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NRI Village: भारत के इस गांव को कहा जाता है 'NRI गांव', जानें क्या है इसके पीछे की वजह?

NRI Village: भारत में एक ऐसा गांव भी है जहां हर परिवार से कम से कम एक सदस्य विदेश में बसा हुआ है. इस गांव को एनआरआई विलेज भी कहते हैं. आइए जानते हैं कहां है यह गांव.

NRI Village: भारत का ग्रामीण परिदृश्य काफी ज्यादा बड़ा है. यह अपनी सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक समृद्धि का अधिकांश हिस्सा अपने गांवों से ही प्राप्त करता है. पारंपरिक रीति रिवाज से लेकर सदियों पुरानी प्रथाओं तक भारत के गांवों में आपको सब कुछ मिलेगा. लेकिन आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसे गांव की जिसे एनआरआई गांव के नाम से भी जाना जाता है. तो आइए जानते हैं.

एनआरआई का क्या मतलब होता है?

दरअसल इस गांव की एक अलग पहचान को समझने के लिए सबसे पहले यह जानना काफी ज्यादा जरूरी है कि एनआरआई का क्या मतलब है. एनआरआई एक अनिवासी भारतीय को दर्शाता है. इसका मतलब होता है एक ऐसा व्यक्ति जो मूल रूप से भारत का है, लेकिन आमतौर पर रोजगार, व्यवसाय या फिर बाकी व्यक्तिगत कारणों की वजह से 182 दिनों से ज्यादा समय तक विदेश में रहता है. कई एनआरआई अपनी मातृभूमि के साथ मजबूत संबंध बनाए रखते हुए विदेशी नागरिकता भी प्राप्त करते हैं. 

कहां है एनआरआई गांव?

यह एनआरआई गांव गुजरात के आनंद जिले में बसा हुआ है. यह जगह अपने कृषि उत्पादन और ऐतिहासिक स्थलों के लिए नहीं बल्कि अपनी जनसांख्यिकी संरचना के लिए मशहूर है. यहां लगभग हर घर के से कम से कम एक सदस्य विदेश में रहता है.

इसे एनआरआई गांव क्यों कहा जाता है?

इसके पीछे वजह बिल्कुल साफ है कि इस गांव के हर परिवार का कम से कम एक सदस्य विदेश में रहता है. इन निवासियों का एक बड़ा हिस्सा लंदन और संयुक्त राज्य अमेरिका के अलग-अलग हिस्सों में रहता है जबकि बाकी यूरोपीय देशों में बस गए हैं. इस ग्लोबल माइग्रेशन की वजह से इस गांव को यह नाम मिला है. 

वैश्विक संपर्क का प्रतीक 

यह गांव ग्रामीण भारत और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव के एक आकर्षक मिश्रण का प्रतिनिधित्व करता है. विदेश में रहने के बावजूद भी एनआरआई  अपने मूल गांव के साथ मजबूत संबंधों को बनाए हुए हैं और आर्थिक और सामाजिक रूप से योगदान देते हैं. यहां का बुनियादी ढांचा, शिक्षा और सामुदायिक विकास अक्सर इन विदेशी निवासियों के निवेश के साथ ही किया जाता है. भारत के गांव जहां अक्सर अपनी पारंपरिक जीवन शैली और सांस्कृतिक विरासत के लिए पहचाने जाते हैं, वहीं गुजरात का यह एनआरआई गांव अपनी एक अलग पहचान के लिए मशहूर है. यहां के निवासी ग्रामीण जड़ों और अंतरराष्ट्रीय संपर्क के बीच अनोखे संतुलन को बनाए हुए हैं.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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