़ के O2C कारोबार की 45% निर्यात कमाई पर असर पड़ सकता है.

अदाणी ग्रुप और बिड़ला ग्रुप की चुनौती

गौतम अडाणी के लिए भी टैरिफ किसी झटके से कम नहीं है. उनके पोर्ट्स और टर्मिनल्स 27% बाजार हिस्सेदारी के साथ भारत की रीढ़ माने जाते हैं. अमेरिका में नए टैरिफ से अडाणी पोर्ट्स के विदेशी व्यापार और सोलर मॉड्यूल निर्यात पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. दूसरी ओर, कुमार मंगलम बिड़ला का ग्रुप, जो 60 से अधिक देशों में सक्रिय है और अमेरिका में 1500 करोड़ डॉलर का निवेश कर चुका है, वह अब अपनी टेक्सटाइल और यार्न यूनिट्स को अमेरिका में शिफ्ट कर वहां मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने पर जोर दे रहा है.

आर्सेलर मित्तल की स्टील को झटका

लक्ष्मी मित्तल की आर्सेलर मित्तल हर साल अमेरिका को अरबों डॉलर का स्टील निर्यात करती है. 2024 में कंपनी ने 60 हजार करोड़ रुपये का निर्यात किया था, लेकिन अनुमान है कि नए टैरिफ के कारण मुनाफे में करीब 15 करोड़ डॉलर की कमी आएगी. कंपनी फिलहाल अमेरिका में अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं बढ़ाकर नुकसान की भरपाई करने की कोशिश कर रही है.

ऑटो और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों पर असर

ऑटो सेक्टर भी इससे अछूता नहीं है. आवशर मोटर्स, जो मिड साइज बाइक्स में अमेरिका में 8% बाजार हिस्सेदारी रखती है, अपने स्टॉक को पड़ोसी देशों के गोदामों में शिफ्ट करने की योजना बना रही है ताकि टैरिफ से बचा जा सके. भारत फोर्ज, जिसने पिछले साल अमेरिका को 1700 करोड़ रुपये का निर्यात किया था, अब सतर्क रुख अपनाते हुए वैकल्पिक बाजारों की तलाश कर रही है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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