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Tmc Kalyan Banerjee Attacked: लोकसभा सांसदों को कौन सी सिक्योरिटी मिलती है, अभिषेक बनर्जी के बाद TMC सांसद कल्याण बनर्जी पर भी हमला

Tmc Kalyan Banerjee Attacked: पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा के बीच टीएमसी सांसदों पर लगातार हमले हो रहे हैं. अभिषेक बनर्जी के बाद अब सेरामपुर से सांसद कल्याण बनर्जी पर भी हमला हुआ है.

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  • धमकी मिलने पर गृह मंत्रालय तय करता है सुरक्षा घेरा.

Tmc Kalyan Banerjee Attacked: पश्चिम बंगाल में लोकसभा सांसदों पर हो रहे हिंसक हमलों ने देश की राजनीति और नेताओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. हाल ही में सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी के साथ हुई मारपीट के बाद, अब सेरामपुर से टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी पर भी हमला हुआ है, जिसमें वे लहूलुहान हो गए. इस गंभीर माहौल के बीच आम जनता के मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि देश के सबसे बड़े सदन यानी लोकसभा के माननीय सांसदों को कानूनन कौन सी सुरक्षा मिलती है. आइए समझने की कोशिश करते हैं कि सुरक्षा का यह पूरा सरकारी ढांचा किस तरह काम करता है.

कल्याण बनर्जी पर हमला और चांदीतला की हिंसा

हुगली जिले के चांदीतला पुलिस स्टेशन के सामने रविवार को उस वक्त भारी तनाव फैल गया, जब तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए. टीएमसी कार्यकर्ता अपने नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में थाने में ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे, तभी भाजपा कार्यकर्ताओं ने उन्हें देखकर 'चोर चोर' के नारे लगाने शुरू कर दिए. देखते ही देखते यह सियासी बहस हिंसक झड़प में बदल गई. इसी हंगामे के बीच सेरामपुर के लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी को निशाना बनाया गया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं और उनका खून तक बहने लगा. 

सांसदों को कौन सी सुरक्षा मिलती है?

आम तौर पर लोगों को लगता है कि लोकसभा का चुनाव जीतते ही हर सांसद को ऑटोमैटिक कोई बड़ी वीआईपी सुरक्षा मिल जाती है, लेकिन हकीकत इसके उलट है. नियम के मुताबिक, लोकसभा सांसदों को केवल उनके पद या क्षेत्र के आधार पर कोई विशेष व्यक्तिगत सुरक्षा, जैसे X, Y, Z, या Z+ श्रेणी का घेरा नहीं दिया जाता है. देश के कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो सांसद बनते ही गनर दे दे. उन्हें सुरक्षा केवल उनकी जान को होने वाले निजी खतरे के आधार पर ही मिलती है.

यह भी पढ़ें: Abhishek Banerjee Security: अभिषेक बनर्जी को कौन सी सिक्योरिटी मिली है, इसका खर्चा कौन उठाता है?

संसद भवन के भीतर का अभेद्य सुरक्षा घेरा

भले ही सांसदों को बाहर व्यक्तिगत तौर पर तुरंत सुरक्षा न मिले, लेकिन देश की संसद के भीतर उनकी सुरक्षा का बेहद पुख्ता इंतजाम होता है. जब भी कोई सांसद दिल्ली में संसद भवन के परिसर के अंदर होता है, तो उनकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और पार्लियामेंट सिक्योरिटी सर्विस (PSS) की होती है. संसद भवन की सीमा के अंदर बिना इजाजत या गहन चेकिंग के किसी भी बाहरी तत्व का प्रवेश करना पूरी तरह नामुमकिन होता है. 

राज्य सरकार और स्थानीय पुलिस की जवाबदेही

जब कोई लोकसभा सांसद दिल्ली से बाहर अपने गृह राज्य या खुद के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र में दौरा करता है, तो उनकी सुरक्षा का जिम्मा राज्य सरकार के कंधों पर आ जाता है. स्थानीय इंटेलिजेंस की इनपुट और सांसद के प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए संबंधित राज्य का पुलिस बल उनके लिए गनर या एस्कॉर्ट गाड़ी की व्यवस्था करता है. चांदीतला में कल्याण बनर्जी के मामले में भी स्थानीय पुलिस तैनात थी, लेकिन अचानक भड़की भीड़ के कारण स्थिति बेकाबू हो गई.

गृह मंत्रालय और थ्रेट परसेप्शन का असली नियम

यदि किसी सांसद को लगातार धमकियां मिलती हैं या खुफिया एजेंसियों को उनकी जान पर खतरे की जानकारी होती है, तो इसके लिए एक तय प्रक्रिया है. देश का केंद्रीय गृह मंत्रालय इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की रिपोर्ट के आधार पर सांसद के 'थ्रेट परसेप्शन' यानी खतरे के स्तर का बारीक आकलन करता है. अगर खतरा वास्तविक पाया जाता है, तो गृह मंत्रालय तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें खतरे के अनुसार X, Y, Z या फिर एनएसजी कमांडो वाली सर्वोच्च Z+ सुरक्षा घेरा आवंटित कर देता है. 

यह भी पढ़ें: Attack on Abhishek Banerjee: सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुआ हमला, क्या इस पर कार्रवाई कर सकते हैं लोकसभा स्पीकर?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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