Tata Sierra: आज से 34 साल पहले भी बाजार में आई थी Tata Sierra, फिर क्यों हो गई थी बंद?
Tata Sierra: टाटा सिएरा एक बार फिर से बाजार में नए अवतार में वापस आ चुकी है. आइए जानते हैं कि 34 साल पहले बाजार में आई टाटा सिएरा को आखिर क्यों बंद कर दिया गया था.

Tata Sierra: टाटा सिएरा की भारत के ऑटोमेटिक इतिहास में खास जगह है. 1991 में लॉन्च हुई टाटा सिएरा देश की पहली कॉम्पैक्ट एसयूवी थी. अब लगभग 2 दशकों के बाद टाटा मोटर्स सिएरा नाम को एक नए अवतार में वापस लेकर आई है. इसी बीच आइए जानते हैं कि ओरिजिनल टाटा सिएरा को आखिर क्यों बंद कर दिया गया था.
भारत की पहली कॉम्पैक्ट एसयूवी
जब टाटा मोटर्स ने सिएरा को पेश किया तो यह उस समय बाजार में मौजूद हर गाड़ी से अलग थी. शुरुआत में इसमें नेचुरली एस्पिरेटेड डीजल इंजन था और बाद में इसे टर्बोचार्ज्ड वर्जन के साथ अपग्रेड किया गया था. 1990 के दशक में यह एक स्टाइल आईकॉन बन गई थी. 1997 में टाटा ने कॉस्मेटिक अपडेट और बेहतर परफॉर्मेंस के साथ एक फेसलिफ्टेड वेरिएंट लॉन्च किया. इस एसयूवी में 1991 से 2003 तक एक दशक से ज्यादा समय तक सड़कों पर अपनी मजबूत मौजूदगी को बनाए रखा. लेकिन इसके बावजूद भी यह मास मार्केट में सफल नहीं हो पाई.
तीन दरवाजे वाला डिजाइन
सिएरा के सामने एक सबसे बड़ी चुनौती थी इसका तीन दरवाजे वाला लेआउट. हालांकि यह ट्रेंडी था और लोगों को पसंद भी आया लेकिन यह भारतीय परिवारों की जरूरत के हिसाब से सही नहीं था. पिछली सीटों पर बैठना असुविधाजनक था, खासकर बुजुर्गों बच्चों के लिए और साथ ही समान रखना भी मुश्किल था. इस समय की वजह से इसके खरीदारों की संख्या सीमित हो गई और लंबी अवधि की बिक्री पर असर पड़ा.
ज्यादा कीमत ने इसे पहुंच से बाहर किया
एक और बड़ी वजह थी इसकी ज्यादा कीमत. 1990 के दशक और 2000 के दशक की शुरुआत के बाजार के लिए जब भारतीय ग्राहक कीमत को लेकर काफी ज्यादा संवेदनशील थे सिएरा की कीमत काफी ज्यादा थी. बंद होने से पहले सिएरा की कीमत लगभग 25 लाख रुपए थी.
कम बिक्री और बढ़ता मुकाबला
ज्यादा कीमत और अव्यावहारिक तीन दरवाजों वाले डिजाइन की वजह से इस गाड़ी की बिक्री सीमित रही. वक्त के साथ-साथ जैसे-जैसे मुकाबला बढ़ता गया आराम और पैसे की अच्छी कीमत वाली नई एसयूवी बाजार में आई. इसका इंजन परफॉर्मेंस, इंटीरियर फीचर और राइड क्वालिटी धीरे-धीरे नई टेक्नोलॉजी से पीछे रहती गई.
टाटा ने क्यों बंद कर दी सिएरा
तीन दरवाजे वाले लेआउट ने इसकी लोकप्रियता को कम कर दिया था. इसी के साथ ज्यादा कीमत की वजह से यह ज्यादातर खरीदारों की पहुंच से बाहर थी. वहीं कम बिक्री की वजह से यह आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं रही. 2003 तक सिएरा भारत के तेजी से बढ़ते ऑटोमोटिव बाजार की दिशा के साथ तालमेल नहीं बिठा पाई.
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Source: IOCL

























