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भारत के इस राज्य में टूटते हैं सबसे कम रिश्ते, आंकड़े देख रह जाएंगे हैरान

Lowest Divorce Rate India: पूरी दुनिया भर में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जहां पर तलाक की दर काफी कम हैं. आइए जानते हैं कि इस देश के किस राज्य में इसका आंकड़ा सबसे कम है.

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  • भारत में दुनिया की सबसे कम तलाक दर, बिहार में न्यूनतम।
  • मिजोरम में सर्वाधिक जबकि महाराष्ट्र और केरल में भी दरें अधिक।
  • पारंपरिक परिवार, सामाजिक कलंक और आर्थिक निर्भरता कम दरें रखते।
  • शहरीकरण, शिक्षा, आर्थिक स्वतंत्रता से कुछ राज्यों में दरें ज़्यादा।

Lowest Divorce Rate India: भारत में दुनिया में सबसे कम तलाक की दरों में से एक है. इसी के साथ राष्ट्रीय दर अक्सर लगभग एक प्रतिशत मानी जाती है. हालांकि तलाक की दर एक राज्य से दूसरे राज्य में काफी अलग-अलग होती है. भारतीय राज्यों में बिहार में तलाक की दर सबसे कम बताई जाती है. यह लगभग 0.2% 0.3% है. उत्तर प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी दर काफी कम है. 

दूसरी तरफ मिजोरम में तलाक की दर लगभग 6.34% बताई गई है. इसी के साथ महाराष्ट्र में यह दर लगभग 1.9% है. केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों में शहरी इलाकों में भी तलाक का स्तर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है. 

बिहार में तलाक की दर कम क्यों है? 

बिहार में तलाक की कम दर से जुड़ा एक बड़ा कारण पारंपरिक पारिवारिक ढांचों की मजबूती है. कई समुदायों में शादी को आज भी जीवन भर का रिश्ता माना जाता है . इसी के साथ तलाक को सामाजिक रूप से बुरा या फिर शर्मनाक माना जा सकता है. 

वैवाहिक विवाद होने पर संयुक्त और विस्तारित परिवार भी जरूरी भूमिका निभा सकते हैं. परिवार के बड़े बुजुर्ग, रिश्तेदार और कुछ मामलों में समुदाय स्तर की संस्थाएं हस्तक्षेप कर सकती हैं और विवाद के कोर्ट तक पहुंचने से पहले सुलह करने की कोशिश कर सकती हैं.


भारत के इस राज्य में टूटते हैं सबसे कम रिश्ते, आंकड़े देख रह जाएंगे हैरान

सामाजिक कलंक अलगाव को प्रभावित कर सकता है 

बिहार, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित कई उत्तरी राज्यों में परिवार और समुदायों द्वारा तलाक को अभी भी नकारात्मक रूप से देखा जा सकता है. सामाजिक आलोचना का डर जोड़ों को गंभीर मतभेद होने पर भी औपचारिक रूप से शादी खत्म करने से रोक सकता है. 

यही वजह है कि तलाक की कम दर का मतलब यह नहीं होता कि वैवाहिक झगड़े नहीं होते. कुछ जोड़े लंबे वक्त तक मतभेद होने के बावजूद कानूनी अलगावों के मांग किए बिना एक साथ रहना जारी रख सकते हैं. 

आर्थिक निर्भरता एक और वजह है 

आर्थिक परिस्थितियां भी इस बात को प्रभावित कर सकती हैं कि कोई तलाक लेने का फैसला करता है या फिर नहीं. ग्रामीण और अर्ध शहरी क्षेत्र में महिलाओं की स्वतंत्र इनकम या फिर आर्थिक संस्थान सीमित हो सकते हैं और वे अपने पतियों या फिर विस्तारित परिवारों पर निर्भर हो सकती हैं. पर्याप्त आर्थिक आजादी, आवास सुरक्षा या फिर मौजूदा कानूनी विकल्पों की जानकारी के बिना अलग होने का फैसला करना काफी मुश्किल हो सकता है. 


भारत के इस राज्य में टूटते हैं सबसे कम रिश्ते, आंकड़े देख रह जाएंगे हैरान

कुछ राज्यों में तलाक की दर ज्यादा क्यों है?

राज्यों के बीच अंतर को कई सामाजिक और जनसांख्यिकीय कारकों से जोड़ा जा सकता है. इनमें शहरीकरण, शिक्षा, आर्थिक स्वतंत्रता और शादी और अलगाव के प्रति बदलता नजरिया शामिल है. 

उदाहरण के लिए, मिजोरम में देश में सबसे ज्यादा तलाक की दर देखी गई है. यहां तलाक दर लगभग 6.34% है. मुंबई और पुणे जैसे काफी ज्यादा शहरीकृत केंद्र वाले महाराष्ट्र में भी तलाक की दर तुलनात्मक रूप से ज्यादा रही है. केरल में साक्षरता दर 94% से ज्यादा है और कर्नाटक के शहरी इलाकों में भी तलाक का स्तर राष्ट्रीय औसत से ऊपर रहा है.‌

इन अंतरों को सीधे तौर पर इस बात का सबूत नहीं माना जाना चाहिए कि एक राज्य में शादी दूसरे राज्य की तुलना में कम स्थिर हैं. तलाक की ज्यादा दर कानूनी अधिकारों के बारे में ज्यादा जागरूकता, ज्यादा आर्थिक आजादी और नाखुश शादी को औपचारिक रूप से खत्म करने की ज्यादा इच्छा को भी दिखा सकती है. 

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कानूनी प्रक्रिया भी तलाक को हतोत्साहित कर सकती है? 

तलाक लेने की कानूनी प्रक्रिया लंबी, महंगी और भावनात्मक रूप से मुश्किल हो सकती है. आपसी सहमति वाले मामलों में भी कई महीने लग सकते हैं. इसी के साथ विवादित तलाक की कार्यवाही सालों तक चल सकती है. 

ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए बार-बार कोर्ट जाना, कानूनी खर्च और प्रकिया की जटिलता अतिरिक्त बाधाएं बन सकती हैं. यही वजह है कि कुछ वैवाहिक विवाद कभी भी औपचारिक तलाक के मामलों में नहीं बदल पाते.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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