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Disprin Medicine: डिस्प्रिन में ऐसा क्या होता है जिससे तुरंत खत्म होता है दर्द, ये है इसका फॉर्मूला

घरों में किसी का सर दर्द होता है तो सबसे पहले डिस्प्रिन दवा का नाम लिया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये डिस्प्रिन दवा कितने साल पुरानी दवा है और इसका फॉर्मूला क्या होता है.

दर्द का नाम आते है आम परिवारों में सबसे पहले डिस्प्रिन टेबलेट का नाम लेते हैं. लेकिन क्या आप जानते है कि ये दवा कितने साल पुरानी है और इसका फॉर्मूला क्या है. आज हम आपको दर्द के लिए सबसे लोकप्रिय दवाई डिस्प्रिन के बारे में बताएंगे. 

डिस्प्रिन

बता दें कि इस नाम को विश्व स्तर पर 1948 में और भारत में 1958 में लांच किया गया था. ये दुनिया के सबसे लोकप्रिय दर्दनिवारक टेबलेट में एक है. जिसको लेने के बाद ये मिनटों में कई तरह के दर्द को ठीक कर देती है. वैसे हम आपको बता दें कि एस्परिन की कहानी भी 120 साल पुरानी ही है. डिस्प्रिन ने इतने सालों में दुनियाभर के करोड़ों लोगों के दर्द को कम करके राहत दे चुकी है. ये ऐसी दवा है जो हर घर में रहती है और इसका धड़ल्ले से इस्तेमाल होता है. एस्पिरिन के आने से पहले पौधों के औषधीय उपयोग से दर्द को खत्म करने की कोशिश की जाती थी.

हर दर्द में डिस्प्रिन

आपने घरों में अक्सर देखा होगा कि हर दर्द में डिस्प्रिन का इस्तेमाल होता है. लेकिन सवाल है कि ये साधारण सी दिखने वाली गोली कैसे आपके शरीर में असर कर दर्द दूर भगाती है. इसके ज्यादा इस्तेमाल से होने वाले नकारात्मक असर और इसको लेकर फैली भ्रांतियों क्या हैं. 

मीडिया से बातचीत में दिल्ली के एक बड़े निजी अस्पताल में सीनियर कंसल्टेंट डॉ श्रीकांत शर्मा ने बताया कि डिस्प्रिन और एस्प्रिन में खास अंतर नहीं है. दोनों ही में एसिटाइल सैलिसिलिक एसिड यानी एएसए होता है. डिस्प्रिन में सॉल्ट यानी मुख्य तत्व एस्प्रिन ही होता है और ये कोटेड दवा होती है. वहीं एस्प्रिन पर कोई कोटिंग नहीं होती और ये कम से लेकर ज्यादा पावर की दवा हो सकती है. दूसरी ओर डिस्प्रिन ज्यादा तेज दवा मानी जाती है और दर्द में तुरंत राहत के लिए इसे प्रेफर किया जाता है. हालांकि किसी भी तरह के दर्द में डॉक्टर की सलाह के बिना इसे लेना सेहत पर बुरा असर डालता है. ये खून को पतला कर देता है और पाचन तंत्र पर भी बुरा असर डालता है.

कैसे काम करती है ये दवा

इस टैबलेट में सिटिसालिसिलिक एसिड मौजूद होता है. ये शरीर में पहुंचकर एंजाइम की क्रिया जिसे साइक्लो-ऑक्सीजिनेज कहा जाता है, उस अवरुद्ध कर देता है.

डिस्प्रिन के साइड इफेक्ट्स

हर दवाइयां और उनके साइड इफेक्ट्स अलग-अलग तरीकों से लोगों को प्रभावित करते हैं. ऐसे ही कुछ साइड इफेक्ट्स डिस्प्रिन या एस्पिरिन दवाई से भी जुड़े हैं. ऐसा सभी दवाई लेने वालों लोगों के साथ नहीं होता बल्कि कुछ विशेष परिस्थितियों में होता है. ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन के मेडिकल डायरेक्टर प्रोफेसर पीटर वीजबर्ग के अनुसार रोजाना डिस्प्रिन लेने के कई नुकसान हैं. इसमें पेट की खराबी, उल्टियां और अपच सबसे पहले साइड इफेक्ट हैं. ये सीधे पाचन तंत्र पर असर डालता है इसलिए दवा हल्के गुनगुने पानी या दूध के साथ लेना चाहिए, जिससे साइड इफेक्ट थोड़ा कम रहे.

 

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